नोएडा, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल नोएडा की प्रशासनिक कमान इन दिनों 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश के हाथों में है। जिला प्रशासन से लेकर विकास प्राधिकरण तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके कृष्णा करुणेश के सामने अब नोएडा जैसे हाईटेक शहर की बुनियादी सुविधाओं, विकास परियोजनाओं, किसानों, आरडब्ल्यूए, बिल्डर-बायर्स और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े मामलों को संभालने की चुनौती है। गोरखपुर के जिलाधिकारी से लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के बाद CEO की जिम्मेदारी तक पहुंचा उनका प्रशासनिक सफर विविध अनुभवों से भरा रहा है। यही वजह है कि नोएडा प्राधिकरण में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी के रूप में देखा गया।

जनवरी 2026 में मिली नोएडा प्राधिकरण की कमान

कृष्णा करुणेश को जनवरी 2026 में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले वह नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के रूप में काम कर रहे थे। उस समय नोएडा के सामने कई गंभीर शहरी चुनौतियां थीं। जलभराव, सड़क और ड्रेनेज व्यवस्था, सीवर, यातायात, सफाई, पार्कों का रखरखाव, बिल्डर-बायर्स से जुड़े मामले और किसानों की समस्याएं लगातार चर्चा में थीं।

ऐसे समय में प्राधिकरण की कमान ऐसे अधिकारी को दी गई, जिसे जिले के प्रशासन के साथ-साथ शहरी विकास प्राधिकरणों में काम करने का अनुभव भी हासिल था।

कौन हैं कृष्णा करुणेश?

IAS कृष्णा करुणेश उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनके प्रशासनिक करियर में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ विकास प्राधिकरणों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि में भूगोल की पढ़ाई, कानून की शिक्षा और पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी उच्च शिक्षा का उल्लेख मिलता है। प्रशासनिक दृष्टि से उनकी खासियत यह रही है कि उन्होंने ग्रामीण और जिला प्रशासन के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में भी काम किया है। यही विविध अनुभव नोएडा जैसी जटिल शहरी व्यवस्था को समझने में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

कुशीनगर से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर

आईएएस सेवा में आने के बाद कृष्णा करुणेश ने अपने शुरुआती प्रशासनिक कार्यकाल में कुशीनगर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्होंने गाजियाबाद में भी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। गाजियाबाद में काम करने के दौरान उन्हें तेजी से शहरीकरण, विकास योजनाओं, प्रशासनिक प्रबंधन और स्थानीय स्तर की समस्याओं से निपटने का अनुभव मिला। बड़े महानगरीय क्षेत्र के आसपास काम करने का यह अनुभव आगे चलकर उनके शहरी प्रशासनिक करियर में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

हापुड़ और बलरामपुर के जिलाधिकारी रहे

कृष्णा करुणेश ने हापुड़ और बलरामपुर के जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। हापुड़ दिल्ली-एनसीआर से जुड़ा तेजी से विकसित होता जिला है, जबकि बलरामपुर की प्रशासनिक चुनौतियां अलग प्रकृति की हैं। दोनों स्थानों पर काम करने से उन्हें कानून-व्यवस्था, राजस्व, विकास योजनाओं और जन शिकायतों से जुड़े मामलों का व्यापक अनुभव मिला।

जिलाधिकारी के रूप में काम करने का अनुभव किसी भी अधिकारी के प्रशासनिक करियर में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस पद पर विकास, कानून-व्यवस्था और जनसुनवाई सहित प्रशासन के विभिन्न पहलुओं की जिम्मेदारी होती है।

GDA उपाध्यक्ष के रूप में मिला शहरी विकास का अनुभव

कृष्णा करुणेश के प्रशासनिक सफर का एक अहम पड़ाव गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष के रूप में रहा। विकास प्राधिकरण में काम करते हुए उन्हें शहरी नियोजन, भूमि प्रबंधन, आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं, विकास योजनाओं तथा प्राधिकरण की प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिला। नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी को देखते हुए यह अनुभव खास तौर पर महत्वपूर्ण है। नोएडा में भी भूमि, आवास, औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचा और शहर के रखरखाव से जुड़े मामलों का दायरा काफी बड़ा है।

गोरखपुर के जिलाधिकारी के रूप में मिली बड़ी पहचान

कृष्णा करुणेश के प्रशासनिक करियर का सबसे चर्चित दौर गोरखपुर के जिलाधिकारी के रूप में रहा। उन्होंने जून 2022 से जुलाई 2025 तक गोरखपुर में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र होने के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है। उनके कार्यकाल में शहर के विकास, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई योजनाएं चर्चा में रहीं।

उनके कार्यकाल के दौरान रामगढ़ ताल के विकास और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम आगे बढ़ा। रामगढ़ ताल को शहर के प्रमुख पर्यटन और सार्वजनिक गतिविधि केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया में कई नए प्रयोग किए गए।

रामगढ़ ताल के विकास से बनी अलग पहचान

गोरखपुर में रामगढ़ ताल के आसपास पर्यटन सुविधाओं और गतिविधियों के विस्तार ने शहर को नई पहचान देने में भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के दौरान फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, होटल परियोजनाओं और क्रूज जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख सामने आया। हालांकि कृष्णा करुणेश ने इन उपलब्धियों को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय प्रशासन, विभागों और स्थानीय स्तर पर किए गए सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया था। गोरखपुर में उनके कार्यकाल की चर्चा का एक कारण यह भी रहा कि शहर के विकास को पर्यटन और सार्वजनिक सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।

गोरखपुर से नोएडा कैसे पहुंचे?

