ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वर्षों से अपने आशियाने का सपना देख रहे हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार की राहत नीति का लाभ लेने के बावजूद कई बिल्डर अपने अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखा सके हैं। अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ऐसे बिल्डरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। प्राधिकरण ने करीब 14 बिल्डर समूहों से लगभग 315 करोड़ रुपये की वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है और इसके लिए राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी करने की तैयारी चल रही है।
सालों से अधर में लटका हजारों परिवारों का घर का सपना
ग्रेटर नोएडा और नोएडा में हजारों परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर फ्लैट बुक कराए थे। कई खरीदारों ने बैंक ऋण लेकर किस्तें जमा कीं, लेकिन समय पर घर नहीं मिलने से वे दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ बैंक की ईएमआई और दूसरी तरफ किराए का बोझ, उनके लिए आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बना हुआ है। बताया जा रहा है कि इन 14 परियोजनाओं में करीब 8856 फ्लैट खरीदारों का भविष्य अभी भी अधर में लटका हुआ है। इनमें से कई परिवार वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचा था मामला
फ्लैट खरीदारों की समस्याएं लगातार बढ़ने के बाद यह मुद्दा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने फंसे हुए प्रोजेक्ट्स को गति देने के लिए विशेष राहत नीति लागू की थी। इस नीति का उद्देश्य था कि बिल्डरों को कुछ राहत देकर परियोजनाओं को दोबारा शुरू कराया जाए, ताकि खरीदारों को उनका घर मिल सके और रजिस्ट्रियां भी शुरू हो सकें। सरकार की इस पहल के बाद कई परियोजनाओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। अनेक प्रोजेक्ट्स में निर्माण कार्य आगे बढ़ा और हजारों खरीदारों को रजिस्ट्री का लाभ भी मिला। लेकिन कुछ बिल्डर ऐसे भी रहे, जिन पर अब प्राधिकरण की नजरें टेढ़ी हो गई हैं।
राहत का फायदा मिला, लेकिन प्रोजेक्ट नहीं बढ़े
जानकारी के अनुसार, कुछ बिल्डरों ने सरकार की राहत नीति का लाभ तो उठा लिया, लेकिन उसके अनुरूप न तो बकाया धनराशि जमा कराई और न ही परियोजनाओं में अपेक्षित गति दिखाई। कई परियोजनाओं में निर्माण कार्य लगभग ठप होने की स्थिति में है।
प्राधिकरण का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हजारों खरीदारों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। इसी को देखते हुए अब बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इन बिल्डर समूहों पर है प्राधिकरण की नजर
प्राधिकरण जिन परियोजनाओं के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, उनमें प्रमुख रूप से आइडियल रियल्टी, टाउनपार्क बिल्डकॉन, एसपीजे इंफ्राकॉन, एसडीएस इंफ्राटेक, इनटेलेक्ट प्रोजेक्ट्स, निवास प्रमोटर्स, बीएस बिल्डटेक, हेबे इंफ्रास्ट्रक्चर, न्यू टेक लॉ पलासिया, अर्थकॉन कंस्ट्रक्शन, विहान डेवलपर्स और धन्य प्रमोटर्स जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में लंबे समय से फ्लैट खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं और कई बार प्रदर्शन तथा शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं।
315 करोड़ रुपये की वसूली की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, इन बिल्डरों पर कुल लगभग 315 करोड़ रुपये का बकाया है। प्राधिकरण पहले भी कई बार नोटिस जारी कर चुका है और भुगतान के लिए समय दिया गया था। लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया न मिलने के बाद अब आरसी जारी करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
राजस्व वसूली प्रमाणपत्र जारी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर बकाया वसूली की कार्रवाई और तेज हो सकती है।
खरीदारों को उम्मीद, कार्रवाई से खुलेगा बंद रास्ता
फ्लैट खरीदारों का मानना है कि यदि बकाया वसूली और प्रशासनिक दबाव बढ़ता है, तो परियोजनाओं में दोबारा गति आ सकती है। कई खरीदार संगठनों का कहना है कि वर्षों से फंसे लोगों को राहत दिलाने के लिए समयबद्ध समाधान आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में विश्वास बहाल करने के लिए अधूरी परियोजनाओं को पूरा कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे न केवल खरीदारों को राहत मिलेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
ग्रेटर नोएडा में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अहम मोड़
ग्रेटर नोएडा देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में गिना जाता है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और नई आधारभूत परियोजनाओं के कारण यहां रियल एस्टेट सेक्टर में लगातार निवेश बढ़ रहा है। ऐसे में अधूरी परियोजनाओं का समाधान और खरीदारों को समय पर घर उपलब्ध कराना प्रशासन और बिल्डरों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 315 करोड़ रुपये की प्रस्तावित वसूली और आरसी की कार्रवाई के बाद इन रुकी हुई परियोजनाओं में कितनी तेजी आती है और 8856 परिवारों का अपने सपनों के घर का इंतजार आखिर कब खत्म होता है।

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