शुरुआत में आयकर विभाग की कार्रवाई की चर्चा, बाद में ED जांच से जुड़ने की जानकारी; प्राधिकरण की भूमिका और अवैध निर्माण से जुड़े पहलुओं की जांच जारी
नोएडा, रफ़्तार टूडे। महर्षि भूमि प्रकरण की जांच के बीच सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के दो अधिकारी-कर्मचारियों समेत तीन लोगों से पूछताछ किए जाने की खबर सामने आने के बाद शहर में दिनभर चर्चाओं का दौर रहा। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने तीन लोगों को पूछताछ के लिए अपने साथ लिया, जिनमें नोएडा प्राधिकरण से जुड़े दो कर्मचारी भी बताए गए हैं। हालांकि, इस कार्रवाई से जुड़े कई विवरणों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। शुरुआती चर्चाओं में कार्रवाई को आयकर विभाग की टीम से जोड़कर देखा गया, लेकिन बाद की रिपोर्टिंग में इसे महर्षि भूमि प्रकरण में चल रही ED जांच से संबंधित बताया गया। ऐसे में कार्रवाई को लेकर सामने आई अलग-अलग सूचनाओं ने पूरे प्रकरण को और चर्चा में ला दिया।
45 खसरों की जमीन पहले से जांच और प्राधिकरण की कार्रवाई के दायरे में
महर्षि भूमि प्रकरण से जुड़े क्षेत्र में जमीन और अवैध निर्माण का मुद्दा पहले से जांच के दायरे में रहा है। नोएडा प्राधिकरण ने जून 2026 में सलारपुर, भंगेल और हाजीपुर के करीब 45 खसरों को लेकर लोगों को जमीन की खरीद-फरोख्त में सावधानी बरतने की चेतावनी दी थी। प्राधिकरण के अनुसार इन क्षेत्रों में कुछ जमीनों पर अवैध निर्माण और अनधिकृत गतिविधियों की शिकायतें थीं।
सलारपुर खादर के कई खसरा नंबरों तथा भंगेल बेगमपुर के विभिन्न खसरों में अवैध निर्माण का उल्लेख प्राधिकरण की ओर से जारी चेतावनी में किया गया था। प्राधिकरण ने यह भी कहा था कि संबंधित जमीनों पर भवन या भूखंड के मानचित्र स्वीकृत नहीं किए गए हैं और खरीदारों को किसी भी सौदे से पहले जमीन की स्थिति की पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए।
प्राधिकरण के दो कर्मचारियों से पूछताछ की जानकारी
ताजा रिपोर्टिंग के अनुसार पूछताछ के दायरे में नोएडा प्राधिकरण से जुड़े दो अधिकारी-कर्मचारी भी हैं। इनमें एक को महाप्रबंधक के व्यक्तिगत स्टाफ से जुड़ा बताया गया है, जबकि दूसरे के वर्क सर्किल-10 में तैनात होने की जानकारी सामने आई है। तीसरे व्यक्ति को निर्माण एजेंसियों से जुड़े लाइजनर के रूप में बताया गया है। इनकी भूमिका और जांच में सामने आए तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसी की कार्रवाई और आधिकारिक दस्तावेजों के बाद ही स्पष्ट होगा।
महर्षि भूमि प्रकरण में ED की जांच पहले से जमीन की बिक्री, कथित फर्जी दस्तावेजों और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन तक पहुंच चुकी है। मई-जून 2026 की रिपोर्टिंग में जांच एजेंसी द्वारा ट्रस्ट की जमीन की बिक्री और उससे जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

अवैध निर्माण और जमीन सौदों पर पहले से उठते रहे हैं सवाल
महर्षि आश्रम से जुड़ी जमीन पर कथित अवैध निर्माण को लेकर भी पहले से सवाल उठते रहे हैं। रिपोर्टिंग के अनुसार, जांच में नोएडा प्राधिकरण की भूमिका और निर्माण की अनुमति से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है। वहीं प्राधिकरण ने अलग-अलग समय पर संबंधित क्षेत्रों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई और जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर चेतावनी जारी की है। इस पूरे प्रकरण में यह महत्वपूर्ण है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी की रिपोर्ट, आधिकारिक कार्रवाई अथवा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा। पूछताछ में शामिल होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।

खबरों के बीच कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे
सोमवार को कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद यह चर्चा भी रही कि इसे शुरुआत में आयकर विभाग की कार्रवाई के रूप में बताया गया। बाद में इसे ED जांच से जोड़कर रिपोर्ट किया गया। आपके मूल ड्राफ्ट में कुछ अधिकारियों द्वारा जानबूझकर कार्रवाई की दिशा बदलने के लिए मीडिया में अलग जानकारी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
इसी तरह नकद लेनदेन, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कथित “सुविधा शुल्क”, दिल्ली में लॉकरों से बरामदगी और कुछ अधिकारियों को बचाने के लिए आंतरिक स्तर पर प्रयास किए जाने जैसे दावों को भी फिलहाल सूत्रों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक जांच एजेंसी या आधिकारिक दस्तावेज इनकी पुष्टि न करें। महर्षि भूमि प्रकरण में ED की जांच आगे बढ़ने के साथ अब जमीन की बिक्री, कथित अवैध निर्माण, वित्तीय लेनदेन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका जैसे विभिन्न पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है। नोएडा प्राधिकरण से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की ताजा जानकारी ने इस जांच में प्राधिकरण की भूमिका से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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