ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में अवैध निर्माण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। चेतना मंच की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए वीडियो के बाद क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शाहबेरी सहित ग्रेटर नोएडा के कई क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण का सिलसिला जारी है। इन गतिविधियों को रोकने में संबंधित विभागों की भूमिका और प्रभावी कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सरकारी जमीनों पर कब्जे के आरोप, GM प्रोजेक्ट की भूमिका पर सवाल

ग्रेटर नोएडा में सरकारी जमीनों पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर करोड़ों-अरबों रुपये मूल्य की संपत्तियों पर अवैध निर्माण कराया जा रहा है। चेतना मंच के पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में पुनः तैनाती पर कार्यरत महाप्रबंधक (GM) प्रोजेक्ट ए.के. सिंह की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। ए.के. सिंह के विरुद्ध पूर्व में भी भ्रष्टाचार संबंधी आरोप लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना आवश्यक है। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण के मामलों में यदि किसी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

क्या ग्रेटर नोएडा में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति प्रभावी है?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और भू-माफिया गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देती रही है। इसके बावजूद ग्रेटर नोएडा में कथित अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आना प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का केंद्र यही है कि यदि सरकारी जमीनों पर कब्जे और अवैध निर्माण की गतिविधियां जारी हैं, तो संबंधित विभाग समय रहते इन्हें रोक क्यों नहीं पा रहे हैं? क्या निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है और क्या शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है?

इन सवालों का जवाब प्राधिकरण की स्पष्ट कार्रवाई, जांच और सार्वजनिक जानकारी के माध्यम से ही सामने आ सकता है।

शाहबेरी में रात-दिन निर्माण गतिविधियों के आरोप

ग्रेटर नोएडा वेस्ट से सटे शाहबेरी गांव में जमीन की कीमतें लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। इसी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर शिकायतें सामने आई हैं। चेतना मंच द्वारा X पर साझा किए गए वीडियो में एक इमारत के आसपास निर्माण संबंधी गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया गया है।

वीडियो सामने आने के बाद निर्माण की वैधता, भवन मानचित्र की स्थिति और संबंधित विभागों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि शाहबेरी में बिल्डर माफिया की गतिविधियां फिर सक्रिय हो रही हैं। कुछ आरोपों में प्राधिकरण के GM प्रोजेक्ट ए.के. सिंह की कथित भूमिका और मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर किसी निर्माण को अवैध या किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। निर्माण की अनुमति, जमीन का स्वामित्व, संबंधित अभिलेख और विभागीय कार्रवाई की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

2018 का शाहबेरी हादसा: नौ लोगों की गई थी जान

शाहबेरी में अवैध और असुरक्षित निर्माण का इतिहास बेहद गंभीर रहा है। 17 जुलाई 2018 को यहां एक छह मंजिला निर्माणाधीन इमारत पास की चार मंजिला इमारत पर गिर गई थी। इस दर्दनाक हादसे में नौ लोगों की मौत हुई थी। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम ने मलबे से नौ शव बरामद किए थे। इस घटना ने अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था। हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शाहबेरी में अवैध और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। सितंबर 2018 में लगभग 30 इमारतों को सील किए जाने के बाद चार अवैध इमारतों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की गई थी। उस समय प्राधिकरण ने अवैध निर्माण रोकने और असुरक्षित भवनों के खिलाफ कठोर कदम उठाने का दावा किया था।

प्राधिकरण से जवाबदेही और कार्रवाई की मांग

2018 के हादसे के बाद शाहबेरी में भवन सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। ऐसे में मौजूदा निर्माण गतिविधियों की जांच, सरकारी जमीनों की पहचान, भवन मानचित्रों का सत्यापन और अवैध निर्माण के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है। Raftar Today के वीडियो के बाद उठे सवालों के बीच अब निगाहें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर हैं। क्या प्राधिकरण शाहबेरी में निर्माण गतिविधियों की जांच कराएगा? क्या सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतों का सत्यापन होगा? और यदि किसी अधिकारी या बिल्डर की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो क्या उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होगी?

शाहबेरी का मामला केवल जमीन और निर्माण नियमों का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई ही लोगों का भरोसा बहाल कर सकती है.