ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश के सबसे आधुनिक और नियोजित शहरों में शुमार ग्रेटर नोएडा इन दिनों सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर संकट से जूझ रहा है। शहर के विभिन्न सेक्टरों में सफाई कर्मियों की हड़ताल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस बीटा-1 ऑफिसर्स कॉलोनी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी निवास करते हैं, उसी कॉलोनी के प्रवेश द्वार पर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं। सड़क किनारे फैली गंदगी, उठती दुर्गंध और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने स्थानीय लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है।
स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है। एक्टिव सिटीज़न टीम और आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि यदि अधिकारियों के घरों के सामने ही सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, तो शहर के अन्य सेक्टरों और गांवों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
तीन दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप
स्थानीय लोगों के अनुसार बीते तीन दिनों से बीटा-1 सेक्टर में नियमित सफाई नहीं हुई है। जगह-जगह घरेलू कचरा, प्लास्टिक, गीला कूड़ा और अन्य अपशिष्ट सड़क किनारे जमा हो गए हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण कूड़े से निकलने वाली दुर्गंध और भी अधिक फैल रही है। जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुबह-शाम टहलना मुश्किल हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर आवारा पशु भी कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते दिखाई दे रहे हैं, जिससे गंदगी और फैल रही है।
ऑफिसर्स कॉलोनी के बाहर गंदगी ने खड़े किए सवाल
निवासियों ने सवाल उठाया कि जिस स्थान के आसपास ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रहते हैं, वहीं यदि सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है तो आम जनता की शिकायतों का समाधान किस प्रकार हो रहा होगा। लोगों का कहना है कि शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने का दावा करने वाला प्राधिकरण इस समय अपनी ही कॉलोनी के बाहर फैले कूड़े को हटाने में असफल दिखाई दे रहा है।
एक्टिव सिटीज़न टीम ने प्रशासन पर साधा निशाना
एक्टिव सिटीज़न टीम के सदस्य एवं आरडब्ल्यूए महासचिव हरेन्द्र भाटी ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों की हड़ताल अपने आप में एक गंभीर विषय है और सबसे पहले उनकी समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी हड़ताल पर हैं तो इसका सीधा असर लाखों नागरिकों पर पड़ रहा है। प्रशासन को केवल कार्यालयों में बैठकर आदेश जारी करने के बजाय मौके पर जाकर हालात का जायजा लेना चाहिए।
हरेन्द्र भाटी ने कहा कि यदि अधिकारियों के घरों के बाहर ही गंदगी का अंबार लगा है तो दूर-दराज के सेक्टरों और गांवों की स्थिति और भी अधिक खराब हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

हड़ताल का समाधान निकालने की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए सबसे पहले सफाई कर्मियों की समस्याओं का समाधान किया जाए। यदि मजदूरों की मांगें लंबित हैं तो संबंधित अधिकारियों को उनके साथ बातचीत कर जल्द समाधान निकालना चाहिए। नागरिकों का मानना है कि शहर की स्वच्छता केवल मशीनों से नहीं बल्कि सफाई कर्मचारियों की मेहनत से संभव होती है। इसलिए उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना भी उतना ही आवश्यक है।
स्वास्थ्य संकट बनने लगा है मामला
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक खुले में पड़ा कचरा संक्रमण फैलाने का बड़ा कारण बन सकता है। बारिश के मौसम में कूड़े के ढेरों पर मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यदि जल्द सफाई नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
तीन प्रमुख मांगें रखीं
एक्टिव सिटीज़न टीम और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
सफाई कर्मियों की हड़ताल का तत्काल समाधान कर नियमित सफाई शुरू कराई जाए।
बीटा-1 सहित पूरे ग्रेटर नोएडा में युद्धस्तर पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
48 घंटे का अल्टीमेटम
स्थानीय नागरिकों और एक्टिव सिटीज़न टीम ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटे के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो शहर के विभिन्न सेक्टरों की बदहाल सफाई व्यवस्था की तस्वीरें सार्वजनिक की जाएंगी और व्यापक स्तर पर जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। नागरिकों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा जैसे आधुनिक शहर की पहचान उसकी स्वच्छता, सुव्यवस्थित व्यवस्था और बेहतर नागरिक सुविधाओं से है। यदि सफाई व्यवस्था लंबे समय तक बाधित रही तो यह न केवल शहर की छवि को प्रभावित करेगी, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।

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