दादरी विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट को लेकर अभी से कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या किसी दावेदार को संगठन के स्तर पर कोई आधिकारिक संकेत मिला है या फिर समर्थकों की ओर से राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। कुशल सिंह को टिकट मिलने या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके नाम पर सहमति दिए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल उनके टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं को दावेदारी और राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अभी आधिकारिक टिकट प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, लेकिन दादरी विधानसभा सीट पर भाजपा से टिकट की दावेदारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहीं कुशल सिंह का नाम इन दिनों स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनकी दावेदारी के साथ ही भाजपा की सक्रिय सदस्यता, संगठन में उनकी भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कुशल सिंह की ओर से सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीरें साझा की गई हैं। इन तस्वीरों के आधार पर उनके समर्थकों की ओर से प्रधानमंत्री से मुलाकात को राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। वहीं, सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हैं कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान दादरी विधानसभा से टिकट को लेकर संकेत मिले थे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
2017-18 की तस्वीर को लेकर भी चर्चा
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कुशल सिंह की एक पुरानी तस्वीर भी चर्चा में है। यह तस्वीर रक्षाबंधन के अवसर से जुड़ी बताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर रक्षाबंधन के अवसर पर विभिन्न वर्गों के बच्चों और लोगों से मुलाकात करते रहे हैं।
अब इस पुरानी तस्वीर को लेकर कुशल सिंह की राजनीतिक पहचान और भाजपा की टिकट दावेदारी के संदर्भ में चर्चा हो रही है। हालांकि, किसी पुराने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर होना भाजपा का विधानसभा टिकट मिलने की गारंटी नहीं माना जा सकता। टिकट का अंतिम निर्णय पार्टी की अधिकृत प्रक्रिया और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा ही किया जाता है।
भाजपा की सदस्यता को लेकर उठे सवाल
कुशल सिंह की भाजपा संगठन में सक्रिय सदस्यता को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में गौतमबुद्धनगर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गजेंद्र मावी का एक पुराना बयान चर्चा में है। सदस्यता अभियान के दौरान दिए गए उनके बयान के हवाले से दावा किया जा रहा है कि संबंधित समय में कुशल सिंह और उनके पति भाजपा की सदस्यता लेने वालों में शामिल नहीं थे।
हालांकि, इस दावे की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए भाजपा के अधिकृत सदस्यता रिकॉर्ड से पुष्टि आवश्यक है। यदि कुशल सिंह के पास वर्तमान भाजपा सदस्यता की आधिकारिक जानकारी अथवा संगठन की ओर से कोई प्रमाणित जिम्मेदारी है, तो वह इस पूरे विवाद की स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
टिकट को लेकर समर्थकों की ओर से किए जा रहे दावे
दादरी विधानसभा सीट से टिकट की संभावित दावेदारी को लेकर कुशल सिंह के समर्थकों और उनसे जुड़े लोगों की ओर से तरह-तरह के दावे किए जाने की चर्चा है। इनमें उन्हें आगामी चुनाव में भाजपा का संभावित प्रत्याशी बताए जाने से लेकर टिकट लगभग तय होने तक की बातें शामिल हैं। लेकिन भाजपा की ओर से दादरी विधानसभा सीट के लिए अभी किसी प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सोशल मीडिया या समर्थकों के दावों को पार्टी का आधिकारिक निर्णय मानना जल्दबाजी होगी।
‘टिकट पक्का’ की चर्चा कितनी सच?
दादरी विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट को लेकर अभी से कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या किसी दावेदार को संगठन के स्तर पर कोई आधिकारिक संकेत मिला है या फिर समर्थकों की ओर से राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
कुशल सिंह को टिकट मिलने या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके नाम पर सहमति दिए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल उनके टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं को दावेदारी और राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। दादरी सीट पर भाजपा का अंतिम प्रत्याशी कौन होगा, इसका फैसला पार्टी की अधिकृत चुनावी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं, सदस्यता और संगठनात्मक भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर भाजपा तथा कुशल सिंह की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।

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