ग्रेटर नोएडा, इंडिया एक्सपो सेंटर | विशेष रिपोर्ट - रफ्तार टुडे


रचनात्मकता का उत्सव, परंपरा का सम्मान

ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित 19वें इंडियन फैशन जूलरी एंड एक्सेसरीज शो (IIFJAS 2025) ने देश और विदेश के सैकड़ों डिज़ाइनर्स, कारीगरों और खरीदारों को एक साथ एक मंच पर ला दिया। यह आयोजन सिर्फ एक व्यापारिक मेला नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विविधता और नवाचार का उत्सव बनकर सामने आया।

इस भव्य मेले के दूसरे दिन का माहौल तो मानो कला, रंग और नवाचार की जादुई दुनिया में ले गया। रैंप पर उतरी डिज़ाइनर्स की कल्पनाएं, पारंपरिक हस्तकला की आधुनिक व्याख्या, और सस्टेनेबिलिटी की झलक—सब कुछ इतना अभिभूत कर देने वाला था कि दर्शक देर तक तालियाँ बजाते रहे।


सम्मान और पुरस्कारों से बढ़ा आत्मविश्वास

दूसरे दिन की विशेष बात यह रही कि बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया, जिससे उन्हें न केवल मंच पर पहचान मिली बल्कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा संपर्क स्थापित करने का अवसर भी मिला। यह मंच भारतीय कारीगरों और डिज़ाइनर्स के लिए एक प्रेरणा और आत्मविश्वास का स्रोत बनता जा रहा है।


उच्चस्तरीय उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा

इस समारोह की मुख्य अतिथि थीं एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव, सुश्री मर्सी एपाओ, जिन्होंने भारत के शिल्प क्षेत्र की वैश्विक क्षमता और युवाओं के डिज़ाइनिंग क्षेत्र में बढ़ते योगदान की सराहना की।

उनके साथ मंच साझा किया:

  • ईपीसीएच के महानिदेशक श्री नीरज खन्ना
  • आईईएमएल अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार
  • आईएफजेएएस अध्यक्ष श्री जेपी सिंह
  • ईपीसीएच उपाध्यक्ष श्री मोहम्मद रईस

इन सभी ने भारत के हस्तशिल्प उद्योग की दिशा, चुनौतियाँ और वैश्विक संभावनाओं पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

IIFJAS 2025 जब शिल्प, सौंदर्य और सततता मिले एक मंच पर!, श्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ताओं को मिला सम्मान

200 से अधिक प्रदर्शनकारी: कारीगरी और सौंदर्य का अद्भुत संगम

IIFJAS 2025 में 200 से अधिक प्रदर्शनकर्ताओं ने अपने फैशन जूलरी और एक्सेसरीज को प्रदर्शित किया। इनमें पारंपरिक बिड वर्क, स्टोन जूलरी, लेदर ऐक्सेसरीज़, धातु शिल्प, फैब्रिक बैग्स, बांस व जूट से बने सामान आदि शामिल थे। हर स्टॉल पर रचनात्मकता की अलग झलक थी — भारत के विभिन्न हिस्सों से आए शिल्पकारों की विविधता और उनकी कला को देखने के लिए लोग कतारों में खड़े दिखे।


सस्टेनेबिलिटी की झलक: भविष्य की दिशा

इस वर्ष के शो में पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की विशेष उपस्थिति रही। विशेष रूप से बांस, जूट, कॉटन, रिसायकल डेनिम, हस्तनिर्मित कागज और पौधों के रेशों से बने उत्पादों ने हरित शिल्प की दिशा में एक प्रेरणादायक संदेश दिया।

ईपीसीएच उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा:

“यह शो केवल डिज़ाइनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक हरित भविष्य की दिशा में हमारे कदमों को दर्शाता है।”


अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की उत्साही भागीदारी

IIFJAS 2025 में कई अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की उपस्थिति दर्ज की गई। इनमें प्रमुख रूप से:

  • ?? स्पेन के गोंजालो प्लाजास डियाज़

“भारतीय उत्पादों की मौलिकता और गुणवत्ता अद्भुत है। हर बार यहाँ आना एक नया अनुभव देता है।”

  • ?? दक्षिण अफ्रीका की लिजेल ओल्कर्स

“यहाँ के डिज़ाइनों में संस्कृति, आत्मा और भविष्य तीनों की झलक मिलती है। कारीगरों की आत्मीयता इसे एक अलग अनुभव बना देती है।”


₹33,123 करोड़ का हस्तशिल्प निर्यात: 7.92% की वृद्धि

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आर.के. वर्मा ने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान भारत का हस्तशिल्प निर्यात ₹33,123 करोड़ (USD 3,918 मिलियन) तक पहुँचा, जिसमें से ₹6,252 करोड़ (USD 739 मिलियन) केवल फैशन जूलरी और एक्सेसरीज से प्राप्त हुआ — यानी 7.92% की वृद्धि (रुपये में)

“IIFJAS जैसे आयोजनों के माध्यम से हम भारतीय शिल्प को वैश्विक मंच प्रदान कर रहे हैं,” — आर.के. वर्मा


विरासत को समकालीनता से जोड़ता शो

ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा:

“IIFJAS ने परंपरा और आधुनिकता को जोड़ने का काम किया है। यहाँ वो डिज़ाइन भी दिखे जो पीढ़ियों से शिल्पकारों द्वारा संरक्षित हैं, लेकिन आज उन्हें फैशन की दुनिया में नई पहचान मिली है।”


संभावनाओं का संगम: रोजगार और उद्यमिता के लिए अवसर

IIFJAS न केवल कला का महाकुंभ है, बल्कि यह रोजगार, महिला उद्यमिता और स्थानीय हस्तशिल्प के ग्लोबल ब्रांडिंग का अवसर भी बन गया है। कई कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से अनुबंध भी मिले, जिससे उनके आर्थिक भविष्य को मजबूती मिलेगी।


नए डिजाइनर्स के लिए खुला मंच

इस शो में युवा डिज़ाइनर्स को भी खूब मौका मिला — कुछ ऐसे डिजाइनर्स जो अब तक केवल इंस्टाग्राम पेज या स्थानीय प्रदर्शनियों तक सीमित थे, उन्होंने IIFJAS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार कदम रखा और उनकी प्रतिभा की सराहना विदेशी खरीदारों से भी मिली।


भविष्य की दिशा: हर शिल्पकार के लिए वैश्विक मंच

इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र केवल परंपरा का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का मजबूत स्तंभ बन सकता है। यह न केवल कला को सम्मान देने का मंच है, बल्कि रोज़गार, निर्यात और नवाचार का भी केंद्र बन चुका है।


#IIFJAS2025 की कुछ झलकियाँ:

? रैंप शो में बांस जूलरी की प्रस्तुति
? स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, UAE से खरीदारों की उपस्थिति
? MSME मंत्रालय की शीर्ष उपस्थिति
? स्टार्टअप कारीगरों को इंटरनेशनल ऑर्डर


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रिपोर्ट: रफ्तार टुडे विशेष संवाददाता, ग्रेटर नोएडा
फोटो साभार: EPCH, IEML