ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध नगर और पूरे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लिए परिवहन कनेक्टिविटी के लिहाज से बोड़ाकी में विकसित किया जा रहा मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) महत्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना के तहत बोड़ाकी में आधुनिक ग्रेटर नोएडा टर्मिनल विकसित करने की योजना है, जिसे रेलवे, मेट्रो, अंतरराज्यीय बस सेवा और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
आधिकारिक परियोजना विवरण के अनुसार, बोड़ाकी मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब में रेलवे टर्मिनल के साथ इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT), मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) और व्यावसायिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग परिवहन माध्यमों को एक ही स्थान पर जोड़कर यात्रियों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी तैयार करना है।
46 हेक्टेयर में विकसित होगा रेलवे टर्मिनल
बोड़ाकी में प्रस्तावित रेलवे टर्मिनल बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है। उपलब्ध परियोजना विवरण के मुताबिक, रेलवे स्टेशन के लिए करीब 46 हेक्टेयर भूमि निर्धारित है, जबकि पूरा मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब लगभग 176 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाना है। रेलवे टर्मिनल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है।
प्रस्तावित ग्रेटर नोएडा टर्मिनल में 12 प्लेटफॉर्म और 63 यार्ड लाइनें होंगी। यार्ड में ट्रेनों के संचालन के साथ उनके रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। रिपोर्टों के मुताबिक, टर्मिनल को करीब 100 ट्रेनों को संभालने की क्षमता के अनुरूप विकसित करने की योजना है, जिसमें वंदे भारत सहित प्रीमियम एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन की संभावना बताई गई है।
स्टेशन के ग्राउंड फ्लोर पर रेलवे संचालन से जुड़ी सुविधाएं और ऊपरी हिस्सों में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्थान प्रस्तावित है। इनमें कार्यालय, होटल, शॉपिंग और अन्य कमर्शियल सुविधाएं शामिल की जा सकती हैं। इस तरह बोड़ाकी केवल रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि एक व्यापक परिवहन एवं व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग से मिलेगा सीधा फायदा
बोड़ाकी टर्मिनल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। टर्मिनल के विकसित होने के बाद ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को लंबी दूरी की रेल सेवाओं के लिए दिल्ली या गाजियाबाद पर निर्भरता कम होने की संभावना है।
विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह टर्मिनल महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वंदे भारत और अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों के संभावित संचालन से ग्रेटर नोएडा की रेल कनेक्टिविटी को नया आधार मिलने की उम्मीद है।

मेट्रो और बस सेवा से भी जुड़ेगा बोड़ाकी
बोड़ाकी MMTH की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका मल्टी-मॉडल स्वरूप है। परियोजना में रेलवे टर्मिनल के साथ MRTS/मेट्रो कनेक्टिविटी और इंटरस्टेट बस टर्मिनल विकसित करने की योजना है।
बोड़ाकी को ग्रेटर नोएडा के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी काम प्रस्तावित है। इससे यात्री रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद मेट्रो के जरिए ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में आसानी से पहुंच सकेंगे। इसी तरह ISBT और स्थानीय बस टर्मिनल के जरिए आसपास के शहरों और राज्यों के लिए बस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है।
नमो भारत से जुड़ने की संभावना बढ़ाएगा प्रस्तावित कॉरिडोर
बोड़ाकी और पूरे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लिए एक और महत्वपूर्ण परियोजना गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर है। NCRTC के अनुसार यह प्रस्तावित कॉरिडोर गाजियाबाद को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से जोड़ेगा और इसके रास्ते में नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा के महत्वपूर्ण क्षेत्र आएंगे।
NCRTC के आधिकारिक विवरण के अनुसार प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई 72.44 किलोमीटर है। इसमें नमो भारत के साथ स्थानीय मेट्रो सेवाओं की भी योजना है। कुल 22 स्टेशनों की योजना में 11 स्टेशन नमो भारत सेवाओं के लिए प्रस्तावित हैं, जबकि मेट्रो सेवाओं का दायरा इससे अधिक स्टेशनों तक रखा गया है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर अभी DPR/प्रस्तावित चरण में है। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार को दी गई जानकारी के अनुसार NCRTC ने इस कॉरिडोर की DPR प्रस्तुत की है और परियोजना पर विभिन्न स्तरों पर परीक्षण/विचार की प्रक्रिया जारी है। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित कनेक्टिविटी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक जुड़ेगा क्षेत्र
प्रस्तावित गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर का उद्देश्य गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, YEIDA क्षेत्र और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक तेज क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है। NCRTC के अनुसार इस कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा एलिवेटेड और एक छोटा हिस्सा भूमिगत प्रस्तावित है।
प्रस्तावित नमो भारत स्टेशनों में गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा के विभिन्न क्षेत्र, सूरजपुर, अल्फा-1, इकोटेक-VI, दनकौर, YEIDA सेक्टर-18, YEIDA सेक्टर-21 और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
बोड़ाकी बन सकता है क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट का बड़ा केंद्र
बोड़ाकी में रेलवे टर्मिनल, ISBT, MRTS/मेट्रो और व्यावसायिक गतिविधियों को एक साथ विकसित करने की योजना इसे सामान्य रेलवे स्टेशन से अलग बनाती है। परियोजना के आधिकारिक विवरण में इसे ऐसा परिवहन केंद्र बनाने की परिकल्पना की गई है, जहां विभिन्न परिवहन माध्यम एक-दूसरे से जुड़ें और यात्रियों को एक ही परिसर में कई विकल्प मिल सकें। ग्रेटर नोएडा के तेजी से बढ़ते आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक विस्तार तथा जेवर में विकसित हो रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच बोड़ाकी की लोकेशन इस परियोजना के महत्व को और बढ़ाती है।यदि रेलवे टर्मिनल, मेट्रो, बस टर्मिनल और प्रस्तावित नमो भारत कनेक्टिविटी योजनाएं अपने निर्धारित स्वरूप में विकसित होती हैं, तो बोड़ाकी आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा का प्रमुख मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बन सकता है।

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