ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। आज के दौर में केवल बड़ा आइडिया होना ही काफी नहीं, बल्कि उस आइडिया को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी हो गया है। टेक्नोलॉजी, रिसर्च, स्टार्टअप और डिजिटल इनोवेशन के तेजी से बदलते दौर में “बौद्धिक संपदा अधिकार” यानी Intellectual Property Rights (IPR) की अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है। इसी महत्व को समझाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय ने विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस (World IPR Day) के अवसर पर एक भव्य और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
शारदा विश्वविद्यालय के आईपीआर सेल द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य केवल औपचारिक आयोजन करना नहीं था, बल्कि युवाओं के भीतर नवाचार, शोध और उनके विचारों की सुरक्षा के प्रति गंभीर जागरूकता पैदा करना था। पूरे कार्यक्रम के दौरान “नवाचार को सुरक्षा”, “रचनात्मकता को पहचान” और “विचारों को वैश्विक मंच” जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।
“भविष्य उन्हीं का होगा, जिनके पास आइडिया भी होगा और उसका अधिकार भी”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के पूर्व सचिव, एमएसएमई और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री दिनेश राय रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले समय में दुनिया केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि “ज्ञान और नवाचार” से संचालित होगी। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला इनोवेटर बन सकता है—लेकिन इसके लिए अपने शोध और विचारों की कानूनी सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से “इनोवेशन इकोनॉमी” की ओर बढ़ रहा है और ऐसे समय में पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट जैसी व्यवस्थाएं युवाओं के सपनों को सुरक्षित करने का सबसे मजबूत माध्यम बन रही हैं। उनके विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें यह समझने में भी मदद की कि किसी भी नए विचार का मूल्य तभी है, जब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।
MSME योजनाओं और स्टार्टअप सपोर्ट पर विशेषज्ञों ने दी अहम जानकारी
कार्यक्रम के विशेष अतिथि श्री सतीश कुमार, आईईएस ने एमएसएमई सेक्टर और आईपीआर से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार आज युवाओं, स्टार्टअप्स और रिसर्च आधारित उद्यमों को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रकार की सहायता और वित्तीय समर्थन प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा वैश्विक बौद्धिक संपदा तंत्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां नवाचार और रचनात्मकता को केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति में भी बदला जा सके। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे रिसर्च और तकनीकी विकास के क्षेत्र में आगे आएं और अपने विचारों को केवल प्रोजेक्ट तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें स्टार्टअप और बिजनेस मॉडल में बदलने की दिशा में कार्य करें।
पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट पर हुए विशेषज्ञ व्याख्यान
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और उपयोगी हिस्सा रहा आईपीआर से जुड़े पांच विशेषज्ञ व्याख्यानों की श्रृंखला। प्रतिष्ठित कानूनी फर्मों और विशेषज्ञों द्वारा दिए गए इन व्याख्यानों में छात्रों को बताया गया कि—पेटेंट कैसे कराया जाता है
कॉपीराइट किन चीजों पर लागू होता है
ट्रेडमार्क का महत्व क्या है
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया कैसे काम करती है
रिसर्च को कमर्शियल वैल्यू में कैसे बदला जा सकता है
इन सत्रों में छात्रों ने बड़ी संख्या में सवाल पूछे और विशेषज्ञों ने बेहद सरल भाषा में जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को समझाया। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की व्यावहारिक जानकारी मिली।
शारदा विश्वविद्यालय बना रिसर्च और इनोवेशन का मजबूत केंद्र
इस पूरे आयोजन का संचालन शारदा विश्वविद्यालय के एसोसिएट डीन (अनुसंधान) और आईपीआर सेल के प्रमुख डॉ. मोहित साहनी ने किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे शोधकर्ता और नवप्रवर्तक तैयार करना है जो समाज और देश के विकास में योगदान दे सकें।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीन (अनुसंधान) डॉ. भुवनेश कुमार और कुलपति प्रो. सिबाराम खारा ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अनुसंधान और नवाचार की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ें और अपने विचारों को वैश्विक स्तर तक ले जाने का प्रयास करें।
छात्रों में दिखा जबरदस्त उत्साह
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, शोधार्थी, छात्र और स्टाफ सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कई विद्यार्थियों ने कहा कि इस आयोजन ने उनके सोचने का नजरिया बदल दिया और अब वे अपने प्रोजेक्ट्स और रिसर्च को नए दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
“आइडिया ही नई संपत्ति है”
आज के डिजिटल और तकनीकी युग में बौद्धिक संपदा किसी भी देश की आर्थिक ताकत बन चुकी है। ऐसे में शारदा विश्वविद्यालय का यह आयोजन केवल एक अकादमिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि अब शिक्षा संस्थान केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा, शोध, स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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