मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की मांग, बढ़ते भ्रष्टाचार से नाराज ग्रामीण, मुआवजे में 20 करोड़ की हेराफेरी का अनुमान, दर्ज हुआ मुकदमा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण में भूमि अधिग्रहण के दौरान एक बड़ी धांधली का मामला सामने आया है, जिसमें नंगला हुकम सिंह गांव के कुछ लोगों पर आरोप है कि उन्होंने करोड़ों का मुआवजा पाने के लिए अपनी जमीन पर अवैध निर्माण करवा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि इन लोगों ने स्थानीय पटवारी से सांठगांठ कर मकान और दो मंजिला इमारतें बना डालीं, ताकि मुआवजे में मोटी रकम हासिल कर सकें। इस शिकायत के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और अब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है।

गांववालों ने की सच्चाई उजागर करने की कोशिश, बार-बार की शिकायतें

नंगला हुकम सिंह गांव के निवासी कई महीनों से इस अवैध निर्माण और मुआवजे में हेराफेरी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रशासन से की, लेकिन किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय पटवारी और कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उनकी बात सुनी नहीं जा रही थी। परेशान ग्रामीणों ने अंततः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।

मुआवजे में 20 करोड़ की हेराफेरी का अनुमान, दर्ज हुआ मुकदमा

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के चार लोगों ने भूमि अधिग्रहण से पहले अपनी जमीन पर अवैध रूप से मकान और दो मंजिला इमारतें खड़ी कर दीं, ताकि सरकारी मुआवजा बढ़ाया जा सके। प्रशासन द्वारा तय मुआवजे की कुल राशि लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो सकता है। इस मामले में रबूपुरा कोतवाली में 20 दिसंबर 2023 को मुकदमा भी दर्ज किया गया था, लेकिन अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की मांग, बढ़ते भ्रष्टाचार से नाराज ग्रामीण

गांववालों ने आरोप लगाया है कि इन प्रभावशाली लोगों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत अपने खेतों में अवैध निर्माण किए, जिससे उन्हें सरकार से अतिरिक्त मुआवजा मिले। ग्रामीणों का कहना है कि ये लोग प्रशासन में अपने रसूख का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे अधिकारी उनकी मदद कर रहे हैं और शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक यह मामला पहुंचने के बाद गांववालों में उम्मीद जगी है कि अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई हो सकती है।

न्याय की उम्मीद में ग्रामीण, प्रशासन की छवि पर सवाल

इस मामले ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। स्थानीय पटवारी पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ताओं ने कहा कि गांव के अन्य लोगों को यह विश्वास नहीं हो पा रहा है कि वे अपनी आवाज को सही तरीके से उठा सकेंगे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से त्वरित प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है, ताकि इस तरह के भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके और प्रभावित ग्रामीणों को न्याय मिल सके।

क्या करेंगे CM योगी? क्या गांववालों को मिलेगा न्याय?

अब देखने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। ग्रामीणों की उम्मीद है कि अब निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को सजा मिलेगी। इस मामले में जल्द ही बड़े फैसले की संभावना है, जिससे गांववालों को न्याय और अवैध गतिविधियों पर रोक लग सकेगी।

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