जुलाई 2025 में कृष्णा करुणेश को गोरखपुर के जिलाधिकारी पद से हटाकर नोएडा प्राधिकरण का ACEO बनाया गया। यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि नोएडा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में शामिल है। यहां प्रशासनिक चुनौतियां पारंपरिक जिला प्रशासन से अलग हैं। ACEO के रूप में कुछ महीने काम करने के बाद जनवरी 2026 में उन्हें नोएडा प्राधिकरण के CEO की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

नोएडा में सामने हैं कई बड़ी चुनौतियां

नोएडा की कमान संभालने के बाद कृष्णा करुणेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नई परियोजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि पहले से विकसित शहर के रखरखाव और लंबित समस्याओं का समाधान करना है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में जलभराव, ड्रेनेज, सीवर, सड़क, यातायात, सफाई, पार्कों की स्थिति और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दे लगातार सामने आते रहे हैं। इसके अलावा बिल्डर-बायर्स विवाद, किसानों के आबादी और भूमि संबंधी मामले, औद्योगिक इकाइयों से जुड़े विषय और आरडब्ल्यूए की शिकायतें भी नोएडा प्राधिकरण के सामने रहती हैं।

जनसुनवाई और सीधे संवाद पर जोर

नोएडा में कृष्णा करुणेश की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू जनसुनवाई और नागरिकों से सीधे संवाद को माना जा रहा है। नोएडा जैसे शहर में आरडब्ल्यूए, अपार्टमेंट ओनर्स, बिल्डर, किसान, व्यापारी और औद्योगिक संगठन अलग-अलग तरह की समस्याएं प्राधिकरण के सामने रखते हैं। ऐसे में केवल कार्यालयी स्तर पर शिकायतों का निस्तारण पर्याप्त नहीं होता। IAS कृष्णा करुणेश की प्रशासनिक शैली में मौके पर समस्याओं को समझने और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समाधान तलाशने पर जोर दिखाई देता है। नियमित जनसुनवाई के माध्यम से नागरिकों की समस्याएं सुनना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

प्रशासनिक अनुभव बना सबसे बड़ा पक्ष

कृष्णा करुणेश की अब तक की प्रशासनिक यात्रा को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में देखा जा सकता है।

पहला—जिला प्रशासन: हापुड़, बलरामपुर और गोरखपुर जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम करने का अनुभव।

दूसरा—विकास प्रशासन: गाजियाबाद में मुख्य विकास अधिकारी सहित विकास से जुड़े विभिन्न पदों पर काम करने का अनुभव।

तीसरा—शहरी विकास प्राधिकरण: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और नोएडा प्राधिकरण में ACEO तथा अब CEO के रूप में शहरी प्रशासन का अनुभव। यही तीनों अनुभव उन्हें नोएडा की वर्तमान जिम्मेदारी के लिए अलग प्रोफाइल देते हैं।

अब असली परीक्षा नोएडा में

गोरखपुर में विकास और पर्यटन परियोजनाओं के अनुभव के बाद नोएडा में कृष्णा करुणेश की सबसे बड़ी परीक्षा शहर की रोजमर्रा की समस्याओं के स्थायी समाधान को लेकर होगी। नोएडा पहले से विकसित शहर है, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी और नए सेक्टरों के विकास के कारण प्राधिकरण के सामने लगातार नई चुनौतियां आती रहती हैं। यहां सड़क बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसका समय पर रखरखाव है। इसी तरह ड्रेनेज, सीवर, जलभराव और यातायात की समस्याओं के स्थायी समाधान की अपेक्षा भी नागरिकों की है।

इसके साथ ही किसानों, आरडब्ल्यूए और बिल्डर-बायर्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान भी प्राधिकरण की प्राथमिकताओं में रहेगा।

जनता की उम्मीदें बढ़ीं

कृष्णा करुणेश की प्रशासनिक यात्रा उन्हें ऐसे अधिकारी के रूप में स्थापित करती है, जिनके पास जिला प्रशासन से लेकर बड़े शहरी विकास प्राधिकरण तक काम करने का अनुभव है। गोरखपुर से नोएडा तक का सफर पूरा करने के बाद अब उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और शहरी केंद्रों में शामिल नोएडा को बेहतर तरीके से संचालित करना है।

जनता, आरडब्ल्यूए, किसान, उद्योग जगत और बिल्डर-बायर्स की निगाहें अब इस बात पर हैं कि वह अपने प्रशासनिक अनुभव को नोएडा की जमीनी समस्याओं के समाधान में किस तरह इस्तेमाल करते हैं। आने वाले महीनों में उनके फैसले और प्राधिकरण की कार्यशैली यह तय करेगी कि कृष्णा करुणेश का कार्यकाल नोएडा के प्रशासनिक इतिहास में एक सामान्य नियुक्ति के रूप में दर्ज होता है या फिर शहर की बुनियादी सुविधाओं, जनसुनवाई और जवाबदेही के क्षेत्र में एक नए बदलाव की शुरुआत के रूप में।