ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश में हेल्थकेयर इनोवेशन, मेडिकल डिवाइस, हेल्थटेक और चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने महत्वपूर्ण पहल की है। GIMS के Centre for Medical Innovation (CMI) में प्रथम उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्लिनिक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से करीब 40 हेल्थकेयर स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों ने हिस्सा लिया।
इस पहल का उद्देश्य केवल स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन देना नहीं, बल्कि उन्हें क्लिनिकल वैलिडेशन, नियामकीय स्वीकृति, निवेश की तैयारी, सरकारी योजनाओं और बाजार विस्तार से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में सरकार, अस्पताल, चिकित्सक, इंजीनियर, निवेशक, नियामकीय विशेषज्ञ और स्टार्टअप संस्थापकों को एक मंच पर लाया गया। कार्यक्रम का आयोजन GIMS के Centre for Medical Innovation (CMI) ने Alkemi Growth Capital के सहयोग से तथा StartInUP, उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत किया। इसमें STPI, MedTech Centre of Excellence, Lucknow और UP Promote Pharma Council की भी सहभागिता रही।
उत्तर प्रदेश मेडिकल डिवाइस डिजाइन और निर्माण का बड़ा केंद्र बन सकता है: आलोक कुमार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री आलोक कुमार, आईएएस, प्रमुख सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार रहे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप और तकनीकी इकोसिस्टम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में मेडिकल डिवाइस के डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ी संख्या में प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी संस्थान, औद्योगिक आधार और तेजी से विकसित होता स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है। इन सभी संसाधनों को एक साथ जोड़कर प्रदेश को मेडिकल डिवाइस डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है।
श्री आलोक कुमार ने GIMS द्वारा हेल्थकेयर स्टार्टअप्स और मेडिकल इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से Alkemi Growth Capital द्वारा स्टार्टअप्स को निवेश के लिए तैयार करने की पहल को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, ऐसी पहलें नवाचार करने वाली कंपनियों को संस्थागत निवेश, विकास पूंजी और बड़े बाजारों तक पहुंच दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
डॉक्टर, इंजीनियर और प्रबंधन विशेषज्ञों को एक मंच पर ला रहा GIMS CMI
GIMS के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने कहा कि GIMS का Centre for Medical Innovation केवल एक सामान्य इनक्यूबेशन सेंटर नहीं है। इसका उद्देश्य चिकित्सकों, इंजीनियरों और प्रबंधन विशेषज्ञों को एक साथ लाकर वास्तविक स्वास्थ्य समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के पास मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं की समझ होती है, इंजीनियर तकनीकी समाधान विकसित कर सकते हैं और प्रबंधन विशेषज्ञ किसी उत्पाद को व्यवसाय एवं बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन तीनों क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक साथ जोड़कर ऐसे नवाचार विकसित किए जा सकते हैं, जिनका वास्तविक मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रभाव पड़े।
GIMS CMI का लक्ष्य चिकित्सकीय आवश्यकता से नवाचार, प्रोटोटाइप से क्लिनिकल वैलिडेशन, नियामकीय तैयारी से निवेश और निवेश से बड़े स्तर पर विस्तार तक एक समग्र इकोसिस्टम विकसित करना है।
निवेश के नए दरवाजे खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: डॉ. राहुल सिंह
