AKTU प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने फार्मास्यूटिकल रिसर्च और हेल्थकेयर में AI के उपयोग, रेगुलेटरी अनुपालन और प्रयोगात्मक सत्यापन पर रखे विचार
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (NIET) के फार्मेसी इंस्टीट्यूट में AKTU प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों और शैक्षणिक चर्चाओं का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय “फार्मास्यूटिकल रिसर्च और हेल्थकेयर प्रैक्टिस में एआई की उभरती भूमिकाएं: चुनौतियां” रहा। दूसरे दिन विशेषज्ञों ने फार्मास्यूटिकल रिसर्च और हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के साथ उससे जुड़े व्यावहारिक और नियामकीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि AI स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में डेटा विश्लेषण, संभावित दवाओं की पहचान, शोध प्रक्रिया और निर्णय लेने में सहायता कर सकता है, लेकिन इसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञ निगरानी और वैज्ञानिक सत्यापन भी आवश्यक है।
AI आधारित डेटा विश्लेषण और रेगुलेटरी अनुपालन पर चर्चा
दूसरे दिन के सत्रों का संयोजन डॉ. अभिजीत देबनाथ और अर्चना सिंह ने किया। अंतरराष्ट्रीय वक्ता डॉ. मुहम्मद काशिफ इकबाल ने AI आधारित डेटा विश्लेषण और रेगुलेटरी अनुपालन पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने फार्मास्यूटिकल प्रक्रियाओं में डेटा की गुणवत्ता और उसकी विश्वसनीयता के महत्व को रेखांकित किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने डेटा क्लीनिंग, प्रोसेस क्वालिटी और AI की मदद से डेटा में विसंगतियों की पहचान जैसे विषयों पर जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि AI की मदद से कई प्रक्रियाओं को अधिक तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है, लेकिन नियामकीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की समीक्षा आवश्यक बनी रहती है। इस दौरान AI आधारित सिस्टम के उपयोग के साथ मानवीय विशेषज्ञता और नियामकीय निगरानी की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
वर्चुअल स्क्रीनिंग और इनसिलिको टूल्स की भूमिका
डॉ. एमडी इम्तियाज हसन ने इनसिलिको टूल्स, वर्चुअल स्क्रीनिंग और फार्माकोफोर आधारित डिजाइन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि AI आधारित कंप्यूटेशनल टूल्स संभावित यौगिकों की पहचान करने और उनमें से प्राथमिकता वाले विकल्पों को चुनने में शोधकर्ताओं की मदद कर सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कंप्यूटर आधारित मॉडल और AI टूल्स प्रयोगशाला परीक्षणों का पूर्ण विकल्प नहीं हैं। संभावित यौगिकों की पहचान के बाद उनके प्रभाव और सुरक्षा को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने के लिए प्रयोगात्मक सत्यापन जरूरी है।
उनके अनुसार, फार्मास्यूटिकल रिसर्च में AI और प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान को एक-दूसरे के पूरक के रूप में इस्तेमाल करने से शोध प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

डिजाइन थिंकिंग और रचनात्मकता पर विशेष सत्र
फ्रांस से आए डॉ. थॉमस डाल ने डिजाइन थिंकिंग और रचनात्मकता पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने फार्मास्यूटिकल रिसर्च में संरचित रचनात्मक प्रक्रियाओं के इस्तेमाल और समस्या समाधान के नए तरीकों पर चर्चा की।
उन्होंने छात्रों और संकाय सदस्यों को सहानुभूति आधारित और पुनरावृत्त दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके सत्र में यह समझने पर जोर रहा कि जटिल समस्याओं के समाधान के लिए केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता की जरूरतों को समझना, नए विचार विकसित करना और उन्हें लगातार बेहतर बनाना भी महत्वपूर्ण है।
छात्रों और शोधार्थियों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में छात्रों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों के व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों को फार्मास्यूटिकल रिसर्च में AI के व्यावहारिक उपयोग, डेटा प्रबंधन, वर्चुअल स्क्रीनिंग, रेगुलेटरी आवश्यकताओं और डिजाइन थिंकिंग जैसे विषयों को समझने का अवसर मिला।
सम्मेलन के माध्यम से फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान को वैश्विक तकनीकी विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया। दूसरे दिन की कार्यवाही में यह भी रेखांकित किया गया कि AI भविष्य में फार्मास्यूटिकल रिसर्च और हेल्थकेयर के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल के साथ वैज्ञानिक प्रमाण, विशेषज्ञ समीक्षा, नियामकीय अनुपालन और प्रयोगात्मक सत्यापन को समान महत्व देना आवश्यक होगा।
NIET फार्मेसी इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और शोधार्थियों को देश-विदेश के विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ फार्मास्यूटिकल रिसर्च में उभरती तकनीकों की समझ विकसित करने का मंच बना।

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