कॉन्स्टेबल पिता की बेटी ने 22 साल की उम्र में पहले प्रयास में पास की UPSC

नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतमबुद्ध नगर पुलिस में हुए प्रशासनिक फेरबदल के तहत आईपीएस अधिकारी प्रीति यादव को नोएडा जोन-1 का पुलिस उपायुक्त (DCP) नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ ही वह नोएडा जोन-1 की कमान संभालने वाली पहली महिला डीसीपी बन गई हैं। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद आईपीएस प्रीति यादव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उनकी पहचान केवल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग से सिविल सेवा तक पहुंचने वाली एक प्रेरक शख्सियत के रूप में भी की जा रही है।

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में जन्मीं प्रीति यादव ने महज 22 वर्ष की उम्र में वर्ष 2019 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का मुकाम हासिल किया था। खास बात यह है कि उनके पिता पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल के पद से सेवा में आए थे। पिता की वर्दी और पुलिस सेवा को करीब से देखते हुए ही प्रीति के मन में सिविल सेवा में जाने की इच्छा मजबूत हुई।

पढ़ाई में मेधावी रहीं प्रीति यादव

प्रीति यादव बचपन से ही पढ़ाई में अच्छी थीं। उन्होंने 12वीं की परीक्षा ह्यूमैनिटीज विषय से 96.2 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। इसके बाद उन्होंने जियोग्राफी में बीए ऑनर्स की पढ़ाई की और विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडल हासिल किया। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। लगातार मेहनत और तैयारी के दम पर उन्होंने पहले ही प्रयास में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास कर ली। इसके बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी कर वर्ष 2019 में आईपीएस अधिकारी बनने में सफलता हासिल की।

कॉन्स्टेबल पिता से मिली वर्दी पहनने की प्रेरणा

संसद टीवी को दिए एक इंटरव्यू में प्रीति यादव ने अपने पिता को अपनी प्रेरणा बताया था। उन्होंने कहा था कि बचपन से ही उनकी सिविल सेवा में जाने की इच्छा थी। उन्होंने अपने पिता को पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल के रूप में नौकरी शुरू करते देखा था। बाद में उनके पिता एएसआई के पद तक पहुंचे। प्रीति के मुताबिक, पिता की सेवा और कार्यशैली को देखकर उनके मन में भी कुछ बड़ा करने की प्रेरणा आई। उन्होंने सोचा कि यदि जीवन में कुछ अच्छा करना है तो ऐसी जिम्मेदारी क्यों न संभाली जाए, जहां से समाज और व्यवस्था के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा सके।

उन्होंने अपने इंटरव्यू में माता-पिता के सहयोग और अच्छे शिक्षकों के मार्गदर्शन को भी अपनी सफलता का अहम हिस्सा बताया। पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास करना उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

सहारनपुर से अब नोएडा जोन-1 तक का सफर

आईपीएस बनने के बाद प्रीति यादव की शुरुआती तैनाती सहारनपुर जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई थी। यहां उन्होंने पुलिस प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। अब उन्हें गौतमबुद्ध नगर के महत्वपूर्ण नोएडा जोन-1 की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक फेरबदल के तहत इस पद पर पहले तैनात आईपीएस अधिकारी साद मियां खान को गौतमबुद्ध नगर से कार्यमुक्त किया गया है। उन्होंने जिले के अलग-अलग जोनों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।

सोशल मीडिया पर चर्चा में है उनकी सफलता की कहानी

नोएडा जोन-1 की डीसीपी बनने के बाद प्रीति यादव की नियुक्ति के साथ उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां और यूपीएससी तक पहुंचने का सफर भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। कॉन्स्टेबल पिता के परिवार से निकलकर 22 वर्ष की उम्र में आईपीएस बनने और अब नोएडा जैसे महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र में पुलिस उपायुक्त की जिम्मेदारी संभालने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है। उनकी नई नियुक्ति के साथ नोएडा जोन-1 को पहली महिला डीसीपी मिली है। अब इस पद पर उनकी प्राथमिकताएं और पुलिस प्रशासन से जुड़े फैसले क्षेत्र की कानून-व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।