अक्षरधाम-मयूर विहार से एयरपोर्ट तक बेहतर कनेक्टिविटी का प्लान, करीब 50 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा में; सिंचाई विभाग की आपत्ति के बाद बदला गया अलाइनमेंट

Delhi NCR, रफ़्तार टूडे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक दिल्ली-NCR से तेज और सुगम कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में एलिवेटेड एक्सप्रेसवे परियोजना को गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 4 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 6 लेन का एलिवेटेड एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण अपने क्षेत्र के 22 गांवों की जमीन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को उपलब्ध कराएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और हरियाणा की ओर से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

प्रस्तावित एलिवेटेड एक्सप्रेसवे को इस तरह विकसित करने की योजना है कि बड़े हिस्से में वाहन शहर के व्यस्त और जाम वाले हिस्सों से ऊपर होकर एयरपोर्ट की ओर आगे बढ़ सकें। इससे दिल्ली और नोएडा के प्रमुख इलाकों से एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक और तेज सड़क कनेक्टिविटी मिल सकती है।

22 गांवों की जमीन NHAI को मुफ्त देने की तैयारी

परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए नोएडा प्राधिकरण अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले 22 गांवों की आवश्यक जमीन NHAI को मुफ्त उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इसी जमीन पर एलिवेटेड रोड के लिए पिलर और अन्य जरूरी ढांचा विकसित किया जाएगा। NHAI को जमीन उपलब्ध कराने के बाद परियोजना की विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर करीब 50 किलोमीटर लंबा बताया जा रहा है, जिसमें लगभग 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा क्षेत्र में आएगा। अलाइनमेंट में सेक्टर-44, सेक्टर-99, सेक्टर-101 और सेक्टर-109 के साथ वाजिदपुर, झट्टा, बदौली बांगर, कोंडली, गढ़ी और मोमनाथन समेत कई गांवों को जोड़ा गया है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के तीन गांव भी परियोजना के दायरे में बताए जा रहे हैं।

सिंचाई विभाग की आपत्ति के बाद बदला गया रूट

एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट में सिंचाई विभाग की आपत्ति के बाद महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। विभाग की ओर से तटबंध के ऊपर या उसके लिए प्रस्तावित हिस्से में अनुमति नहीं मिलने के बाद अब कॉरिडोर को तटबंध से करीब पांच मीटर की दूरी पर नोएडा की तरफ विकसित करने की योजना बनाई गई है।

नए अलाइनमेंट के अनुसार आगे चलकर यह कॉरिडोर यमुना नदी के किनारे प्रस्तावित 120 मीटर चौड़ी सड़क से जोड़ा जाएगा। इस बदलाव के बाद परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता और निर्माण से जुड़े पहलुओं को आगे की DPR प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

CEO कृष्ण करुणेश ने बताई प्राथमिकता

नोएडा प्राधिकरण के CEO कृष्ण करुणेश के अनुसार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना प्राधिकरण की प्राथमिकताओं में शामिल है। परियोजना के लिए NHAI को आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को समयबद्ध तरीके से विकसित करने की दिशा में काम किया जा सके।

एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण और भविष्य में उसके रखरखाव की जिम्मेदारी NHAI की ओर से संभाले जाने की बात कही गई है। इससे परियोजना के निर्माण के साथ-साथ लंबे समय तक उसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के स्तर पर रहने की उम्मीद है।

DPR के बाद होगी मिट्टी की जांच

परियोजना के अलाइनमेंट को अंतिम रूप देने के बाद अब इसकी DPR यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। DPR में सड़क की संरचना, पिलर, इंटरचेंज, कनेक्टिविटी और निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

निर्माण शुरू होने से पहले प्रस्तावित क्षेत्र में मिट्टी की भार सहने की क्षमता यानी bearing capacity की भी जांच की जाएगी। एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के पिलर और भारी संरचना को देखते हुए यह तकनीकी परीक्षण परियोजना की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

दिल्ली, नोएडा और फरीदाबाद को मिलेगी कनेक्टिविटी

प्रस्तावित कॉरिडोर से अक्षरधाम, मयूर विहार, पटपड़गंज, कालिंदी कुंज और सरिता विहार जैसे दिल्ली के इलाकों से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी बेहतर होने की संभावना है। वहीं फरीदाबाद और हरियाणा की तरफ से मंझावली पुल के माध्यम से इस नेटवर्क को जोड़ने की योजना भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन के साथ दिल्ली-NCR से एयरपोर्ट तक तेज और भरोसेमंद सड़क कनेक्टिविटी की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रस्तावित 6 लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे को दिल्ली-NCR, नोएडा और एयरपोर्ट के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी कॉरिडोर के तौर पर विकसित करने की योजना है। हालांकि परियोजना की वास्तविक समयसीमा और अंतिम निर्माण स्वरूप DPR तथा आगामी तकनीकी एवं प्रशासनिक मंजूरियों के बाद स्पष्ट होगा।