गौतमबुद्धनगर, रफ़्तार टूडे। विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ दूरी पर हों, लेकिन दादरी विधानसभा की राजनीति में चुनावी शंखनाद समय से पहले ही सुनाई देने लगा है। गांव से लेकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटियों तक, चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक, एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—“भाजपा का टिकट किसे मिलेगा?” दिलचस्प बात यह है कि दादरी में इस समय सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर बढ़ती दावेदारियों और राजनीतिक समीकरणों की मानी जा रही है।

दादरी में टिकट मतलब आधी जीत!
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दादरी विधानसभा का स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, दादरी नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का मिश्रण इस सीट को खास बनाता है। भाजपा का संगठन यहां मजबूत माना जाता है, जबकि विपक्षी दलों को अभी भी बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
इसी कारण क्षेत्र में यह धारणा काफी मजबूत है कि दादरी में भाजपा का टिकट मिलना ही चुनावी जीत की आधी दूरी तय करने जैसा है। शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले सबसे ज्यादा सक्रियता भाजपा के संभावित दावेदारों के बीच दिखाई दे रही है।

क्या तीसरी बार हैट्रिक लगाएंगे मास्टर तेजपाल नागर? या तीसरी बार मिल पाएगा टिकट?
दादरी विधानसभा से दो बार विधायक रहे मास्टर तेजपाल सिंह नागर एक बार फिर तीसरी जीत की तैयारी में जुटे हुए हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान एक सरल और सहज नेता के रूप में होती है। राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जाता है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. महेश शर्मा का उन्हें हमेशा मजबूत राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है। हालांकि, कुछ पुराने कार्यकर्ताओं के बीच समय-समय पर असंतोष की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और विरोध के स्वर भी इन चर्चाओं को हवा दे रहे हैं। बावजूद इसके, मौजूदा परिस्थितियों में उनका नाम सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल माना जा रहा है।

प्रणीत भाटी: संगठन और संघ की पृष्ठभूमि का फायदा?
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष प्रणीत भाटी भी गंभीर दावेदारों में माने जा रहे हैं। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका पुराना जुड़ाव उन्हें अलग पहचान देता है। उनके परिवार की राजनीतिक और संगठनात्मक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत मानी जाती है। जिले की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण उनका एक अलग जनाधार माना जाता है, जो उन्हें टिकट की दौड़ में महत्वपूर्ण बनाता है। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रणीत भाटी को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। भाजपा और संघ दोनों में उनकी पुरानी सक्रियता तथा संगठनात्मक अनुभव उन्हें एक गंभीर दावेदार बनाता है। उनके पिताजी जनसंघ के पुराने कार्यकर्ता और नेता रहे, उनके भाई बीजेपी के पहले जिला अध्यक्ष रहे और संघ में पुराने समय से जुड़े रहे। और ऐसे ही आज प्रणीत भाटी को पूरे गौतम बुध नगर का समाज जानता है

आशीष भाटी की बढ़ती सक्रियता ने बढ़ाई हलचल
पूर्व मंत्री और वर्तमान एमएलसी नरेंद्र भाटी के पुत्र एडवोकेट आशीष भाटी का नाम भी सबसे चर्चित दावेदारों में गिना जा रहा है। पिछले कुछ समय से उनकी क्षेत्र में सक्रियता लगातार बढ़ी है। युवाओं के बीच उनकी पहुंच और लगातार जनसंपर्क अभियान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी युवा चेहरे पर दांव लगाती है तो आशीष भाटी एक मजबूत विकल्प साबित हो सकते हैं।

बिजेंद्र प्रमुख का नाम भी चर्चा में
चिटहेरा निवासी बिजेंद्र प्रमुख ब्लॉक प्रमुख का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से उभर रहा है। वहीं उनकी पहचान एक संघर्षशील नेता के रूप में की जाती है। पार्टी और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। जो पहले तेजपाल नागर के बहुत क्लोज थे अब उनके साथ राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर धन मन धन से है। वही उनके परिवार खासा दमदार लगता है समाज में

