ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। 28 जनवरी 1991… यही वह तारीख है जब उत्तर प्रदेश के विकास मानचित्र पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के रूप में एक नए सपने ने जन्म लिया था। आज, 35 वर्षों का सफर तय कर चुका ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अपने 35वें स्थापना दिवस का साक्षी बन रहा है। इन 35 वर्षों में यह क्षेत्र केवल एक नियोजित शहर ही नहीं बना, बल्कि शिक्षा, उद्योग, रोजगार, रिहायश और निवेश के बड़े केंद्र के रूप में देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा।
ग्रेटर नोएडा को बसाने की परिकल्पना एक ऐसे आधुनिक शहर की थी, जहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, चौड़ी सड़कें, हरियाली, उद्योग और शिक्षा का संतुलित विकास हो। समय के साथ यह सपना काफी हद तक साकार भी हुआ। आज ग्रेटर नोएडा ऊंची-ऊंची गगनचुंबी सोसायटियों, विशाल पार्कों, ग्रीन बेल्ट, सर्विस रोड और योजनाबद्ध सेक्टरों के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदने वालों की पहली पसंद में ग्रेटर नोएडा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
शिक्षा और उद्योग का मजबूत स्तंभ बना शहर
ग्रेटर नोएडा ने खुद को देश के प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में स्थापित किया है। यहां देश-विदेश के छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल, लॉ और रिसर्च से जुड़े दर्जनों प्रतिष्ठित संस्थान इस क्षेत्र की पहचान हैं। शिक्षा के साथ-साथ औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में भी ग्रेटर नोएडा ने लंबी छलांग लगाई है।
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जुड़ाव ने क्षेत्र की रेल और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी। मोबाइल निर्माण कंपनियों के हब के रूप में ग्रेटर नोएडा देशभर में जाना जाता है। टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स से जुड़ी नामी कंपनियों ने यहां अपनी इकाइयां स्थापित कर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपना उत्पाद पहुंचाया है।
देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर ग्रेटर नोएडा में स्थित होना इस बात का प्रमाण है कि यह शहर भविष्य की तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था का भी केंद्र बन रहा है। करीब 750 एकड़ में विकसित इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप निवेशकों को आकर्षित कर रही है और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है।
रिहायश के सपनों का शहर बना ग्रेटर नोएडा
औद्योगिक और शैक्षणिक विकास के साथ-साथ ग्रेटर नोएडा रिहायशी क्षेत्र के रूप में भी तेजी से उभरा है। योजनाबद्ध सेक्टर, आधुनिक सोसायटियां, मॉल, बाजार, अस्पताल और मनोरंजन के साधनों ने इसे एक संपूर्ण शहर का रूप दिया है। हरियाली और खुली जगहें यहां की पहचान बन चुकी हैं, जो महानगरों की भीड़-भाड़ से राहत देती हैं।
उपलब्धियों के बीच बड़ी चुनौती: जमीन और किसान
हालांकि 35 वर्षों की इस विकास यात्रा में चुनौतियां भी कम नहीं रहीं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शहर के विकास के लिए किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया था, लेकिन हकीकत यह है कि अधिग्रहीत जमीन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा ही योजनाबद्ध विकास में उपयोग हो सका है। शेष जमीनों पर अवैध कब्जे, अनधिकृत कॉलोनियां और अतिक्रमण ने प्राधिकरण के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
ये जमीनें अरबों रुपये की बेसकीमती संपत्ति हैं, जिन पर अवैध कॉलोनियां काटकर शहर के नियोजित स्वरूप को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही, जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों से किए गए कई वादे आज भी अधूरे हैं। इसी कारण किसानों में नाराजगी बनी हुई है, जो समय-समय पर आंदोलन और विरोध के रूप में सामने आती है।
भविष्य की राह: उम्मीद और जिम्मेदारी
35वें स्थापना दिवस के मौके पर यह जरूरी हो जाता है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ अपनी कमियों पर भी आत्ममंथन करे। किसानों की नाराजगी दूर करना, अवैध कब्जों पर सख्ती से कार्रवाई करना और अधूरी योजनाओं को पूरा करना प्राधिकरण की प्राथमिकता होनी चाहिए।
जिस सुंदर, हरित और व्यवस्थित शहर की परिकल्पना 1991 में की गई थी, उसे पूरी तरह साकार करना अब भी एक लक्ष्य है। अगर प्राधिकरण मजबूत इच्छाशक्ति, पारदर्शिता और जनहित के साथ आगे बढ़े, तो आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि देश के सबसे बेहतरीन नियोजित शहरों में शुमार होगा।
35 साल का यह सफर उपलब्धियों, संघर्षों और उम्मीदों की कहानी है—और आने वाला समय तय करेगा कि यह सपना कितना और बड़ा बन पाता है।

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