जेवर/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को और तेज करने की दिशा में एक बड़ी सड़क परियोजना सामने आई है। नोएडा प्राधिकरण को शहर की प्रस्तावित सबसे ऊंची एलिवेटेड रोड की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) मिल गई है। आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार की गई डीपीआर के मुताबिक करीब 2 किलोमीटर लंबी और लगभग 20 मीटर ऊंची इस एलिवेटेड रोड के निर्माण पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।छह लेन वाली यह एलिवेटेड रोड मौजूदा चिल्ला एलिवेटेड रोड के विस्तार के तौर पर विकसित करने की योजना है। परियोजना पूरी होने के बाद नोएडा के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक दबाव कम करने के साथ जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

चिल्ला एलिवेटेड रोड का होगा विस्तार

प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को मौजूदा चिल्ला एलिवेटेड रोड से जोड़ने की योजना है। छह लेन की यह सड़क नोएडा के व्यस्त हिस्सों में यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। इस परियोजना की खासियत इसकी ऊंचाई भी होगी। करीब 20 मीटर ऊंची एलिवेटेड रोड नोएडा के प्रमुख परिवहन कॉरिडोर में शामिल हो सकती है। सड़क को इस तरह डिजाइन करने की योजना है कि नीचे चलने वाले यातायात और अन्य परिवहन ढांचे पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े।

मैजेंटा मेट्रो लाइन के ऊपर से गुजरेगी सड़क

प्रस्तावित परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका रूट है। यह एलिवेटेड रोड मैजेंटा मेट्रो लाइन के ऊपर से गुजरेगी। इसके बाद सड़क सेक्टर-94 के आसपास यमुना तटबंध की ओर उतरेगी। इस रूट को तैयार करने में इंजीनियरिंग की दृष्टि से कई चुनौतियां भी होंगी, क्योंकि एलिवेटेड रोड को मौजूदा सड़क नेटवर्क, मेट्रो कॉरिडोर और यमुना तटबंध से जोड़ना होगा। आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार डीपीआर में इन तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

करीब 350 करोड़ रुपये आएगी लागत

प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण पर लगभग 350 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। करीब दो किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत मुख्य रूप से एलिवेटेड स्ट्रक्चर, छह लेन की सड़क, संबंधित कनेक्टिविटी और अन्य जरूरी सिविल व इंजीनियरिंग कार्यों पर आएगी।

नोएडा प्राधिकरण के पास डीपीआर पहुंचने के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाने हैं। निर्माण शुरू होने से पहले परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच और स्वीकृतियां भी जरूरी होंगी।

जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के लिए अहम परियोजना

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के शुरू होने और आने वाले वर्षों में यहां यात्रियों तथा उड़ानों की संख्या बढ़ने की संभावना के बीच नोएडा से एयरपोर्ट तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। दिल्ली और नोएडा से जेवर एयरपोर्ट की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए सड़क नेटवर्क पर भविष्य में यातायात का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में इस तरह की एलिवेटेड रोड परियोजनाओं को भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नोएडा के ट्रैफिक को भी मिलेगी राहत

परियोजना का उद्देश्य सिर्फ एयरपोर्ट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। नोएडा में लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए एलिवेटेड रोड का एक प्रमुख लक्ष्य मौजूदा सड़क नेटवर्क को राहत देना भी है। छह लेन की एलिवेटेड रोड बनने के बाद यातायात के लिए एक अतिरिक्त कॉरिडोर उपलब्ध होगा। इससे प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

अब आगे क्या?

डीपीआर मिलने के बाद परियोजना को अमलीजामा पहनाने की दिशा में अगला चरण तकनीकी परीक्षण, प्रशासनिक स्वीकृतियां और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े फैसलों का होगा। परियोजना की वास्तविक समयसीमा निर्माण एजेंसी के चयन और आवश्यक मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल करीब 2 किलोमीटर लंबी, 20 मीटर ऊंची और छह लेन वाली इस प्रस्तावित एलिवेटेड रोड ने नोएडा के भविष्य के ट्रैफिक प्लान को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। यदि योजना निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती है तो यह नोएडा, दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल हो सकती है।