Gujjar Politics News: अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने केंद्र सरकार को सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र, शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक संस्थाओं में भागीदारी बढ़ाने पर जोर; हरिश्चंद्र भाटी ने सक्रिय राजनीति से अलग होने की भी घोषणा की
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिश्चंद्र भाटी ने गुर्जर समाज की राजनीतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक संस्थाओं में उचित भागीदारी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने समाज की शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से तीन महीने के भीतर महासभा के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करने की मांग की। इस संबंध में महासभा की ओर से केंद्र सरकार को 10 सूत्रीय मांग पत्र भी भेजा गया है। गुरुवार को ग्रेटर नोएडा के स्वर्ण नगरी में आयोजित प्रेस वार्ता में हरिश्चंद्र भाटी ने समाज की विभिन्न समस्याओं और संगठन की भावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
राजनीतिक और संवैधानिक संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व की मांग
हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि गुर्जर समाज को राजनीति के साथ-साथ प्रशासन, न्यायपालिका, मीडिया और रोजगार के क्षेत्रों में भी उचित अवसर मिलने चाहिए। समाज की युवा पीढ़ी को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और कौशल विकास के माध्यम से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि महासभा के 10 सूत्रीय मांग पत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शैक्षिक सुविधाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग, रोजगार एवं कौशल विकास, मीडिया में भागीदारी और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने जैसे विषय शामिल हैं।
महासभा की ओर से यह मांग पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, अन्य केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भेजा गया है।
तीन महीने में सरकार से वार्ता की मांग
हरिश्चंद्र भाटी ने केंद्र सरकार से मांग की कि महासभा के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन महीने के भीतर औपचारिक वार्ता की जाए, ताकि समाज की मांगों और समस्याओं पर सकारात्मक पहल हो सके। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो महासभा समाज के बीच जाकर आगे की लोकतांत्रिक रणनीति तय करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज के अधिकारों और मांगों को शांतिपूर्ण तथा संवैधानिक तरीके से उठाया जाएगा।
गुर्जर समाज के ऐतिहासिक योगदान का किया उल्लेख
प्रेस वार्ता के दौरान हरिश्चंद्र भाटी ने 27 अक्टूबर को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित गुर्जर-कुर्मी-पटेल राष्ट्रीय एकता दिवस का उल्लेख किया। यह कार्यक्रम सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें देश-विदेश से समाज के प्रतिनिधियों और युवाओं ने भाग लिया। उन्होंने सम्राट मिहिर भोज, नागभट्ट और 1857 की क्रांति में कोतवाल धन सिंह गुर्जर सहित समाज के ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
हरिश्चंद्र भाटी ने अंग्रेजी शासन के दौरान 1871 में लागू क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून से प्रभावित समुदायों को लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। स्वतंत्रता के बाद 1952 में इन समुदायों को विमुक्त किया गया, लेकिन शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान के क्षेत्र में अभी भी व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है।

दहेज और मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों को समाप्त करने की अपील
हरिश्चंद्र भाटी ने सामाजिक सुधारों पर जोर देते हुए दहेज प्रथा और अनावश्यक मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों को समाप्त करने की अपील की। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति के लिए सामाजिक एकता के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। महासभा समाज के अधिकारों, सम्मान, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को आगे भी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाती रहेगी।
हरिश्चंद्र भाटी ने सक्रिय राजनीति से अलग होने की घोषणा की
प्रेस वार्ता के दौरान हरिश्चंद्र भाटी ने सक्रिय राजनीति से अलग होने की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति में नामित किए जाने पर पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया है, लेकिन 75 वर्ष से अधिक आयु, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और बड़े बेटे के निधन के बाद की व्यक्तिगत परिस्थितियों के चलते उन्होंने सक्रिय राजनीति से अलग होने का निर्णय लिया है। इस संबंध में उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को त्यागपत्र भेजकर उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है।
हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि सक्रिय राजनीति से अलग होने के बावजूद अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के माध्यम से समाज की एकता, अधिकारों, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर उनका प्रयास जारी रहेगा।

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