ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) के नवनियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. बलकार सिंह ने सोमवार को साइट-5 कासना स्थित यूपीसीडा के क्षेत्रीय कार्यालय में गौतमबुद्धनगर के औद्योगिक संगठनों और उद्यमियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति, विकास एवं अनुरक्षण कार्यों की गति तथा उद्यमियों के सामने आ रही विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को सीधे उद्यमियों से समझना और उनके समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना रहा। इस दौरान इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA), गौतमबुद्धनगर सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याएं, सुझाव और विकास संबंधी मांगें यूपीसीडा के सीईओ के सामने रखीं।

उद्यमियों ने कहा कि गौतमबुद्धनगर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक जिलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु, मध्यम एवं बड़े उद्योग संचालित हैं। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर सड़क, जल निकासी, सीवरेज, बिजली, स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा, पार्किंग और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं का मजबूत होना औद्योगिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।

EPIP औद्योगिक क्षेत्र का भी किया निरीक्षण

बैठक के बाद यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. बलकार सिंह ने ईपीआईपी औद्योगिक क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने क्षेत्र में स्थित कुछ औद्योगिक इकाइयों का भ्रमण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उद्यमियों से सीधे संवाद किया और औद्योगिक क्षेत्र में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, सड़क, जल निकासी, साफ-सफाई तथा अन्य विकास कार्यों के संबंध में जानकारी ली। इससे बैठक में सामने आई समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने का भी अवसर मिला।

डॉ. बलकार सिंह ने अधिकारियों से भी औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे विकास और अनुरक्षण कार्यों की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक सुधार के लिए प्राथमिकता तय करने पर जोर दिया।

‘समयबद्ध समाधान यूपीसीडा की प्राथमिकता’

बैठक में यूपीसीडा के सीईओ डॉ. बलकार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को आधुनिक, सुव्यवस्थित, सुरक्षित और निवेश-अनुकूल बनाना है। इसके लिए औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान यूपीसीडा की प्राथमिकताओं में शामिल है। औद्योगिक विकास को गति देने के साथ-साथ सड़क, ड्रेनेज, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सीईओ ने औद्योगिक संगठनों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों के सुझावों और जमीनी अनुभवों को विकास कार्यों की योजना तैयार करते समय महत्व दिया जाना चाहिए। इससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में विभागीय समन्वय और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूपीसीडा की कोशिश रहेगी कि उद्यमियों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े और उनकी समस्याओं का समाधान निर्धारित समयसीमा में हो।

मार्च 2026 के बाद विकास कार्य धीमे होने का मुद्दा उठा

बैठक में इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने यूपीसीडा के सीईओ डॉ. बलकार सिंह का स्वागत किया और गौतमबुद्धनगर के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में यूपीसीडा की ओर से औद्योगिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य कराए गए हैं। इनमें प्रवेश द्वार, सड़क निर्माण एवं सुधार, हाईमास्ट और स्ट्रीट लाइट, कियोस्क, वेंडिंग जोन, सार्वजनिक शौचालय, श्रमिक सुविधा केंद्र तथा मालवाहक वाहनों के लिए पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

आईबीए अध्यक्ष के अनुसार इन विकास कार्यों से औद्योगिक क्षेत्रों के स्वरूप और कार्य वातावरण में काफी सुधार हुआ है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि मार्च 2026 के बाद विकास एवं अनुरक्षण कार्यों की गति धीमी हुई है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में समस्याएं दोबारा सामने आने लगी हैं।

उन्होंने विशेष रूप से ड्रेनों की नियमित सफाई, कूड़ा निस्तारण और अनुरक्षण कार्यों की ओर यूपीसीडा अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना था कि इन कार्यों में कमी के कारण हल्की बारिश के दौरान भी कई औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आईबीए ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में जलभराव का सीधा असर उत्पादन और कारोबार पर पड़ता है। कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित होती है, माल की ढुलाई में परेशानी आती है और कई बार उद्योगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

