ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे। विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सियासत में अभी से हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। भाजपा की संभावित प्रत्याशी के तौर पर चर्चा में चल रहीं कुशल सिंह के समर्थन में निकले एक बड़े काफिले को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। सैनी चौराहे से निकले इस काफिले के दौरान यातायात प्रभावित होने और लंबा जाम लगने की शिकायतें सामने आई हैं। समर्थक जहां इस काफिले को कुशल सिंह की बढ़ती लोकप्रियता और मजबूत राजनीतिक दावेदारी के तौर पर देख रहे हैं, वहीं विरोधियों ने जाम और आम लोगों को हुई परेशानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

काफिले को समर्थकों ने बताया ‘दावेदारी की कुशलता’

कुशल सिंह के समर्थकों की ओर से काफिले को उनकी राजनीतिक ताकत और क्षेत्र में बढ़ते जनसमर्थन के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों का उनके साथ जुड़ना आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी सक्रियता और मजबूत दावेदारी का संकेत है।नवहीं दूसरी तरफ विरोधी खेमे ने इसी भीड़ को लेकर अलग सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के दौरान यदि आम जनता को यातायात जाम और असुविधा का सामना करना पड़े तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सैनी चौराहे पर लगा लंबा जाम, राहगीर परेशान

काफिले के दौरान सैनी चौराहे और आसपास के मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की बात कही जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और पोस्ट में जाम की स्थिति को लेकर लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। एक स्थानीय नागरिक ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि संभावित प्रत्याशी के कार्यक्रम के कारण ही बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, तो भविष्य में विधायक बनने के बाद आम जनता की समस्याओं को लेकर उनका रवैया कैसा होगा, यह सवाल उठता है।

नागरिक ने भाजपा के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से भी अपील करते हुए कहा कि पार्टी को टिकट देने से पहले आम जनता को होने वाली परेशानी और प्रत्याशी की कार्यशैली जैसे पहलुओं पर भी विचार करना चाहिए। हालांकि, यह संबंधित नागरिक की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है। इसे पार्टी या किसी आधिकारिक संस्था की राय नहीं माना जा सकता।

https://twitter.com/raftartoday/status/2096614658337865877
रफ़्तार टूडे का ट्विटर अकाउंट

सोशल मीडिया पर FIR को लेकर भी बहस

कुशल सिंह को लेकर सोशल मीडिया पर एक अन्य मुद्दा भी चर्चा में है। फेसबुक पर वायरल हो रही कुछ पोस्ट में उनके और उनके पति के खिलाफ FIR दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। इन पोस्ट के आधार पर कुछ लोग उनकी संभावित उम्मीदवारी पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि यदि उनके खिलाफ मामला दर्ज है तो पार्टी उन्हें टिकट देने पर विचार कैसे कर सकती है। हालांकि, किसी FIR में नाम होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस रिकॉर्ड, FIR की वास्तविक धाराओं और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है। सोशल मीडिया पर चल रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उन्हें तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

‘गरीब आपके स्कूलों में पढ़ नहीं सकते’ वाली पोस्ट भी चर्चा में

इसी बीच सोशल मीडिया पर कुशल सिंह से जुड़ी एक अन्य पोस्ट भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। एक पत्रकार द्वारा लिखी गई पोस्ट में उनके सामाजिक सेवा के दावों को लेकर सवाल उठाया गया है। वायरल पोस्ट में कथित तौर पर लिखा गया है कि यदि समाजसेवा करनी है तो अपने स्कूलों की फीस कम करने से मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत दी जा सकती है। पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि गरीब परिवारों के बच्चे यदि इन स्कूलों में पढ़ ही नहीं सकते तो केवल स्कूल चलाना किस तरह व्यापक सामाजिक सेवा माना जा सकता है।

इस पोस्ट को लेकर भी सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि पोस्ट में लगाए गए आरोप और टिप्पणी लेखक के विचार हैं, उनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

टिकट की दौड़ में बढ़ती राजनीतिक गर्मी

ग्रेटर नोएडा वेस्ट और बिसरख क्षेत्र में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर संभावित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा लगातार बढ़ रही है। भाजपा के टिकट को लेकर कई दावेदार सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में नेताओं के कार्यक्रम, जनसंपर्क अभियान और सोशल मीडिया गतिविधियां भी राजनीतिक दावेदारी के संकेत के तौर पर देखी जा रही हैं। कुशल सिंह के समर्थन में निकले काफिले ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। समर्थक इसे शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं, जबकि विरोधी इसे आम नागरिकों की परेशानी से जोड़कर निशाना साध रहे हैं।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

फिलहाल भाजपा की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव के लिए किसी आधिकारिक प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए कुशल सिंह को संभावित प्रत्याशी कहना अभी राजनीतिक चर्चा तक ही सीमित है। अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व द्वारा टिकट वितरण के समय किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों और समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन के बीच कुशल सिंह की दावेदारी पार्टी नेतृत्व के सामने कितनी मजबूत साबित होती है और 2027 के चुनावी मैदान में भाजपा किस चेहरे पर भरोसा जताती है।