ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे। विश्व आईवीएफ (IVF) दिवस के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन में एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य निसंतानता (इनफर्टिलिटी) से जुड़ी सामाजिक झिझक, भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करना तथा लोगों को समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर आईवीएफ तकनीक की मदद से माता-पिता बने कई परिवार अपने बच्चों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने वर्षों के संघर्ष, सामाजिक दबाव और भावनात्मक चुनौतियों के बाद माता-पिता बनने की अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की। परिवारों ने बताया कि सही समय पर विशेषज्ञों से सलाह, आधुनिक चिकित्सा और परिवार के सहयोग ने उनके जीवन में नई उम्मीद और खुशियां लौटाईं।
निसंतानता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि निसंतानता किसी व्यक्ति की कमजोरी या सामाजिक कलंक का विषय नहीं है, बल्कि यह एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के माध्यम से सफल उपचार संभव है। उन्होंने बताया कि आज भी अनेक दंपति सामाजिक झिझक और गलत धारणाओं के कारण विशेषज्ञ से परामर्श लेने में देर कर देते हैं, जिससे उपचार की सफलता की संभावना प्रभावित हो सकती है।
आईवीएफ से पहले स्वास्थ्य की पूरी तैयारी जरूरी : डॉ. अमरीन सिंह
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन की एचओडी एवं सीनियर कंसल्टेंट (आईवीएफ एवं इंफर्टिलिटी) डॉ. अमरीन सिंह ने कहा कि "आईवीएफ केवल एक उपचार नहीं, बल्कि पूरी तैयारी की प्रक्रिया है। बेहतर परिणाम के लिए दंपतियों का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार होना बेहद आवश्यक है। यदि किसी मरीज को थायरॉयड, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या एनीमिया जैसी समस्या है, तो पहले उसका उचित उपचार कराया जाना चाहिए। डॉक्टर द्वारा सुझाई गई सभी जांच समय पर कराना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी स्वास्थ्य समस्या भी आईवीएफ के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।"
उन्होंने आगे बताया कि 35 वर्ष से कम आयु की महिलाओं को यदि नियमित प्रयास के एक वर्ष बाद भी गर्भधारण नहीं होता और 35 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को छह महीने के प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिलती, तो उन्हें बिना देर किए फर्टिलिटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
डॉ. अमरीन सिंह ने यह भी सलाह दी कि आईवीएफ उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह के अनुसार फोलिक एसिड, विटामिन-डी और को-एंजाइम क्यू10 (CoQ10) जैसे सप्लीमेंट लेना लाभदायक हो सकता है। इसके साथ ही संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, स्वस्थ वजन बनाए रखना तथा धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना उपचार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान सकारात्मक सोच और तनाव पर नियंत्रण भी उतना ही आवश्यक है।
सामाजिक सोच बदलने की जरूरत : डॉ. प्रह्लाद अग्रवाल
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीओओ डॉ. प्रह्लाद अग्रवाल ने कहा "निसंतानता को सामाजिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या के रूप में समझने की आवश्यकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आईवीएफ जैसी तकनीकों ने लाखों परिवारों को माता-पिता बनने का अवसर दिया है। सबसे जरूरी बात यह है कि लोग सामाजिक झिझक और भ्रांतियों से बाहर निकलकर समय पर विशेषज्ञ से सलाह लें और वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें। सही समय पर उपचार से अनेक दंपतियों का माता-पिता बनने का सपना साकार हो सकता है।"
संघर्ष से खुशियों तक की प्रेरणादायक कहानियां
कार्यक्रम में शामिल परिवारों ने बताया कि वर्षों तक संतान न होने के कारण उन्हें मानसिक तनाव, भावनात्मक पीड़ा और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। लेकिन समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श, आधुनिक आईवीएफ तकनीक और परिवार के सहयोग से आज उनका परिवार पूर्ण हो चुका है। इन परिवारों ने अन्य दंपतियों से अपील की कि निसंतानता को छिपाने या शर्म का विषय मानने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि सही उपचार से इस समस्या का समाधान संभव है।
450 बेड की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-1 में स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल यथार्थ ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स का प्रमुख 450 बेड वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है। यह अस्पताल नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली-एनसीआर तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं और मरीज-केंद्रित उपचार उपलब्ध करा रहा है। अपनी उन्नत चिकित्सा तकनीक और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के कारण यह अस्पताल क्षेत्र के भरोसेमंद चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। विश्व आईवीएफ दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल चिकित्सा जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि समाज को यह महत्वपूर्ण संदेश भी दिया कि निसंतानता कोई सामाजिक कलंक नहीं, बल्कि एक उपचार योग्य चिकित्सकीय स्थिति है। समय पर सही सलाह, वैज्ञानिक उपचार और सकारात्मक सोच से लाखों दंपतियों का माता-पिता बनने का सपना साकार हो सकता है।

Comments (0)
Leave a Comment