ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को ‘पेयरिंग नीति’ के तहत बंद करने और शिक्षकों को सरप्लस घोषित करने के फैसले ने प्रदेशभर के शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। ग्रेटर नोएडा में इस नीति के विरोध में शिक्षक संघों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। विरोध की शुरुआत अब जमीनी आंदोलन का रूप लेती जा रही है।


क्या है विवाद की जड़?

प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार—

  • जिन प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 100 से कम है,
  • और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 150 से कम है,

उन्हें या तो अन्य विद्यालयों में मर्ज किया जाएगा, या फिर उन्हें प्रधानाध्यापक विहीन कर दिया जाएगा। साथ ही वहां तैनात शिक्षकों को सरप्लस घोषित कर स्थानांतरित किया जाएगा। इस निर्णय से हजारों स्कूलों पर बंद होने का संकट मंडरा रहा है, वहीं हजारों शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और रसोइयों की नौकरी पर भी तलवार लटक रही है।


विरोध की आवाज़: शिक्षकों और समाजसेवियों का आक्रोश

इस नीतिगत निर्णय के खिलाफ आज ग्रेटर नोएडा में शिक्षक संगठनों और समाज के प्रबुद्धजनों ने मिलकर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा और मुख्यमंत्री तक संस्तुति भेजने की मांग की। इस विरोध कार्यक्रम का नेतृत्व किया—

  • मंडल अध्यक्ष मेघराज भाटी
  • जिला अध्यक्ष प्रवीण शर्मा
  • जिला मंत्री गजन भाटी
  • ब्लॉक अध्यक्ष रवि भाटी

इनके साथ दादरी विधायक तेजपाल नागर, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह, विधान परिषद सदस्य श्रीचंद्र शर्मा, और अन्य प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा गया।

स्कूल बंदी का विरोध बना शिक्षकों का आंदोलन

क्या बोले शिक्षक नेता?

? मेघराज भाटी (मंडल अध्यक्ष)

"विद्यालयों को बंद कर नौनिहालों से शिक्षा छीनना लोकतंत्र और संवेदनशील शासन की भावना के विपरीत है। शिक्षकों को सरप्लस कर देना सिर्फ एक आंकड़ों का खेल है, जो जमीन पर बच्चों की असलियत को नहीं दर्शाता।"

? प्रवीण शर्मा (जिला अध्यक्ष)

"यह फैसला उन गरीब और ग्रामीण बच्चों के खिलाफ है, जो स्कूलों से दूर नहीं जा सकते। क्या सरकार यह नहीं देख रही कि स्कूल बंद होंगे तो ये बच्चे कहाँ पढ़ेंगे?"

? गजन भाटी (जिला मंत्री)

"हमने जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर मांग की है कि इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए। आने वाली 8 जुलाई को पूरे प्रदेश में विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा।"


आगामी आंदोलन की रूपरेखा

शिक्षक संघों ने ऐलान किया है कि यदि सरकार ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया तो—

  • 8 जुलाई को सभी जनपदों में धरना प्रदर्शन होगा
  • शिक्षकों की राजधानी मार्च की भी योजना बनाई जा रही है
  • जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा

क्या है पेयरिंग पॉलिसी?

सरकार का उद्देश्य स्कूलों का समेकन कर संसाधनों की बचत और गुणवत्ता में सुधार करना है। लेकिन शिक्षक संगठनों का तर्क है कि—

  • इससे छात्रों की संख्या और पहुँच दोनों प्रभावित होंगी
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की दूरी बढ़ेगी
  • खासकर बालिकाओं की शिक्षा पर बुरा असर पड़ेगा
  • शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का मनोबल टूटेगा

विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे

इस ज्ञापन सौंपने व विरोध आयोजन में भाग लेने वालों में शामिल रहे—

? सतीश पीलवान, ब्लेराम नागर, हेमराज शर्मा, सतीश नागर, समरेश रावल, कुलदीप नागर, जगवीर शर्मा, मुकेश पाल, विनोद ठाकुर, रेनू वर्मा, मनीषा सिंह, राखी रानी, अरविंद शर्मा, शौकत अली, चेतराम, दानवीर शर्मा, और अन्य सैकड़ों शिक्षकगण।


निष्कर्ष: शिक्षा नहीं, तो विकास कैसे?

उत्तर प्रदेश सरकार की ये नीति प्रशासनिक दृष्टिकोण से उचित लग सकती है, लेकिन इसकी भूमिगत सामाजिक और शैक्षणिक प्रभावों की अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि गांव-गांव के स्कूल बंद हो गए, तो डिजिटल इंडिया और साक्षर भारत जैसे सपनों की नींव डगमगाने लगेगी।

अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस विषय पर शिक्षकों और समाज की आवाज़ को सुनते हैं या नहीं?


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✍️ रिपोर्ट: रफ्तार टुडे संवाददाता, ग्रेटर नोएडा