नई दिल्ली, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी के बीच बढ़ती जुबानी तल्खी के बीच बुधवार, 26 अगस्त 2026 को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद खुद जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी साझा की।
प्रधानमंत्री मोदी और जयंत चौधरी की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब यूपी की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो रही हैं और सपा-आरएलडी के बीच बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है। ऐसे में इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
कृषि, स्किल और गुड गवर्नेंस पर हुई चर्चा
जयंत चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद बताया कि बातचीत में कृषि, स्किल प्रतियोगिताओं, नीति निर्माण में क्रिएटिव थिंकिंग और गुड गवर्नेंस में जनभागीदारी जैसे विषयों पर मार्गदर्शन मिला। यानी सार्वजनिक तौर पर मुलाकात का एजेंडा विकास और नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित बताया गया है। हालांकि, मुलाकात का समय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में सपा और आरएलडी के बीच बढ़ती दूरी तथा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री और आरएलडी अध्यक्ष की मुलाकात ने स्वाभाविक रूप से सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है।
अखिलेश के ‘चवन्नी’ बयान से गरमाई सियासत
जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच पिछले कुछ दिनों से बयानबाजी लगातार सुर्खियों में है। अखिलेश यादव ने 16 अगस्त को बिना नाम लिए जयंत चौधरी और आरएलडी पर निशाना साधते हुए कहा था कि “हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।” इसे जयंत चौधरी पर सीधा राजनीतिक तंज माना गया। इसके बाद जयंत चौधरी ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो सीधे उनका नाम लेकर बात की जाए। उन्होंने अखिलेश के बयान को जाट समाज को निशाना बनाने से जोड़ते हुए कहा कि ऐसा अहंकार अंततः पतन की ओर ले जाता है। इस बयानबाजी ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी को और स्पष्ट कर दिया है।
2022 में साथ, 2024 में बदल गया राजनीतिक रास्ता
जयंत चौधरी और अखिलेश यादव की पार्टियां 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में गठबंधन के साथ मैदान में उतरी थीं। आरएलडी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 33 सीटों पर चुनाव लड़ा और इनमें आठ सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आरएलडी ने भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का दामन थाम लिया। इसके बाद जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रही है।
क्या जयंत चौधरी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी?
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा तेज हो गई है—क्या आने वाले समय में जयंत चौधरी को केंद्र सरकार में कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी मिल सकती है? फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय की उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में जयंत चौधरी कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।
मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर चल रही हैं, लेकिन जयंत चौधरी की प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात को कैबिनेट प्रमोशन से जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
पश्चिमी यूपी में RLD की भूमिका अहम
जयंत चौधरी की राजनीतिक ताकत मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़ी मानी जाती है। आरएलडी का प्रभाव खासतौर पर किसान और जाट राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा है। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आरएलडी के साथ तालमेल पश्चिमी यूपी में महत्वपूर्ण राजनीतिक फैक्टर हो सकता है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक आधार और सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सपा और आरएलडी के बीच बढ़ती तल्खी का असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
क्या 2027 से पहले बन रहा है नया राजनीतिक समीकरण?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। भाजपा जहां एनडीए के सहयोगी दलों के साथ समीकरण मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं विपक्षी दल भी अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने में जुटे हैं। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जयंत चौधरी की मुलाकात कई सवाल छोड़ गई है। क्या यह सिर्फ कृषि और कौशल जैसे नीतिगत मुद्दों पर हुई बैठक थी, या इसके पीछे आने वाले समय की कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति भी है? फिलहाल इसका जवाब सामने नहीं आया है।
इतना जरूर है कि अखिलेश यादव के साथ बढ़ते टकराव, एनडीए में आरएलडी की भूमिका और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पीएम मोदी और जयंत चौधरी की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत का तापमान और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में जयंत चौधरी की भूमिका और केंद्र सरकार में संभावित जिम्मेदारी को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।

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