इकोटेक-2 में बड़े ट्रकों की अव्यवस्थित पार्किंग से जाम और सुरक्षा संबंधी परेशानी का दावा, बिना जल कनेक्शन भेजे जा रहे पानी के बिलों की जांच और माफी की मांग
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में व्याप्त विभिन्न समस्याओं को लेकर इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर मेधा रूपम से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को जिलाधिकारी के समक्ष रखते हुए उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की।
IEA प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान इकोटेक-2 औद्योगिक क्षेत्र में बड़े ट्रकों की अव्यवस्थित पार्किंग का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। एसोसिएशन के अनुसार, LG Electronics और Sheela Foam Factory से जुड़े बड़े ट्रक पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कों और अन्य औद्योगिक इकाइयों के बाहर खड़े रहते हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने और लगातार जाम की स्थिति बनने की शिकायत है।
बड़े ट्रकों की पार्किंग से औद्योगिक इकाइयों को परेशानी का दावा
IEA प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, सड़क किनारे बड़े वाहनों के खड़े रहने से आसपास की फैक्टरियों में आने-जाने वाले कर्मचारियों, उद्यमियों और अन्य वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कई औद्योगिक इकाइयों के सामने उनके स्वयं के वाहनों की पार्किंग के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं रहता।
इकोटेक-2 स्थित एक फैक्ट्री के उद्यमी वेंकटरमन ने बैठक में यह भी बताया कि ट्रकों की पार्किंग को लेकर विवाद और अव्यवस्था के कारण कई बार ट्रक चालकों द्वारा उद्योग मालिकों तथा कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने विशेष रूप से शाम के समय महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सुरक्षित आवागमन का मुद्दा भी उठाया।
IEA पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि इस समस्या को लेकर संबंधित विभागों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन उनकी शिकायत के अनुसार अभी तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि औद्योगिक क्षेत्र में ट्रकों के लिए व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था कराई जाए और सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग पर प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु हो सके।
बिना जल कनेक्शन के पानी के बिल भेजने का भी मुद्दा उठा
बैठक में IEA ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) द्वारा उन औद्योगिक इकाइयों को पानी के बिल भेजे जाने का मुद्दा भी उठाया, जिनके पास कथित तौर पर जल कनेक्शन उपलब्ध नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि कई ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में जलापूर्ति की पाइपलाइन तक उपलब्ध नहीं है, इसके बावजूद उद्योगों को पानी के बिल जारी किए जा रहे हैं।
IEA के अनुसार, यह मामला लंबे समय से उद्योग बंधु की बैठकों और GNIDA की बैठकों में उठाया जाता रहा है, लेकिन अभी तक इस पर स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने जिलाधिकारी को बताया कि कुछ वर्ष पूर्व भी एसोसिएशन ने इस विषय को प्राधिकरण के समक्ष उठाया था। उस समय GNIDA द्वारा केवल 38 औद्योगिक इकाइयों के पानी के बिल माफ किए गए थे। IEA का दावा है कि वर्तमान में भी बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों को बिना जल कनेक्शन के पानी के बिल प्राप्त हो रहे हैं।
NOC और अन्य अनुमतियों के कारण उद्यमियों पर वित्तीय दबाव का दावा
संजीव शर्मा ने कहा कि कई बार किसी औद्योगिक इकाई को प्राधिकरण से NOC अथवा अन्य आवश्यक अनुमति तत्काल प्राप्त करनी होती है। ऐसी परिस्थितियों में उद्यमियों को अपना काम आगे बढ़ाने के लिए प्राधिकरण की ओर से जारी पानी के बिलों का भुगतान करना पड़ता है। उनके अनुसार, कई मामलों में यह राशि लाखों रुपये तक पहुंच जाती है।
IEA ने मांग की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि किन औद्योगिक इकाइयों के पास वास्तविक जल कनेक्शन है और किन इकाइयों को बिना कनेक्शन के बिल जारी किए गए हैं।

औद्योगिक क्षेत्र में कैंप लगाकर बिलों की जांच और समाधान की मांग
IEA के पूर्व अध्यक्ष पीके तिवारी ने जिलाधिकारी से मांग की कि जिन औद्योगिक इकाइयों के पास जल कनेक्शन नहीं है और जिन क्षेत्रों में जलापूर्ति की पाइपलाइन उपलब्ध नहीं है, उनके पुराने पानी के बिलों की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में ही विशेष कैंप लगाकर पात्र मामलों का निस्तारण करने तथा गलत तरीके से लगाए गए पानी के बिलों को माफ करने की मांग की।
एसोसिएशन ने यह भी मांग रखी कि भविष्य में बिना जल कनेक्शन अथवा बिना जलापूर्ति सुविधा वाली इकाइयों को इस प्रकार के बिल जारी न किए जाएं।
IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि एसोसिएशन की ओर से GNIDA से इस समस्या का एक माह के भीतर समाधान करने की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन उद्यमियों ने मजबूरी में ऐसे पानी के बिलों का भुगतान पहले ही कर दिया है, उनकी जमा राशि को अन्य देनदारियों में समायोजित करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो IEA अपने सदस्यों के हितों के लिए लोकतांत्रिक एवं संगठनात्मक स्तर पर आवश्यक कदम उठाएगा।
जिलाधिकारी से सकारात्मक कार्रवाई के आश्वासन की बात
IEA प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जिलाधिकारी मेधा रूपम ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया। एसोसिएशन ने जिलाधिकारी द्वारा समय देने और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
IEA पदाधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुचारु यातायात व्यवस्था, सुरक्षित कार्य वातावरण और उद्यमियों पर अनावश्यक वित्तीय भार को कम करना औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित विभागों की ओर से जल्द ठोस कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल में IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा, पूर्व अध्यक्ष पीके तिवारी, विवेक चौहान, महिपाल सिंह, कमल सिंह, एमएम शर्मा और वेंकटरमन सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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