यूपी, रफ़्तार टुडे। भारतीय निशानेबाजी की दुनिया में जब भी महान खिलाड़ियों का जिक्र होगा, तो उसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाएगा। उत्तराखंड की धरती से निकलकर विश्व मंच पर भारत का परचम लहराने वाले जसपाल राणा केवल एक खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा और भारतीय शूटिंग के मजबूत स्तंभ के रूप में जाने जाते हैं। उनके जीवन का हर अध्याय संघर्ष, अनुशासन, उपलब्धियों और देशभक्ति की भावना से भरा रहा।

एक ऐसा परिवार, जहां निशानेबाजी विरासत बनी और देशभक्ति संस्कार
जसपाल राणा का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना पहले से मौजूद थी। उनके पिता नारायण सिंह राणा सेना में सेवा दे चुके थे और बाद में उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय रहते हुए खेल मंत्री भी बने। खेलों के प्रति उनका झुकाव और अनुशासन ही जसपाल राणा के शुरुआती प्रशिक्षण की नींव बना। बचपन में ही उन्होंने अपने पिता से शूटिंग की बारीकियां सीखीं और आगे चलकर भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल हो गए।

जसपाल राणा की तरह उनकी बहन सुषमा राणा भी एक बेहतरीन निशानेबाज रही

बहन सुषमा राणा ने भी बनाया अपना अलग मुकाम
जसपाल राणा की तरह उनकी बहन सुषमा राणा भी एक बेहतरीन निशानेबाज रही हैं। उन्होंने 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी साथी सरोजा कुमारी झूठू के साथ स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इसके अलावा वर्ष 2002 से 2003 तक 25 मीटर शूटिंग का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा। सुषमा राणा कई अवसरों पर कह चुकी हैं कि उनके बड़े भाई जसपाल राणा केवल भाई नहीं बल्कि उनके लिए गुरु, मार्गदर्शक और रोल मॉडल रहे। उन्होंने हमेशा अपने भाई से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया।

राजनीति और खेल का अनोखा संगम, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से है पारिवारिक रिश्ता
बहुत कम लोग जानते हैं कि सुषमा राणा देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के परिवार की बहू हैं। उनकी शादी वर्ष 2004 में नोएडा के विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता पंकज सिंह से हुई थी। पंकज सिंह उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और वर्तमान में नोएडा विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस तरह जसपाल राणा और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का रिश्ता पारिवारिक स्तर पर भी जुड़ा हुआ है। इस परिवार में खेल, राजनीति और समाजसेवा—तीनों क्षेत्रों की मजबूत विरासत देखने को मिलती है।

नोएडा के विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता पंकज सिंह से हुई थी। पंकज सिंह उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और वर्तमान में नोएडा विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं

भारत को दिलाए कई अंतरराष्ट्रीय पदक
जसपाल राणा ने अपने शानदार करियर में एशियन गेम्स, वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को स्वर्ण पदक दिलाए। उनकी उपलब्धियों ने न केवल भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दी, बल्कि युवाओं में शूटिंग खेल के प्रति आकर्षण भी बढ़ाया। उनकी गिनती उन खिलाड़ियों में होती है, जिन्होंने भारत में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बाद में कोच के रूप में भी उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को तैयार किया और देश को नई प्रतिभाएं दीं।

नई पीढ़ी के लिए बने प्रेरणा स्रोत
जसपाल राणा का मानना था कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और अनुशासन का भी आधार है। उन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान के जरिए सैकड़ों खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। यही कारण है कि भारतीय शूटिंग जगत में उन्हें एक खिलाड़ी से ज्यादा एक मार्गदर्शक और गुरु के रूप में देखा जाता है।

नोएडा के विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता पंकज सिंह से हुई थी। पंकज सिंह उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और वर्तमान में नोएडा विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं

राजनाथ सिंह ने जताई गहरी संवेदना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जसपाल राणा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें एक उत्कृष्ट खिलाड़ी, सफल कोच और बेहद सरल व्यक्तित्व का धनी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय खेल जगत में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और देश में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे महान खिलाड़ी का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

एक परिवार, जिसने खेल और राष्ट्रसेवा दोनों में बनाई पहचान
जसपाल राणा, उनकी बहन सुषमा राणा, पिता नारायण सिंह राणा और पंकज सिंह का परिवार इस बात का उदाहरण है कि खेल और सार्वजनिक जीवन एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यह परिवार देश के लिए पदक जीतने, समाज और राजनीति में योगदान देने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य लगातार करता रहा है। भारतीय खेल इतिहास में जसपाल राणा का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनकी उपलब्धियां और उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी आने वाले वर्षों में भी उनकी विरासत को आगे बढ़ाते रहेंगे।