37 सप्ताह की गर्भावस्था में गंभीर एओर्टिक रिगर्जिटेशन और महाधमनी के फैलाव की चुनौती; पहले सीजेरियन डिलीवरी, अगले दिन Bentall Procedure से बदला वाल्व और एओर्टा का क्षतिग्रस्त हिस्सा
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने 27 वर्षीय गर्भवती महिला के जटिल हृदय रोग का सफल उपचार किया। अस्पताल के अनुसार, महिला की 37 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान जांच में दिल से निकलने वाली मुख्य रक्त नली एओर्टा (महाधमनी) में करीब 7.9 सेंटीमीटर का एओर्टिक एन्यूरिज्म पाया गया था। इसके साथ ही एओर्टिक वाल्व के ठीक से बंद नहीं होने के कारण गंभीर एओर्टिक रिगर्जिटेशन की स्थिति भी थी।
अस्पताल के मुताबिक महिला पिछले कुछ समय से सीने में दर्द, दोनों हाथों तक फैलने वाले दर्द और कमजोरी की शिकायत से परेशान थीं। विस्तृत जांच के बाद सामने आया कि उनकी ascending aorta काफी फैल चुकी थी। वहीं, एओर्टा के Sinus of Valsalva हिस्से में भी करीब 5.9 सेंटीमीटर का फैलाव पाया गया। जांच में दिल के बाएं हिस्से के थोड़ा बढ़ने की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, एओर्टा में दरार पड़ने या उसके फटने यानी aortic dissection के संकेत नहीं मिले।
पहले सुरक्षित डिलीवरी, फिर अगले दिन हृदय की बड़ी सर्जरी
महिला की गर्भावस्था अंतिम चरण में होने और हृदय की स्थिति गंभीर होने के कारण उपचार के लिए विभिन्न विशेषज्ञ टीमों के बीच समन्वय किया गया। अस्पताल के अनुसार, चिकित्सकों ने पहले बच्चे की सुरक्षित डिलीवरी कराने का निर्णय लिया।
23 जुलाई 2026 को महिला की सीजेरियन डिलीवरी (LSCS) कराई गई। अधिक रक्तस्राव के जोखिम को कम करने के लिए दोनों तरफ की internal iliac arteries को बांधने की प्रक्रिया भी की गई। डिलीवरी के बाद महिला की स्थिति स्थिर होने पर अगले दिन 24 जुलाई को उनकी जटिल कार्डियक सर्जरी की गई।
कार्डियक सर्जरी के दौरान Bentall Procedure किया गया। इस प्रक्रिया में खराब एओर्टिक वाल्व को कृत्रिम वाल्व से बदला गया और फैली हुई ascending aorta के प्रभावित हिस्से को ग्राफ्ट से रिप्लेस किया गया। अस्पताल के अनुसार, मरीज में 23-mm On-X एओर्टिक वाल्व और 24-mm ग्राफ्ट लगाया गया। साथ ही कोरोनरी धमनियों को नए ग्राफ्ट से जोड़ा गया।

सर्जरी के बाद विशेषज्ञ निगरानी में रही मरीज
अस्पताल के अनुसार, ऑपरेशन के बाद महिला को कुछ समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाओं की आवश्यकता पड़ी। उपचार के दौरान जरूरत के अनुसार रक्त के विभिन्न घटक, एंटीबायोटिक्स, दर्द नियंत्रित करने वाली दवाएं और अन्य आवश्यक चिकित्सा सहायता दी गई।
स्थिति में सुधार के बाद 25 जुलाई को मरीज को वेंटिलेटर से हटा दिया गया। इसके बाद विशेषज्ञ टीम ने लगातार उनकी निगरानी की। स्वास्थ्य में स्थिर सुधार होने के बाद उन्हें आवश्यक दवाओं के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टर बोले—ऐसे मामलों में मल्टीडिसिप्लिनरी टीम जरूरी
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉ. वेद प्रकाश, डायरेक्टर एवं HOD-CTVS, ने कहा कि मरीज की स्थिति इसलिए चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि वह गर्भावस्था के अंतिम चरण में थीं और उन्हें गंभीर वाल्व संबंधी समस्या के साथ एओर्टा में बड़ा एन्यूरिज्म था। उनके मुताबिक पहले सुरक्षित डिलीवरी और उसके बाद हृदय की सर्जरी करना विभिन्न विशेषज्ञ टीमों के समन्वय से संभव हुआ।
डॉ. नीलम बनर्जी, सीनियर कंसल्टेंट एवं रोबोटिक सर्जन तथा HOD-IVF एवं फर्टिलिटी, ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। पहले से हृदय या वाल्व की बीमारी होने पर विशेष चिकित्सकीय निगरानी जरूरी हो जाती है। उन्होंने समय पर जांच और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वित उपचार को महत्वपूर्ण बताया।
वहीं, अस्पताल के COO एवं फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार बालियान ने कहा कि यह मामला उन महिलाओं के लिए समय पर हृदय संबंधी जांच के महत्व को रेखांकित करता है, जिन्हें पहले से हृदय या वाल्व से जुड़ी समस्या है।
अस्पताल की ओर से विश्व हृदय दिवस के अवसर पर 21 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक ₹999 के विशेष हार्ट चेक-अप पैकेज की जानकारी भी दी गई है। अस्पताल के अनुसार, पैकेज में डॉक्टर की सलाह, ECG, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल, कम्प्लीट हीमोग्राम और फास्टिंग ब्लड शुगर की जांच शामिल है। इसके अलावा एंजियोग्राफी ₹7,999 में तथा ECHO और TMT पर 50 प्रतिशत छूट की पेशकश की जा रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान सीने में लगातार दर्द, सांस फूलना, असामान्य कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण है, विशेषकर तब जब महिला को पहले से हृदय या वाल्व संबंधी बीमारी की जानकारी हो।

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