ईकोटेक-06 व 11 में ट्रांजिट लेबर हॉस्टल के लिए जमीन तय, अल्फा-1 में तीन मंजिला पुस्तकालय को मंजूरी |
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले श्रमिकों और शहर के छात्रों के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक कई बड़ी सौगात लेकर आई है। प्राधिकरण बोर्ड ने श्रमिकों को बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने, रोजगार की तलाश में आने वाले अप्रवासी श्रमिकों के लिए ट्रांजिट लेबर हॉस्टल बनाने और छात्रों व युवाओं को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल देने के उद्देश्य से सार्वजनिक पुस्तकालय विकसित करने को मंजूरी दे दी है।
इसके साथ ही शहर की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने, 105 मीटर चौड़ी सड़क को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक ले जाने, रिठौरी में रेलवे लाइन पर फुटओवर ब्रिज बनाने और एनडीआरएफ के रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर के लिए 30 फ्लैट निशुल्क उपलब्ध कराने समेत कई अहम प्रस्तावों पर भी बोर्ड ने मुहर लगा दी।
पतवाड़ी और बिरौंडी में बनेंगे श्रमिकों के लिए ईडब्ल्यूएस फ्लैट
ग्रेटर नोएडा में रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिक आते हैं। इनमें से अनेक श्रमिक लंबे समय तक शहर में रहने के बाद अपने परिवार के लिए स्थायी और सुरक्षित आवास चाहते हैं, लेकिन निजी बिल्डरों के फ्लैटों की कीमत उनकी पहुंच से बाहर होती है। ऐसे में कई लोग अनधिकृत कॉलोनियों में अपनी मेहनत की कमाई लगा देते हैं। इस समस्या को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में ईडब्ल्यूएस फ्लैट विकसित करने का फैसला किया है। इसके लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इसी वर्ष के अंत तक निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन आवासों का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधायुक्त आवास उपलब्ध कराना है। यह फैसला उन श्रमिक परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक और निर्माण क्षेत्र में काम करते हुए शहर में स्थायी ठिकाना तलाश रहे हैं।
ईकोटेक-06 और ईकोटेक-11 में बनेंगे ट्रांजिट लेबर हॉस्टल
रोजगार की तलाश में ग्रेटर नोएडा आने वाले अप्रवासी श्रमिकों के सामने शुरुआती दिनों में सबसे बड़ी समस्या रहने की होती है। होटल या निजी किराये का कमरा उनके लिए महंगा पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ट्रांजिट हॉस्टल योजना के तहत प्राधिकरण ने ईकोटेक-06 और ईकोटेक-11 में 3,000-3,000 वर्ग मीटर जमीन चिह्नित की है। प्राधिकरण इन भूखंडों को श्रम विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करेगा। हॉस्टल का निर्माण श्रम विभाग की ओर से कराया जाएगा। यहां रोजगार की तलाश में आने वाले श्रमिक बेहद कम किराये पर अस्थायी रूप से रह सकेंगे। रोजगार मिलने के बाद वे अपने लिए स्थायी आवास की व्यवस्था कर सकेंगे। इस व्यवस्था से विशेष रूप से दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले श्रमिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अल्फा-1 में बनेगी तीन मंजिला पब्लिक लाइब्रेरी
बोर्ड बैठक में छात्रों और युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सेक्टर अल्फा-1 में 1,360 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में सार्वजनिक पुस्तकालय विकसित किया जाएगा। इसमें करीब 440 वर्ग मीटर हिस्से में तीन मंजिला लाइब्रेरी भवन बनेगा। शेष क्षेत्र में पार्किंग, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पुस्तकालय में छोटे बच्चों, स्कूली छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए किताबें उपलब्ध होंगी। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को इसका विशेष लाभ मिलेगा। वे न्यूनतम शुल्क देकर किताबें जारी करा सकेंगे और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। पुस्तकालय का निर्माण कार्य भी इसी वर्ष के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा ग्रेटर नोएडा, 130 मीटर रोड बनेगी डबल डेकर
ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाले प्रस्ताव पर भी बोर्ड ने सहमति दे दी है। 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए सड़क के एक हिस्से को डबल डेकर के रूप में विकसित किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने डीपीआर तैयार कराने की जिम्मेदारी एनएचएआई को दी थी। सर्वेक्षण के दौरान दो वैकल्पिक मार्ग सामने आए। पहले विकल्प में एक मूर्ति से नाले तक डबल डेकर सड़क बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जबकि दूसरे विकल्प में शाहबेरी से नाले के साथ लिंक रोड जोड़ने की बात सामने आई।
समिति ने पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 756.01 करोड़ रुपये है। दूसरे चरण में शेष हिस्से का निर्माण किया जाएगा। परियोजना की लागत यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरणों द्वारा समान रूप से वहन किए जाने का प्रस्ताव है। परियोजना पूरी होने पर ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक पहुंचेगी 105 मीटर चौड़ी सड़क
