ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (NIET), ग्रेटर नोएडा में 600 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक विशेष प्रेरणादायक एवं संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में NASA से जुड़े डॉ. अशोक प्रजापति ने विद्यार्थियों के साथ अपने पेशेवर अनुभव, तकनीकी क्षेत्र में चुनौतियों और जीवन में असफलताओं से सीखने की रणनीति साझा की। सत्र का केंद्रीय विषय “असफलता सफलता की ओर बढ़ाया गया एक कदम है” रहा।
डॉ. प्रजापति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने की यात्रा हमेशा सीधी नहीं होती। रास्ते में असफलताएं, चुनौतियां और अप्रत्याशित परिस्थितियां आती हैं, लेकिन इन्हीं अनुभवों से व्यक्ति सीखता है और अपनी कार्यशैली को बेहतर बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि असफलता को रुकावट मानने के बजाय उसे सीखने और आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
12 किलोमीटर की साइकिल यात्रा ने सिखाई बड़ी बात
डॉ. प्रजापति के संबोधन का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा उनके शुरुआती जीवन से जुड़ा अनुभव रहा। उन्होंने छात्रों को बताया कि अपने गांव से स्कूल जाने के लिए वह प्रतिदिन करीब 12 किलोमीटर साइकिल चलाते थे। शुरुआत में यह लंबी दूरी उन्हें कठिन, थकाऊ और उबाऊ लगती थी। रोजाना इतनी दूरी तय करने के बारे में सोचने से ही उन्हें परेशानी महसूस होती थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सोच में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किया। उन्होंने 12 किलोमीटर की पूरी दूरी को एक साथ देखने के बजाय उसे एक-एक किलोमीटर के 12 छोटे हिस्सों में बांट दिया। उनका ध्यान पूरी यात्रा पर नहीं बल्कि एक समय में केवल अगले एक किलोमीटर को पूरा करने पर रहने लगा।
डॉ. प्रजापति ने बताया कि इस छोटे से मानसिक बदलाव ने उनके अनुभव को पूरी तरह बदल दिया। जो यात्रा पहले बोझिल लगती थी, वही धीरे-धीरे सहज और आनंददायक बन गई। उन्होंने कहा कि जीवन की बड़ी समस्याओं से निपटने में भी यही तरीका कारगर है—बड़ी चुनौती को छोटे और प्रबंधनीय हिस्सों में बांटना, एक-एक कदम आगे बढ़ना और लगातार अपने तरीके को बेहतर करते रहना।
आज यही सोच Agile Practice का हिस्सा
डॉ. प्रजापति ने अपने इस अनुभव को आधुनिक इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली Agile Practices से जोड़कर छात्रों को समझाया। उन्होंने बताया कि आज जटिल इंजीनियरिंग परियोजनाओं में बड़ी समस्या को छोटे-छोटे कार्यों में विभाजित किया जाता है। फिर प्रत्येक चरण पर काम करते हुए परिणामों का मूल्यांकन किया जाता है और आवश्यकता के अनुसार रणनीति में बदलाव किया जाता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि कई बार जीवन में हम पूरी समस्या को एक साथ देखकर दबाव में आ जाते हैं। लेकिन यदि उसी समस्या को छोटे हिस्सों में बांटकर क्रमवार हल किया जाए तो चुनौती काफी आसान हो जाती है।
उन्होंने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि छात्र जीवन में उन्होंने यह तरीका किसी औपचारिक तकनीकी सिद्धांत के रूप में नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की समस्या को आसान बनाने के लिए अपनाया था। बाद में पेशेवर जीवन में यही सोच आधुनिक इंजीनियरिंग कार्यशैली और Agile Methodology के सिद्धांतों से जुड़ती चली गई।
“सफल इंजीनियर वह नहीं जो कभी असफल न हो”
डॉ. अशोक प्रजापति ने विद्यार्थियों से कहा कि सफल इंजीनियर वह नहीं होता जो जीवन में कभी असफल नहीं हुआ हो। असली सफलता उस व्यक्ति की है जो असफलता के बाद उसके कारणों को समझता है, अपनी रणनीति में बदलाव करता है और दोबारा प्रयास करता है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि “असफलता सफलता का विपरीत नहीं है। असफलता वह जानकारी है जो आपको बताती है कि सफलता के और करीब कैसे पहुंचा जाए।”
उन्होंने कहा कि किसी परीक्षा में कम अंक आना, किसी प्रोजेक्ट का सफल न होना, पहली नौकरी उम्मीद के अनुसार न मिलना या किसी तकनीकी समस्या का समाधान पहली कोशिश में न निकलना—इनमें से कोई भी घटना किसी छात्र के पूरे भविष्य का फैसला नहीं करती। जरूरी यह है कि विद्यार्थी उस अनुभव से क्या सीखता है और उसके बाद किस तरह आगे बढ़ता है।
AI से लेकर अंतरिक्ष तकनीक तक चर्चा
सत्र के दौरान इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. प्रजापति ने Artificial Intelligence (AI), Autonomous Systems, Cyber Security, Cloud Computing और Advanced Software Engineering जैसे क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि केवल किसी एक तकनीक को सीख लेना पर्याप्त नहीं है। तकनीकी क्षेत्र लगातार बदल रहा है और ऐसे में इंजीनियरों के लिए निरंतर सीखना, नई तकनीकों को समझना और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने मजबूत बुनियादी ज्ञान को तकनीकी करियर की नींव बताते हुए छात्रों से कहा कि नई तकनीकों के साथ-साथ अपने Core Engineering Fundamentals को भी मजबूत रखें। उनका कहना था कि मजबूत आधार के बिना नई तकनीकों को लंबे समय तक प्रभावी तरीके से समझना और इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।
