लखनऊ, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी से एक बार फिर दूर कर दिया है। 3 सितंबर को लखनऊ में हुई पार्टी की ऑल इंडिया स्तर की महत्वपूर्ण बैठक में मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद को फिलहाल कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्होंने आकाश को अभी राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीति में और अनुभव हासिल करने की जरूरत है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। आकाश आनंद को कुछ समय पहले ही पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई थी। अब एक बार फिर उनसे यह जिम्मेदारी वापस लिए जाने से बसपा की अंदरूनी राजनीति और भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कांशीराम के सिद्धांतों का मायावती ने दिया हवाला
लखनऊ में आयोजित बैठक के दौरान मायावती ने आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारी नहीं देने के फैसले के पीछे मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम में शामिल होने की अनुमति देते थे, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने अथवा संगठन में महत्वपूर्ण पद देने के पक्ष में नहीं थे। मायावती ने इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने की बात कही। उनका कहना था कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की आवश्यकता है।
विरोधियों के हथकंडों का भी किया जिक्र
मायावती ने बैठक में आशंका जताई कि चुनाव के दौरान विरोधी दल साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में पार्टी को नुकसान से बचाने के लिए संगठन में अनुभवी और जिम्मेदार नेतृत्व की जरूरत है। इसी संदर्भ में उन्होंने आकाश आनंद को फिलहाल किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला लिया है। हालांकि, आकाश आनंद पार्टी में कार्यकर्ता के रूप में काम करते रह सकते हैं।
आकाश आनंद पर कब-कब चली मायावती की नाराजगी?
आकाश आनंद का बसपा में राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। मायावती पहले भी उन्हें कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा चुकी हैं और बाद में वापस बड़ी भूमिका दे चुकी हैं।
7 मई 2024—पहली बार बड़ा झटका
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान 7 मई 2024 को मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद और अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से हटा दिया था। उस समय मायावती ने उनकी राजनीतिक परिपक्वता को लेकर सवाल उठाए थे।
23 जून 2024—फिर मिली जिम्मेदारी
करीब डेढ़ महीने बाद 23 जून 2024 को मायावती ने आकाश आनंद को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया और अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। इसके बाद लगा कि पार्टी में आकाश की भूमिका फिर मजबूत हो गई है।
2025—फिर सभी पदों से हटाया
मार्च 2025 में मायावती ने आकाश आनंद को सभी पार्टी पदों से हटा दिया और उनके उत्तराधिकारी होने की घोषणा भी वापस ले ली। उस समय मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार और रामजी गौतम को राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी दी थी।
अप्रैल-मई 2025—माफी के बाद वापसी
बाद में आकाश आनंद की बसपा में वापसी हुई। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। 18 मई 2025 को उन्हें चीफ नेशनल को-ऑर्डिनेटर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।
अगस्त 2025—राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया
इसके बाद अगस्त 2025 में बसपा संगठन में बदलाव करते हुए आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। यह पद पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण माना गया और आकाश की भूमिका एक बार फिर मजबूत होती दिखाई दी।
3 सितंबर 2026—फिर बड़ी जिम्मेदारी से बाहर
अब 3 सितंबर 2026 को मायावती ने एक बार फिर आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है और फिलहाल उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
आकाश ने बदला अपना X प्रोफाइल
मायावती के फैसले के बाद आकाश आनंद ने अपने X प्रोफाइल में भी बदलाव किया है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने प्रोफाइल से ‘राष्ट्रीय संयोजक’ पदनाम हटाकर खुद को ‘बसपा कार्यकर्ता’ बताया है।
यूपी चुनाव से पहले बड़ा सियासी संदेश
मायावती का यह फैसला आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बैठक में मायावती ने पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि बसपा देश में होने वाले चुनावों में अपने दम पर आगे बढ़ने की नीति पर कायम रहेगी।
आकाश आनंद को लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना और फिर उनसे जिम्मेदारी वापस लेना बसपा के भीतर नेतृत्व और उत्तराधिकार की रणनीति को लेकर सवाल खड़े करता रहा है। अब एक बार फिर आकाश के बड़े पद से बाहर होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि **2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा की कमान किस रणनीति और किस नेतृत्व ढांचे के साथ आगे बढ़ती है।**

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