साइट C, ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे ब्यूरो।


जहां घरों में सुकून होना था, वहां अब डर और बदबू है!

साइट C, सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा), रफ़्तार टुडे।
पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसाइटी के ओक और पाइन टावर के सैकड़ों निवासी इन दिनों बदहाल स्थिति में जी रहे हैं। कभी "लक्ज़री" कहकर बेचे गए ये टावर आज गंदगी, टूटे इंफ्रास्ट्रक्चर और जानवरों के डर का पर्याय बन गए हैं।
“यहां घरों में नहीं, डर और दुर्गंध में सांस लेनी पड़ रही है”, ऐसा कहना है यहां के बुजुर्ग और माता-पिता का, जो बच्चों को बाहर भेजने से भी घबरा रहे हैं।


कूड़े के ढेर और फैलती दुर्गंध, सोसाइटी में बदबू का साम्राज्य

निवासियों का कहना है कि रोज़ सुबह लोग कचरा बाहर रखते हैं, लेकिन क्लीनिंग स्टाफ कई बार दोपहर या शाम तक उसे उठाने नहीं आता।
बदबू इतनी हो जाती है कि दरवाज़ा खोलना भी मुश्किल हो जाता है। ऊपर से आवारा कुत्ते उस कूड़े में मुंह मारकर चारों तरफ फैला देते हैं, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।

?️ “कई बार तो कचरा तीन-चार घंटे तक वही पड़ा रहता है, ऊपर से कुत्ते आकर उसे फाड़ देते हैं — ये सोसाइटी नहीं, नारकीय स्थल बन चुका है।”
— नीरज कुमार, निवासी


लिफ्टें नहीं चलती, जो चलती हैं वो कभी भी बंद हो सकती हैं!

ओक और पाइन टावर में तीन-चार लिफ्ट महीनों से खराब हैं।

  • कुछ बंद हैं,
  • कुछ अटकती हैं,
  • और बाकी अचानक बीच में बंद हो जाती हैं।
    इससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति खतरनाक और अपमानजनक हो चुकी है।

“हर दिन सोचते हैं कि आज तो लिफ्ट में फंसेंगे। यह डर अब स्थायी बन चुका है।”
— शिवानी त्रिपाठी, 10वीं मंज़िल निवासी


कुत्तों का बढ़ता आतंक — न खेल सकते हैं बच्चे, न टहल सकते बुजुर्ग

सोसाइटी में आवारा कुत्तों की संख्या बेकाबू हो चुकी है।

  • पार्क में
  • सीढ़ियों में
  • कॉरिडोर में
  • और यहां तक कि लिफ्ट के पास भी

कुत्ते बैठे मिलते हैं, भौंकते हैं और हमला करने को दौड़ते हैं।

कुछ बच्चों और महिलाओं को काटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रबंधन से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

? “कुत्तों ने बच्चों का बाहर खेलना बंद करवा दिया है। ये जंगल नहीं, रेजिडेंशियल एरिया है — लेकिन कोई फर्क ही नहीं पड़ता।”
— राजीव मल्होत्रा, निवासी


पार्किंग की किल्लत — जहां मन किया, वहीं गाड़ी ठूंसी जाती है

गाड़ियों की अनियंत्रित पार्किंग ने टावर के नीचे गलियों को अव्यवस्थित और असुरक्षित बना दिया है।

  • फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाएं घुस ही नहीं सकतीं।
  • एक्सिट रूट तक कई बार ब्लॉक हो जाते हैं।

? “एक भी तय पार्किंग सिस्टम नहीं है। लोग जहां मर्जी वहां गाड़ी खड़ी कर देते हैं — और सिक्योरिटी बस देखती रहती है।”
— किरण यादव, पाइन टावर निवासी


निवासियों का आक्रोश — धरना और प्रशासनिक शिकायत की तैयारी

सैकड़ों परिवारों ने प्रबंधन को कई बार शिकायतें भेजीं हैं लेकिन न कोई जवाब मिला, न सुधार।
अब निवासी कह रहे हैं कि यदि 7 दिनों में हालात नहीं सुधरे, तो वे बच्चों और बुजुर्गों को साथ लेकर अथॉरिटी के दफ्तर पर प्रदर्शन करेंगे।

? “हमारे लिए यह सिर्फ एक सोसाइटी नहीं, हमारा घर है — लेकिन अब ये रहने लायक नहीं बची। यह सब देखकर हम टूट रहे हैं।”
— धीरज भाटिया, ओक टावर निवासी


प्राधिकरण और प्रबंधन की चुप्पी — सबसे बड़ा अपराध

अब सवाल है —

  • ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्या कर रहा है?
  • क्या सोसाइटी के निर्माण के बाद उनकी कोई जवाबदेही नहीं है?
  • रियल एस्टेट एक्ट (RERA) के तहत क्या ऐसी व्यवस्थाएं दंडनीय नहीं होनी चाहिए?

#RaftarToday की अपील: नागरिकों की आवाज़ दबनी नहीं चाहिए!

पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट जैसी हाई-प्रोफाइल सोसाइटियों की असलियत जब बाहर आती है, तब समझ आता है कि ब्रांडेड इमारतें भी बदबू और बदइंतज़ामी में सड़ रही हैं।
अब समय आ गया है कि प्रशासन, प्रबंधन और डेवलपर पर सामूहिक जवाबदेही तय हो!


? क्या आप भी पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट के निवासी हैं? नीचे कमेंट में अपने अनुभव साझा करें और इस अभियान को मज़बूत करें!


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