आधुनिक और कवरयुक्त ड्रेनेज की मांग

उद्योग संगठनों ने औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक एवं कवरयुक्त आरसीसी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की मांग प्रमुखता से रखी। उद्यमियों का कहना था कि बारिश के पानी की निकासी के लिए स्थायी और वैज्ञानिक व्यवस्था जरूरी है। इसके अलावा सीवरेज व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने, पेयजल पाइपलाइन और पानी की टंकियां स्थापित करने तथा अधूरी सड़कों को जल्द पूरा करने की मांग भी रखी गई। आईबीए प्रतिनिधियों ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों का विकास केवल उद्योगों के लिए सड़क उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए। वहां श्रमिकों, कर्मचारियों, उद्यमियों और आगंतुकों के लिए आवश्यक सभी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है।

ग्रीन बेल्ट से लेकर CCTV और पार्किंग तक की मांग

बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों की ग्रीन बेल्ट के विकास और नियमित रखरखाव पर भी जोर दिया गया। उद्यमियों ने नियमित साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उनकी प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव भी दिया गया। इसके अलावा मालवाहक वाहनों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए पर्याप्त ट्रांसपोर्ट एवं गुड्स व्हीकल पार्किंग विकसित करने की आवश्यकता बताई गई। सार्वजनिक शौचालयों और श्रमिक सुविधा केंद्रों की संख्या एवं गुणवत्ता बढ़ाने की मांग भी उद्योग संगठनों ने रखी।

सिंगल विंडो व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर

उद्यमियों ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने विभिन्न अनुमतियों और NOC को सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की मांग की। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए जरूरी है कि उद्यमियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें। डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन, स्थिति की जानकारी और स्वीकृति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सकता है। इससे न केवल उद्यमियों का समय बचेगा, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

गौतमबुद्धनगर में ACEO स्तर के अधिकारी की मांग

आईबीए ने गौतमबुद्धनगर के औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर ACEO स्तर के सक्षम अधिकारी की नियमित तैनाती की मांग भी रखी। एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि संबंधित अधिकारी सप्ताह में कम से कम तीन दिन गौतमबुद्धनगर में उपलब्ध रहें, ताकि उद्योगों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर स्थानीय स्तर पर ही निर्णय लिया जा सके। आईबीए ने इसके साथ ही हर माह अथवा 15 दिन में उद्योग संगठनों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया। ऐसी बैठकों में विकास कार्यों की प्रगति, लंबित समस्याओं और उनके समाधान की स्थिति की समीक्षा की जा सकती है।

‘समस्याएं उठाने के साथ समाधान में भी भागीदारी’

आईबीए अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि एसोसिएशन केवल समस्याएं उठाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके स्थायी समाधान के लिए प्रशासन और यूपीसीडा के साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि गौतमबुद्धनगर के यूपीसीडा औद्योगिक क्षेत्रों को विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाओं से युक्त, स्वच्छ, सुरक्षित और निवेश-अनुकूल औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में विकसित करना आईबीए का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सीईओ के नेतृत्व में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और अनुरक्षण कार्यों में तेजी आएगी तथा उद्यमियों से जुड़े लंबित मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

उद्यमियों की मांगों पर सकारात्मक रुख

बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। डॉ. बलकार सिंह ने उद्योग संगठनों द्वारा रखे गए सुझावों और मांगों को गंभीरता से सुना तथा औद्योगिक क्षेत्रों के समग्र विकास और उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। बैठक में आईबीए अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय, कोषाध्यक्ष राकेश अग्रवाल, जॉइंट सेक्रेटरी विकास राय, यूपीसीडा साइट-5 औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर सेक्रेटरी वीरेंद्र रावल, उपाध्यक्ष राजेश खन्ना समेत संस्था के अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

बैठक और ईपीआईपी क्षेत्र के निरीक्षण के बाद उद्यमियों में यह उम्मीद जगी है कि औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में अब तेजी आएगी। खासतौर पर बारिश के दौरान जलभराव, ड्रेनेज, सड़क, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान होने से औद्योगिक गतिविधियों को और बेहतर वातावरण मिल सकता है। गौतमबुद्धनगर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ एमएसएमई इकाइयां भी संचालित हैं। ऐसे में औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करना न केवल स्थानीय उद्योगों के लिए जरूरी है, बल्कि उत्तर प्रदेश में नए निवेश को आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।