छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों ने एकजुट होकर सीखा – स्वस्थ जीवन का मंत्र, योग!

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
21 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, के.पी.-III, ग्रेटर नोएडा में उल्लास, अनुशासन और आत्मिक ऊर्जा का मिलाजुला संगम देखने को मिला। योग दिवस को खास बनाने के लिए विद्यालय प्रशासन द्वारा एक विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसने छात्रों, अभिभावकों और अध्यापक समुदाय को एक साझा मंच पर लाकर आत्मचिंतन और शारीरिक जागरूकता का अवसर प्रदान किया।

सुबह 7 बजे की रश्मियों संग शुरू हुआ योग का महाआयोजन

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में प्रातः 7:00 बजे हुई, जब छात्र-छात्राएं, उनके माता-पिता और अध्यापकगण, मैट पर बैठ ध्यान मुद्रा में कार्यक्रम की प्रतीक्षा कर रहे थे। शांत संगीत, सुगंधित धूपबत्ती और खुले आकाश के नीचे बना यह वातावरण कुछ क्षणों के लिए ही सही, लेकिन सभी को ‘भीतर की यात्रा’ पर ले गया।

पूजा सिंह के नेतृत्व में हुआ व्यावसायिक योग सत्र

योग प्रशिक्षिका सुश्री पूजा सिंह ने जब मंच संभाला, तो उन्होंने सबसे पहले संस्कृत श्लोक
"सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः..." के उच्चारण से सत्र का शुभारंभ किया। उन्होंने विभिन्न आसन जैसे ताड़ासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, उष्ट्रासन और अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम जैसे श्वसन अभ्यासों को विद्यार्थियों को बेहद सरल तरीके से सिखाया।

पूजा सिंह ने न केवल इन योगासनों के शारीरिक लाभ बताए, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक असर को भी रेखांकित किया। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार एक विद्यार्थी रोज़ाना 15-20 मिनट का योग करके पढ़ाई में मन लगाना, एकाग्रता बढ़ाना और तनाव को कम करना सीख सकता है।

अभिभावकों और छात्रों की एक साथ सहभागिता ने रचा उदाहरण

इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह नज़ारा अपने आप में प्रेरणादायक था – जहाँ माता-पिता और बच्चे साथ मिलकर स्वस्थ जीवन के मूल मंत्र को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे थे।

निदेशिका और प्रधानाचार्या के विचारों में झलका "योग से जीवन" का भाव

विद्यालय की निदेशिका श्रीमती कंचन कुमारी ने अपने उद्बोधन में कहा –

“योग केवल व्यायाम नहीं, यह जीवन जीने की एक कला है। इसके माध्यम से हम शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। हमें अपने बच्चों को शुरुआत से ही योग की आदत डालनी चाहिए ताकि वे शारीरिक रूप से फिट और मानसिक रूप से स्थिर रहें।”

वहीं, प्रधानाचार्या डॉ. हीमा शर्मा ने योग के बहुआयामी लाभों की चर्चा करते हुए कहा –

“आज के समय में जब तनाव, प्रतिस्पर्धा और असंतुलित दिनचर्या ने जीवन को थका दिया है, योग ही वह साधन है जो हमें फिर से आत्मशांति, स्वास्थ्य और जीवन ऊर्जा देता है। दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल हमेशा ऐसे आयोजनों के माध्यम से छात्रों को जागरूक करता रहेगा।”

संघबद्धता का प्रतीक बना यह आयोजन

सत्र के अंत में सभी ने एक साथ मिलकर शांति मंत्र का उच्चारण किया और 'ओम्' ध्वनि की प्रतिध्वनि से वातावरण गूंज उठा। इस क्षण ने सभी उपस्थित लोगों को यह अहसास दिलाया कि भौतिक दुनिया की हलचल के बीच योग एक ठहराव देता है।

शिक्षकों और स्टाफ का उत्साह बना आयोजन की रीढ़

इस योग सत्र को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकगण और शिक्षकेतर कर्मचारी पूरे समय सक्रिय रहे। रजिस्ट्रेशन से लेकर योग मैट की व्यवस्था, जलपान और समय प्रबंधन तक, हर पहलू को समर्पण और अनुशासन से निभाया गया।

बच्चों की प्रतिक्रियाएं: “पहली बार पापा के साथ ताड़ासन किया!”

एक छात्रा पलक शर्मा ने कहा –

“मुझे ताड़ासन और प्राणायाम सबसे अच्छा लगा। मैंने पहली बार पापा के साथ योग किया और हमें बहुत मजा आया।”
वहीं एक अभिभावक अमित मिश्रा ने बताया –
“यह स्कूल का बेहद सराहनीय प्रयास है। आज के बच्चों को स्क्रीन टाइम से निकालकर योग और मेडिटेशन जैसे अभ्यासों की ओर ले जाना बेहद जरूरी है।”

‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ का संदेश हुआ जन-जन तक प्रसारित

इस वर्ष की थीम “One Earth, One Health” को ध्यान में रखते हुए दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल ने यह दिखाया कि कैसे स्कूल स्तर पर भी वैश्विक सोच को जमीनी कार्यरूप दिया जा सकता है। हर माता-पिता, छात्र और शिक्षक को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ समाज की बुनियाद स्वस्थ नागरिकों से ही बनती है

तस्वीरों में कैद हुआ आत्मिक अनुभव

कार्यक्रम की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं, जिसमें बच्चों की मुस्कुराहट, माता-पिता का संतोष और शिक्षकों का समर्पण साफ झलकता है।


निष्कर्ष: योग दिवस बना स्कूल की नई पहचान का प्रतीक

दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा द्वारा आयोजित यह योग दिवस न केवल एक कार्यक्रम था, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर सामूहिक अनुभव था। विद्यालय के इस प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि मानव निर्माण का कार्य है – जिसमें योग, अनुशासन, स्वास्थ्य और संस्कार सभी का संतुलन होना आवश्यक है।


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