गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के तृतीय एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में 5 लाख रुपये का शांति बंधपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया था। पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया था कि 20 जुलाई को आयोजित CJP के प्रदर्शन में अक्षत त्रिपाठी ने अन्य छात्रों को भड़काकर प्रदर्शन में शामिल किया। पुलिस ने आशंका जताई थी कि इस गतिविधि से क्षेत्र में तनाव और शांतिभंग की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को CJP प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत 5 लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद ग्रेटर नोएडा के तृतीय एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट डॉ. रवि शंकर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह जानकारी गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ को दी। मामला गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है, जिन्हें 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में BNSS की धारा 130 के तहत 5 लाख रुपये का शांति बंधपत्र भरने का नोटिस जारी किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने सवाल उठाया कि जब प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दंडात्मक अथवा जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी, तो संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा नोटिस क्यों जारी किया गया? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि कोई भी अधिकारी न्यायालय के आदेश से ऊपर नहीं है। अदालत ने अधिकारियों को न्यायिक आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की सख्त हिदायत दी थी और आदेश की अवहेलना करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी।

सुनवाई से पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि संबंधित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

छात्र को दिया गया था 5 लाख रुपये का नोटिस

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के तृतीय एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में 5 लाख रुपये का शांति बंधपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया था। पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया था कि 20 जुलाई को आयोजित CJP के प्रदर्शन में अक्षत त्रिपाठी ने अन्य छात्रों को भड़काकर प्रदर्शन में शामिल किया। पुलिस ने आशंका जताई थी कि इस गतिविधि से क्षेत्र में तनाव और शांतिभंग की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

हालांकि, छात्र अक्षत त्रिपाठी ने इन आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि वह केवल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

इस मामले में विवाद उस समय बढ़ गया जब सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दंडात्मक या जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका था। इसके बावजूद छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने छात्र को जारी नोटिस रद्द कर दिया। अब संबंधित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के निलंबन की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

कौन हैं डॉ. रवि शंकर मिश्रा?

डॉ. रवि शंकर मिश्रा PPS 2018 बैच के अधिकारी बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी नियुक्ति 31 मई 2021 को हुई थी। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और उन्होंने Ph.D. की शैक्षणिक योग्यता हासिल की है। निलंबन से पहले वह पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में ACP/एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (तृतीय) के पद पर तैनात थे। CJP प्रदर्शन से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई को न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।