बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर के 56 गांवों से जुड़ेगा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर; 677.80 हेक्टेयर जमीन और हजारों किसानों से जुड़ी है परियोजना, औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स को भी मिल सकता है बढ़ावा
बुलंदशहर/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर नई जानकारी सामने आई है। करीब 74 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर गंगा एक्सप्रेसवे को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर तक पहुंच को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। परियोजना से संबंधित सामाजिक प्रभाव आकलन सर्वे के लिए टेंडर जारी होने की जानकारी सामने आई है। इससे प्रभावित गांवों, परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन किया जाएगा।
परियोजना का प्रस्तावित मार्ग बुलंदशहर जिले की स्याना तहसील के लाडपुर क्षेत्र से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेसवे के पास जेवर क्षेत्र तक पहुंचने की योजना से जुड़ा है। इस कॉरिडोर से गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क विकसित होगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
74 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे, 56 गांवों पर पड़ेगा असर
प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 74.3 किलोमीटर बताई गई है। इसके लिए बुलंदशहर जिले के 48 और गौतमबुद्ध नगर के 8 गांवों की भूमि परियोजना के दायरे में आने की जानकारी सामने आई है। इस तरह कुल 56 गांव इस परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं। परियोजना से संबंधित रिपोर्टों में लगभग 677.80 हेक्टेयर भूमि और हजारों किसानों की जमीन का उल्लेख किया गया है। भूमि खरीद और अधिग्रहण की प्रक्रिया अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ाई जा रही है। प्रशासन के सामने किसानों को उचित मुआवजा देने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत भूमि उपलब्ध कराने की चुनौती भी है।
सामाजिक प्रभाव आकलन सर्वे के तहत प्रभावित परिवारों, स्थानीय रोजगार, कारोबार और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन किया जा सकता है। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और परियोजना से जुड़े प्रभावों का आकलन किया जाएगा।
लाडपुर से जेवर तक प्रस्तावित रूट
लिंक एक्सप्रेसवे का उद्देश्य गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी स्थापित करना है। प्रस्तावित मार्ग बुलंदशहर की स्याना, शिकारपुर, बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद तहसीलों के विभिन्न गांवों से होकर गुजरने की योजना से जुड़ा है। दूसरी ओर, इसका संपर्क गौतमबुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र और यमुना एक्सप्रेसवे के नजदीक विकसित होने वाले परिवहन नेटवर्क से होगा। इस संपर्क के मजबूत होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों और कस्बों से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध हो सकता है। साथ ही गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश के अन्य हिस्सों की ओर यात्रा और माल परिवहन को भी सुविधा मिलने की संभावना है।
क्या बुलंदशहर से नोएडा का सफर 30 मिनट में पूरा होगा?
इस परियोजना को लेकर सामने आ रही खबरों में बुलंदशहर से नोएडा की यात्रा लगभग 25 से 30 मिनट में पूरी होने का दावा किया गया है। हालांकि, इसे अभी सुनिश्चित यात्रा समय नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक समय एक्सप्रेसवे के अंतिम अलाइनमेंट, प्रवेश और निकास बिंदुओं, गति सीमा तथा यात्रा के शुरुआती और अंतिम स्थान पर निर्भर करेगा। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रियों को वैकल्पिक तेज मार्ग मिलने की उम्मीद है। इससे मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने और जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। लेकिन दिल्ली या नोएडा के हर स्थान तक 30 मिनट में पहुंचने की गारंटी देना फिलहाल उचित नहीं होगा।

औद्योगिक विकास और रोजगार की संभावनाएं
बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे का प्रभाव केवल यातायात तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक इकाइयों, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स केंद्रों, विनिर्माण गतिविधियों और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। जेवर एयरपोर्ट तथा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र के नजदीक होने के कारण यह कॉरिडोर क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, करीब 3,000 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक नगरी, मैन्युफैक्चरिंग हब या गारमेंट पार्क विकसित करने जैसी योजनाओं को अंतिम सरकारी मंजूरी और आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही निश्चित माना जाना चाहिए।
यदि सड़क परियोजना और उससे जुड़ी औद्योगिक योजनाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने, परिवहन लागत घटने और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
निर्माण की समयसीमा पर आधिकारिक पुष्टि जरूरी
परियोजना के लिए भूमि खरीद, अधिग्रहण और निर्माण संबंधी प्रक्रियाएं अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में निर्माण शुरू होने और 2029 या 2030 तक परियोजना पूरी होने की संभावनाएं जताई गई हैं, लेकिन इन्हें अंतिम समयसीमा नहीं माना जाना चाहिए। निर्माण की वास्तविक शुरुआत और पूरा होने की तारीख संबंधित विभागों की आधिकारिक जानकारी पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। परियोजना पूरी होने पर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, माल परिवहन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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