ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।।
अभी स्कूल खुले हुए डेढ़ महीना ही हुआ था कि स्पर्श ग्लोबल स्कूल, ग्रेटर नोएडा ने लेट फीस का हंटर चला दिया। एक ओर सरकार स्कूल फीस को लेकर सख्ती की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल धड़ल्ले से अपने बनाए नियमों से भी पीछे हटने को तैयार नहीं

इस बार आरोप लगा है कि बिना समयसीमा पार हुए और बिना किसी पूर्व सूचना या रिमाइंडर, स्कूल ने छात्रों पर लेट फीस चार्ज लगा दी। अभिभावकों में इसको लेकर जबरदस्त नाराजगी है, लेकिन बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल पंवार इस पर चुप्पी साधे बैठे हैं।


तीन महीने की फीस पूरी नहीं, पर लेट फीस लागू! ये कौन सा नियम?

गौरव शर्मा, पेशे से एडवोकेट और "रफ्तार टुडे" के संपादक, जिनका बच्चा इसी स्कूल में पढ़ता है, ने इस मनमानी का खुलासा करते हुए बताया:

“स्कूल को खुले अभी तीन महीने भी नहीं हुए हैं और स्कूल प्रशासन ने लेट फीस चार्ज कर दी। मैंने जब स्कूल प्रशासन से पूछा कि क्या लेट फीस लगाई गई है? तो जवाब मिला – हां, लगाई गई है। लेकिन न तो कोई पूर्व सूचना, न रिमाइंडर, न ईमेल और न ही SMS आया। अगर स्कूल 6 महीने की फीस एक साथ लेता है, तो फिर 3 महीने के अंदर लेट फीस कैसी?”


BSA ऑफिस में शिकायत का कोई असर नहीं, जवाब तक नहीं मिला

इस मुद्दे को लेकर गौरव शर्मा ने ग्रेटर नोएडा के BSA राहुल पंवार से तीन बार WhatsApp पर SMS और शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सवाल ये है कि जब शिक्षा विभाग के अफसर ही प्राइवेट स्कूलों के सामने झुकते दिखें, तो आम अभिभावक कहां जाएं?

“तीन अलग-अलग दिन व्हाट्सएप पर BSA को मैसेज किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। क्या बीएसए ऑफिस सिर्फ दिखावे के लिए है?”
गौरव शर्मा, एडवोकेट


स्पर्श ग्लोबल स्कूल: पहले भी सुर्खियों में रहा है फीस और अनुशासन को लेकर

यह पहली बार नहीं है जब स्पर्श ग्लोबल स्कूल फीस, व्यवहार या अनुशासन को लेकर चर्चा में आया हो। पहले भी कई अभिभावकों ने स्कूल की अनौपचारिक शुल्क वसूली, संचार की कमी और पारदर्शिता के अभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।


स्कूल प्रशासन की चुप्पी भी बनी संदेह का विषय

जब इस मामले पर स्कूल से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने सिर्फ यही कहा कि:

“लेट फीस नियम के अनुसार लगाई गई है।”

लेकिन वो नियम कौन सा है? कब लागू हुआ? और इसकी जानकारी अभिभावकों को कब दी गई? इन सवालों पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई।


क्या कहता है नियम और नीति?

उत्तर प्रदेश सरकार की प्राइवेट स्कूल फीस रेगुलेशन गाइडलाइन 2018 के अनुसार:

  • कोई भी स्कूल पूर्व सूचना के बिना अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकता।
  • 3 महीने से कम समय में लेट फीस चार्ज करना अवैध माना जाता है, जब तक कि शुल्क चक्र (फीस साइकिल) स्पष्ट न हो।
  • स्कूल को प्रत्येक अभिभावक को लिखित सूचना/रिमाइंडर देना अनिवार्य है।

शिक्षा विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीएसए जैसे पद पर बैठा अधिकारी भी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। अगर एक एडवोकेट को शिकायत का जवाब नहीं मिलता, तो आम अभिभावक की बात कैसे सुनी जाएगी?

“बीएसए ऑफिस को जवाबदेह बनाना होगा। वरना ये प्राइवेट स्कूल इसी तरह अपनी मनमानी करते रहेंगे।”
राजीव भाटी, अभिभावक संघ अध्यक्ष


क्या चाहते हैं अभिभावक?

  • लेट फीस को तुरंत हटाया जाए।
  • स्कूल फीस की स्पष्ट समयसीमा SMS/Email के माध्यम से भेजी जाए।
  • BSA ऑफिस सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर स्टेटमेंट जारी करे।
  • प्राइवेट स्कूलों की जांच हेतु स्वतंत्र निगरानी समिति बने।

क्या शिक्षा विभाग सुनेगा? या मनमानी ऐसे ही जारी रहेगी?

ग्रेटर नोएडा जैसे शहर में जहां हजारों माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए स्कूल भेजते हैं, वहां ऐसी घटनाएं न केवल विश्वास को तोड़ती हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करती हैं।


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