GIMS Centre for Medical Innovation के CEO डॉ. राहुल सिंह ने स्टार्टअप क्लिनिक को संस्थान और उत्तर प्रदेश के हेल्थकेयर स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि Alkemi Growth Capital का GIMS में आकर स्टार्टअप्स के साथ Investment Readiness पर काम करना एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। इससे नवोन्मेषकों को संस्थागत निवेश और फंडिंग के नए अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी रूप से अच्छा उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं है। स्टार्टअप को क्लिनिकल उपयोगिता साबित करने, नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने, निवेश के लिए तैयार होने और बाजार में बड़े स्तर पर विस्तार करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। डॉ. राहुल सिंह के अनुसार, सरकारी योजनाओं, अनुदान, इनक्यूबेशन और निजी निवेश के अवसरों को स्टार्टअप्स तक पहुंचाना भी जरूरी है। GIMS CMI इसी दिशा में नवाचार, क्लिनिकल सिस्टम और पूंजी के बीच सेतु की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।
Alkemi ने बताया निवेश के लिए कैसे तैयार हों स्टार्टअप
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण Alkemi Growth Capital Investment Readiness Workshop रहा। सुश्री अलका गोएल, Founding Partner, Alkemi Funds ने करीब दो घंटे के सत्र में स्टार्टअप संस्थापकों के साथ संवाद किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि निवेशक किसी स्टार्टअप का मूल्यांकन किन आधारों पर करते हैं और संस्थापक अपने बिजनेस को निवेश योग्य कैसे बना सकते हैं।

वर्कशॉप में बिजनेस मॉडल, राजस्व, बाजार की क्षमता, स्केलेबिलिटी, टीम, निष्पादन क्षमता, वित्तीय अनुशासन, उत्पाद की उपयोगिता और संस्थागत निवेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए केवल तकनीकी रूप से बेहतर उत्पाद पर्याप्त नहीं है। स्टार्टअप को मजबूत, टिकाऊ और विस्तार योग्य बिजनेस मॉडल विकसित करना होगा।
STPI और MedTech Centre of Excellence की भी भागीदारी
कार्यक्रम में डॉ. वंदना श्रीवास्तव, निदेशक, STPI-नोएडा एवं CEO, MedTech Centre of Excellence, STPI लखनऊ विशिष्ट वक्ता के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मेडिकल टेक्नोलॉजी, तकनीकी उद्यमिता और उद्योग-अकादमिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी नवाचार को सफल बनाने के लिए उसे प्रयोगशाला से बाहर निकालकर वास्तविक बाजार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाना जरूरी है।
UP Promote Pharma Council के महाप्रबंधक, नवाचार एवं अनुसंधान डॉ. संदीप शर्मा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। उन्होंने हेल्थ, फार्मा और नवाचार आधारित उद्यमों को आगे बढ़ाने में संस्थागत सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला।
अस्पताल के भीतर स्टार्टअप इनक्यूबेशन मॉडल बना आकर्षण
स्टार्टअप प्रतिनिधियों और अतिथियों ने GIMS स्थित Centre for Medical Innovation तथा अस्पताल आधारित इनक्यूबेशन सेंटर का दौरा भी किया। प्रतिभागियों ने विशेष रूप से इस मॉडल में रुचि दिखाई, जिसमें सरकारी अस्पताल के वास्तविक क्लिनिकल वातावरण के भीतर मेडिकल इनोवेशन और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि स्टार्टअप्स चिकित्सकों के साथ सीधे संवाद कर सकते हैं और मरीजों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक जरूरतों को समझकर अपने उत्पाद विकसित कर सकते हैं।
इससे किसी मेडिकल डिवाइस या हेल्थटेक समाधान के विकास में User Need → Prototype → Clinical Validation → Regulatory Approval → Market की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलता है।
CDSCO-GIMS Regulatory Clinic में मेडिकल डिवाइस पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन
