शारदा स्कूल ऑफ लॉ और गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट की संयुक्त पहल में 350 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल, काउंसलिंग और मध्यस्थता को बताया प्रभावी माध्यम, कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। पारिवारिक विवादों के संवेदनशील और शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शारदा यूनिवर्सिटी के शारदा स्कूल ऑफ लॉ और गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के सहयोग से फैमिली डिस्प्यूट रिज़ॉल्यूशन क्लिनिक (FDRC) की छठी वर्षगांठ मनाई गई। “सामंजस्यपूर्ण समाज के लिए मजबूत परिवार” थीम पर आयोजित कार्यक्रम में 350 से अधिक छात्र-छात्राओं, कानूनी पेशेवरों, पुलिस अधिकारियों, काउंसलर्स और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान परिवार कल्याण, सुलभ न्याय और पारिवारिक विवादों के संवाद एवं मध्यस्थता के माध्यम से समाधान की आवश्यकता पर चर्चा की गई। आयोजकों ने कहा कि परिवार से जुड़े विवादों में केवल कानूनी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि संवेदनशील संवाद, काउंसलिंग और आपसी समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
थाना नॉलेज पार्क से शुरू हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत थाना नॉलेज पार्क में आयोजित उद्घाटन समारोह से हुई। इसके बाद शारदा यूनिवर्सिटी के चाणक्य ऑडिटोरियम में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, जबकि गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
पारिवारिक विवादों के समाधान में सहानुभूति और धैर्य जरूरी: लक्ष्मी सिंह
गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने पारिवारिक और वैवाहिक विवादों की जटिलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 26 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने महसूस किया है कि पारिवारिक और वैवाहिक विवादों का समाधान पुलिस व्यवस्था के सामने आने वाली कठिन चुनौतियों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि अपराध की घटनाओं में जांच और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है, लेकिन पारिवारिक विवादों में दोनों पक्षों को समाधान के लिए साथ लाना अलग तरह की संवेदनशीलता की मांग करता है। इसके लिए सहानुभूति, धैर्य और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के सहयोग की आवश्यकता होती है।
पुलिस कमिश्नर ने FDRC को इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस मॉडल में कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों, कानूनी पेशेवरों, मनोवैज्ञानिकों और काउंसलर्स को एक मंच पर लाकर विवादों के समाधान की दिशा में काम किया जाता है। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में समाधान का अर्थ केवल पुलिस हस्तक्षेप नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी समझ के माध्यम से सुधार की संभावना तलाशना भी है।

महिलाओं और बच्चों के हितों पर विशेष ध्यान
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि पारिवारिक विवादों का प्रभाव अक्सर महिलाओं और बच्चों पर अधिक पड़ता है। उन्होंने FDRC की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि काउंसलिंग और मध्यस्थता के माध्यम से परिवारों में सम्मान, संवाद और शांति बहाल करने का प्रयास किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को संवेदनशील, समावेशी और सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में समाज के विभिन्न संस्थानों की सामूहिक जिम्मेदारी है। FDRC जैसी पहल इस दिशा में सहयोग का माध्यम बन सकती है।
शिक्षा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने पर जोर
शारदा यूनिवर्सिटी के चांसलर पी.के. गुप्ता ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल कक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे वास्तविक सामाजिक चुनौतियों के समाधान से भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने FDRC के साथ विश्वविद्यालय के सहयोग को इसी सोच का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में बातचीत, सहानुभूति और सुलह जैसे मूल्यों का विकास उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पुलिस कमिश्नरेट के साथ मिलकर परिवार और समाज से जुड़े विवादों के समाधान की दिशा में काम करना विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
FDRC से जुड़े अधिकारियों और काउंसलर्स का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान FDRC की गतिविधियों में योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों, काउंसलर्स और कोऑर्डिनेटर्स को सम्मानित किया गया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम और संवाद सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पारिवारिक संबंधों में संवाद, सामंजस्य और समुदाय आधारित विवाद समाधान जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर वाई.के. गुप्ता, डीसीपी सुनीति, स्कूल ऑफ लॉ के डीन डॉ. ऋषिकेश दवे, डीन अकादमिक डॉ. आर.सी. सिंह, एडमिशन डायरेक्टर डॉ. राजीव गुप्ता, डायरेक्टर पीआर डॉ. अजीत कुमार, डॉ. अक्सा फातिमा, डॉ. उर्मिला, डॉ. तरुण कौशिक, डॉ. संचिता, डॉ. वर्णिका, डॉ. ऋतु सहित फैकल्टी सदस्य, स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

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