ग्रेटर नोएडा फेस-1, फेस-2 और डीएनजीआईआर क्षेत्र को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 105 मीटर चौड़ी सड़क विकसित की जाएगी। फेस-1 में इस सड़क का करीब छह किलोमीटर हिस्सा पहले से बन चुका है। अब फेस-2 में ग्राम जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक लगभग 12 किलोमीटर सड़क बनाने की योजना है। इस मार्ग में रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लिंक लाइन और जीटी रोड आएंगे। इन स्थानों पर तीन ओवरब्रिज प्रस्तावित हैं। सड़क को 10 लेन और चार सर्विस लेन के रूप में विकसित किया जाएगा।
सड़क के लिए आवश्यक जमीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा, जबकि निर्माण लागत एनएचएआई वहन करेगा। डीएनजीआईआर क्षेत्र में आने वाली भूमि के अधिग्रहण की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण की होगी। भूमि अधिग्रहण की लागत नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे।

रिठौरी में रेलवे लाइन पर बनेगा फुटओवर ब्रिज
ग्राम रिठौरी के ग्रामीणों को रेलवे लाइन पार करने में होने वाली परेशानी जल्द दूर हो सकती है। प्राधिकरण बोर्ड ने गांव में फुटओवर ब्रिज के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में वर्ष 2022 में सांसद डॉ. महेश शर्मा की ओर से प्राधिकरण को पत्र मिला था। इसके बाद प्राधिकरण ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। दोनों विभागों की टीम ने संयुक्त निरीक्षण के बाद फुटओवर ब्रिज बनाने पर सहमति जताई। ब्रिज के निर्माण का खर्च ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उठाएगा। इसमें रैंप, सीढ़ियों और लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। रेलवे लाइन के ऊपर निर्माण के लिए रेलवे से आवश्यक स्वीकृति और एनओसी भी ली जाएगी।
आवासीय भूखंडों पर निर्माण के लिए 30 जून 2028 तक अंतिम मौका
ग्रेटर नोएडा की आवासीय भूखंड योजनाओं के आवंटियों को भी बोर्ड बैठक में राहत दी गई है। जिन आवंटियों ने अभी तक अपने भूखंड पर भवन निर्माण पूरा नहीं किया है या कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया है, उन्हें 30 जून 2028 तक अतिरिक्त समय दिया गया है। यह अवसर वर्तमान में लागू विलंब शुल्क के साथ दिया गया है। निर्धारित अवधि के बाद यदि आवंटी कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करता है तो उसका आवंटन रद्द किया जा सकता है।
एनडीआरएफ को ओमीक्रॉन-1ए में 30 फ्लैट निशुल्क
आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत-बचाव कार्य को तेज करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एनडीआरएफ के रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। एनडीआरएफ की 8वीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर के लिए सेक्टर ओमीक्रॉन-1ए में 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित किए जाएंगे। यहां तैनात कर्मी परिवार के साथ स्थायी रूप से नहीं रहेंगे, बल्कि आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए टीम के रूप में तैनात रहेंगे।
इन आवासों का इस्तेमाल कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में किया जाएगा। टीमों की तैनाती रोटेशन के आधार पर होगी। प्राकृतिक आपदा, औद्योगिक दुर्घटना, भवन गिरने, बाढ़ और अन्य आपात स्थितियों में इससे राहत-बचाव कार्य तेजी से शुरू करने में मदद मिलेगी।
मैकेनिकल स्वीपिंग से सड़कों की सफाई होगी और बेहतर
ग्रेटर नोएडा में धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। सीएक्यूएम और आईआईटी रुड़की के सुझावों के आधार पर ग्रेटर नोएडा सेंट्रल और ईस्ट जोन की सड़कों की पांच वर्ष तक मैकेनिकल स्वीपिंग कराई जाएगी। मशीनरी प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा, जबकि मशीनों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। दोनों जोन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ठेकेदार का चयन किया जा चुका है।
सेंट्रल जोन में ईटा-1, डेल्टा-1, 2, 3, नॉलेज पार्क-4, जीटा-1, ईटा-2 समेत बोड़ाकी, मकौड़ा, मलकपुर, मुबारकपुर, पाली, साकीपुर और लखनावली आदि क्षेत्र शामिल हैं। वहीं ईस्ट जोन में सेक्टर-36, 37, म्यू-1, ज्यू-1, 2, 3, चाई-5 सहित अस्तौली, डाबरा, चुहड़पुर, घरबरा, घोड़ी-बछेड़ा, जुनपत, जुनैदपुर, घंघोला, देवला, अजायबपुर, अटाई मुरादपुर, दाउदपुर, खेरली, लाड़पुरा, लुक्सर, मायचा, कनारसी, कासना, खानपुर, पौवारी, सलेमपुर गुर्जर, बिरौंडी और बिरौंडा आदि क्षेत्र शामिल हैं।
बोर्ड बैठक में मौजूद रहे अधिकारी
बैठक में चेयरमैन दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार वर्चुअल माध्यम से, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस, एसीईओ प्रेरणा सिंह, एसीईओ सुमित यादव, यीडा के ओएसडी शैलेंद्र सिंह, जीएम वित्त स्वतंत्र गुप्ता, जीएम प्रोजेक्ट एके सिंह, ओएसडी गुंजा सिंह, ओएसडी अभिषेक पाठक, ओएसडी गिरीश झा, ओएसडी मुकेश कुमार सिंह, ओएसडी अजय शर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक के ये फैसले एक ओर जहां औद्योगिक शहर में श्रमिकों के लिए आवासीय और अस्थायी रहने की सुविधा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क कनेक्टिविटी, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूत करने वाले हैं।

Comments (0)
Leave a Comment