जटिल समस्याओं को छोटे हिस्सों में हल करने की सीख
डॉ. प्रजापति ने अंतरिक्ष तकनीक और उच्च तकनीकी परियोजनाओं से जुड़े अनुभवों का उदाहरण देते हुए बताया कि अत्यधिक जटिल और सुरक्षा-संवेदनशील प्रणालियों पर काम करने वाले इंजीनियर किसी भी संभावित विफलता को नजरअंदाज नहीं करते। ऐसी प्रणालियों में संभावित जोखिमों का पहले से अनुमान लगाया जाता है, लगातार परीक्षण किए जाते हैं, अप्रत्याशित परिणामों का विश्लेषण किया जाता है और जरूरत के अनुसार डिजाइन में सुधार किया जाता है।
उन्होंने छात्रों को समझाया कि इंजीनियरिंग में Testing, Analysis, Feedback और Continuous Improvement केवल तकनीकी प्रक्रियाएं नहीं हैं, बल्कि सफल इंजीनियरिंग सोच का हिस्सा हैं।
NIET निदेशक ने छात्रों को किया प्रोत्साहित
कार्यक्रम में NIET के निदेशक डॉ. विनोद कापसे ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अनुभवी पेशेवरों, आधुनिक तकनीकों और वास्तविक दुनिया की इंजीनियरिंग चुनौतियों से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों से ऐसे संवादात्मक कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लाभ उठाने, सवाल पूछने और अपने भीतर जिज्ञासा बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में उन्हीं विद्यार्थियों के लिए अवसर अधिक होंगे, जो नई परिस्थितियों को स्वीकार करने और लगातार सीखने के लिए तैयार रहेंगे।
CTO डॉ. इरफान अली ने दिया तकनीकी कौशल पर जोर
NIET के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. इरफान अली ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने तकनीकी नवाचार, व्यावहारिक शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि अपने ज्ञान का इस्तेमाल वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान में करना भी है। उन्होंने छात्रों को शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ Practical Skills, Problem Solving और Innovation पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।
छात्रों ने खुलकर पूछे सवाल
सत्र के दौरान छात्रों ने डॉ. अशोक प्रजापति के साथ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, AI, Autonomous Systems, करियर विकल्पों, उच्च शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया। छात्रों ने यह जानने में भी रुचि दिखाई कि तकनीकी क्षेत्र में करियर की शुरुआत किस तरह की जाए और तेजी से बदलती तकनीक के बीच अपनी प्रासंगिकता कैसे बनाए रखी जाए। डॉ. प्रजापति ने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट रहने और सीखने की प्रक्रिया को कभी न रोकने की सलाह दी।
पहली असफलता भविष्य तय नहीं करती
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी प्रमुखता से सामने आया कि किसी विद्यार्थी की पहली असफलता उसके पूरे भविष्य को निर्धारित नहीं करती। चाहे वह परीक्षा में असफलता हो, नौकरी में असफल प्रयास हो या किसी प्रोजेक्ट का अपेक्षित परिणाम न मिलना—हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है। डॉ. प्रजापति ने कहा, “आपकी पहली असफलता आपके भविष्य को परिभाषित नहीं करती। सीखने, स्वयं को बदलने और दोबारा प्रयास करने की आपकी इच्छा ही आपके भविष्य को आकार देती है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे असफलता से डरकर प्रयास करना न छोड़ें। लगातार सीखना, प्रयोग करना और अपनी रणनीति में सुधार करते रहना ही लंबे समय में सफलता की मजबूत नींव तैयार करता है।
600 से अधिक छात्रों की भागीदारी ने दिखाया तकनीक के प्रति उत्साह
कार्यक्रम में 600 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि युवा विद्यार्थियों में Artificial Intelligence, Space Technology, Autonomous Systems और भविष्य की इंजीनियरिंग तकनीकों को लेकर गहरी रुचि है। इस संवाद ने छात्रों को किताबों और कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया के अनुभवों को समझने का अवसर दिया। विशेष रूप से असफलता से सीखने, समस्याओं को छोटे हिस्सों में बांटने और लगातार सुधार करने की रणनीति ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन छात्रों के लिए एक प्रभावशाली संदेश के साथ हुआ—“असफलता से मत डरिए; डरिए इस बात से कि कहीं आपने प्रयास ही न किया हो।” डॉ. अशोक प्रजापति का यह संवाद NIET के विद्यार्थियों के लिए केवल एक प्रेरणादायक व्याख्यान नहीं रहा, बल्कि तकनीकी शिक्षा, करियर निर्माण और व्यक्तिगत विकास को लेकर सोचने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी बना।

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