कार्यक्रम के दूसरे महत्वपूर्ण चरण में CDSCO-GIMS Regulatory Clinic का आयोजन किया गया। इसमें मेडिकल डिवाइस और In-Vitro Diagnostics (IVD) से जुड़े स्टार्टअप्स ने विशेषज्ञों के सामने अपनी नियामकीय चुनौतियां और सवाल रखे। Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) के विशेषज्ञों ने स्टार्टअप्स को नियामकीय स्वीकृति, परीक्षण, अनुपालन, प्रमाणन और बाजार में प्रवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में केवल इनोवेशन पर्याप्त नहीं है। किसी भी उत्पाद को मरीजों तक पहुंचाने से पहले उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता, परीक्षण, क्लिनिकल वैलिडेशन और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी है। इस सत्र ने स्टार्टअप्स को यह समझने में मदद की कि नियामकीय प्रक्रिया को उत्पाद विकास के अंतिम चरण में नहीं, बल्कि शुरुआत से ही डिजाइन प्रक्रिया का हिस्सा बनाना चाहिए।
फंडिंग के साथ क्लिनिकल वैलिडेशन पर भी जोर
स्टार्टअप क्लिनिक में यह बात भी सामने आई कि हेल्थकेयर स्टार्टअप्स के लिए चुनौती सिर्फ तकनीक विकसित करने की नहीं है। उनके लिए सही समय पर फंडिंग, क्लिनिकल परीक्षण, नियामकीय मंजूरी और बाजार तक पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं, अनुदान, संस्थागत सहायता और निजी निवेश के अवसर मौजूद हैं। आवश्यकता इस बात की है कि स्टार्टअप्स को इन अवसरों के अनुरूप तैयार किया जाए।
GIMS CMI इसी दिशा में एक ऐसा मॉडल विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जहां एक ही प्लेटफॉर्म पर स्टार्टअप को डॉक्टरों की क्लिनिकल विशेषज्ञता, इंजीनियरों की तकनीकी क्षमता, नियामकीय मार्गदर्शन और निवेशकों की वित्तीय विशेषज्ञता उपलब्ध हो सके।
हेल्थकेयर स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नई शुरुआत
प्रथम उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्लिनिक को हेल्थकेयर इनोवेशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम ने डॉक्टर, इंजीनियर, प्रबंधन विशेषज्ञ, इनक्यूबेटर, नियामक और निवेशक—इन सभी को एक साझा मंच पर जोड़ने का प्रयास किया। GIMS का लक्ष्य स्टार्टअप्स को सिर्फ शुरुआती इनक्यूबेशन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें चिकित्सकीय समस्या की पहचान से लेकर उत्पाद विकास, क्लिनिकल वैलिडेशन, नियामकीय तैयारी, फंडिंग और बड़े पैमाने पर विस्तार तक सहयोग उपलब्ध कराना है।
ग्रेटर नोएडा और गौतमबुद्धनगर में मौजूद मजबूत स्वास्थ्य सेवा आधार, GIMS का अस्पताल-आधारित इनक्यूबेशन मॉडल तथा तेजी से विकसित हो रहा तकनीकी और औद्योगिक वातावरण उत्तर प्रदेश में मेडिकल डिवाइस और हेल्थटेक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।
एक मॉडल, जिसमें पूरी श्रृंखला एक साथ जुड़ती है
इस पहल का मूल विचार स्पष्ट है— चिकित्सक समस्या पहचानें → इंजीनियर समाधान विकसित करें → प्रबंधन उसे व्यवसाय में बदले → नियामक सुरक्षा और अनुपालन सुनिश्चित करें → निवेशक उसे बड़े स्तर तक पहुंचाने में सहयोग करें। यही मॉडल उत्तर प्रदेश को आने वाले समय में मेडिकल डिवाइस, हेल्थटेक और अस्पताल-आधारित इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत केंद्र बनाने में मदद कर सकता है।
प्रथम उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्लिनिक ने यह संदेश भी दिया कि हेल्थकेयर में किसी नवाचार की वास्तविक सफलता केवल उसके आविष्कार में नहीं, बल्कि उसके क्लिनिकल उपयोग, सुरक्षा, नियामकीय स्वीकृति, निवेश और बड़े पैमाने पर मरीजों तक पहुंचने में है। GIMS का Centre for Medical Innovation इसी पूरी प्रक्रिया को एक मंच पर लाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में यह पहल उत्तर प्रदेश के उभरते हेल्थकेयर स्टार्टअप्स के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली साबित हो सकती है।

Comments (0)
Leave a Comment