देवा भाटी और युवाओं के बीच मजबूत पकड़
जिला पंचायत सदस्य देवा भाटी भी गांव-गांव जाकर अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। युवाओं में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। लंबे समय से पार्टी और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा भी उन्हें संभावित दावेदारों की सूची में बनाए हुए है।

एडवोकेट सुशील भाटी का नाम भी टिकट के गलियारों में

कटहरा निवासी एडवोकेट सुशील भाटी भी किसी से काम नहीं है। 2004 में जब गौतम नगर का जिला मुलायम सिंह यादव ने अपनी गलत नीतियों से जिला भंग कर दिया था जब उन्होंने बार एसोसिएशन के सचिव होने के नाते आत्मदाह का प्रयास किया था, उसके बाद 2022-23 में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नियुक्त हुए थे। तथा उनके दादाजी राव उमराव आजादी की लड़ाई में रानी लक्ष्मी बाई और भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद के साथ नलगड़ा में शामिल है। उनकी भाभी दादरी नगर पालिका की सभासद रही है। जिला बचाओ आंदोलन से लेकर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद तक उनका सफर उन्हें एक अलग पहचान देता है।

संगठन का चेहरा बन सकते हैं इंद्र नागर
अगर संगठन और वैचारिक पृष्ठभूमि को आधार माना जाए तो इंद्र नागर का नाम भी काफी मजबूत माना जा रहा है। एबीवीपी से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले इंद्र नागर भाजपा युवा मोर्चा और किसान मोर्चा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। संगठन में उनकी पकड़ और कार्यशैली उन्हें अन्य दावेदारों से अलग पहचान देती है।

राजनीतिक गलियारों में , संजय विकल, के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि इनमें से कौन वास्तव में टिकट की अंतिम दौड़ तक पहुंचेगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

क्या महिला नेतृत्व पर दांव खेलेगी भाजपा?
इस बार दादरी की राजनीति का एक रोचक पहलू महिला दावेदारों की बढ़ती सक्रियता भी है।
गीता पंडित
दादरी नगर पालिका की तीन बार की चेयरमैन रह चुकी गीता पंडित का नाम भी चर्चा में है। ब्राह्मण समाज में उनकी मजबूत पकड़ और स्वर्गीय विजय पंडित की राजनीतिक विरासत उन्हें विशेष स्थान देती है।

कुशल सिंह का नाम भी चर्चा में
हाल के दिनों में कुशल सिंह का नाम भी राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा में आया है। हालांकि उनकी कोई बड़ी संगठनात्मक भूमिका नहीं रही है, लेकिन प्रभावशाली राजनीतिक संपर्कों के कारण उनकी दावेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा।


दिल्ली, लखनऊ और संगठन… सबकी नजरें दादरी पर
दादरी विधानसभा में इस समय हर संभावित दावेदार अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटा हुआ है। कोई संगठन के भरोसे है, कोई राजनीतिक परिवारों के प्रभाव पर, तो कोई दिल्ली और लखनऊ के राजनीतिक गलियारों की ओर देख रहा है।

सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही…
क्या भाजपा तीसरी बार अनुभव पर भरोसा करेगी?
क्या संगठन को प्राथमिकता दी जाएगी?
क्या युवा चेहरे को मौका मिलेगा?
क्या किसी राजनीतिक परिवार का प्रभाव चलेगा?
क्या महिला नेतृत्व पर दांव लगाया जाएगा?
इन सभी सवालों के जवाब अभी भविष्य के गर्भ में हैं। लेकिन एक बात तय है कि आने वाले दिनों में दादरी की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा विपक्ष नहीं, बल्कि भाजपा का टिकट बनने जा रहा है। और फिलहाल गांव की चौपाल से लेकर शहर की सोसाइटियों तक, हर जगह बस एक ही सवाल गूंज रहा है— "आखिर दादरी से भाजपा का टिकट किसे मिलेगा?"