मुंबई, रफ़्तार टुडे। शारदा विश्वविद्यालय के छात्रों ने एग्रो स्पेक्ट्रम टेक्नोवेट प्रतियोगिता 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार जीतकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। सिडको कन्वेंशन सेंटर, मुंबई में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर के कई विश्वविद्यालयों की टीमों ने भाग लिया था। इस दौरान आधुनिक कृषि तकनीक, इनोवेशन और टिकाऊ खेती पर आधारित कई प्रोजेक्ट्स पेश किए गए।

प्रतियोगिता में हुआ जबरदस्त मुकाबला, 30 टीमों ने किया फाइनल राउंड के लिए क्वालिफाई

इस प्रतियोगिता में सैकड़ों छात्रों, शोधकर्ताओं और कृषि उद्योग से जुड़े पेशेवरों ने भाग लिया। कड़े मुकाबले के बाद 30 सर्वश्रेष्ठ टीमों को अंतिम दौर के लिए चुना गया, जहां शारदा यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अपनी अभिनव सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से निर्णायकों को प्रभावित किया और दो महत्वपूर्ण श्रेणियों में प्रथम स्थान हासिल किया।

‘ईवी क्रॉप क्रूज’ ने जीता सबसे स्केलेबल आइडिया अवार्ड

कृषिधारा टीम ने अपने ईवी क्रॉप क्रूज प्रोजेक्ट के लिए ‘सबसे स्केलेबल आइडिया पुरस्कार’ जीता। इस टीम में तनिष्क अस्त्य, सुमित प्रजापति और अखिल प्रताप सिंह शामिल थे, जिन्होंने डॉ. केशव गुप्ता के मार्गदर्शन में इस अनूठे प्रोजेक्ट पर काम किया।

ईवी क्रॉप क्रूज एक सौर ऊर्जा से संचालित इलेक्ट्रिक वाहन है, जो कीटनाशक छिड़काव, बीज बोने और जुताई जैसी कृषि गतिविधियों को आसान और कुशल बनाता है। मॉड्यूलर डिज़ाइन की वजह से यह किसानों के लिए एक टिकाऊ और कम लागत वाला समाधान साबित हो सकता है, जिससे पारंपरिक खेती में क्रांतिकारी बदलाव लाने की उम्मीद है।

एआई और रोबोटिक्स से फसल रोगों का पता लगाने वाली तकनीक को मिला ‘बेस्ट ओवरऑल कॉन्सेप्ट अवार्ड’

शारदा विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान और अनुप्रयोग विभाग की टीम "एग्रीकल्चर" ने अपनी अत्याधुनिक परियोजना के लिए ‘बेस्ट ओवरऑल कॉन्सेप्ट पुरस्कार’ जीता। इस टीम का नेतृत्व मनप्रीत पाबला ने किया, जिसमें माज़ एजाज और उमेश देवड़ा भी शामिल थे।

शारदा यूनिवर्सिटी के छात्रों ने मुंबई में आयोजित एग्रो स्पेक्ट्रम टेक्नोवेट प्रतियोगिता में मारी बाजी

इन छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और रोबोटिक्स का उपयोग कर फसल रोगों का पता लगाने और प्रबंधन करने की एक उन्नत तकनीक विकसित की है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

  • यह प्रणाली ड्रोन और एआई-संचालित रोबोट को एकीकृत करती है।
  • सटीक फसल निगरानी, स्वचालित सिंचाई और समय पर रोग प्रबंधन की सुविधा प्रदान करती है।
  • इससे किसानों को फसल के नुकसान से बचाने और बेहतर उपज सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

स्टार्टअप इनक्यूबेटर्स और निवेशकों की नज़र इन परियोजनाओं पर

इस प्रतियोगिता के दौरान शारदा विश्वविद्यालय के छात्रों को विभिन्न स्टार्टअप इनक्यूबेटरों, कृषि कंपनियों और निवेशकों से कई मेंटरशिप ऑफर्स मिले। इससे इन परियोजनाओं के व्यावसायीकरण और बड़े स्तर पर क्रियान्वयन की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

शारदा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने दी छात्रों को बधाई

शारदा विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. सिबाराम ने इन उपलब्धियों पर छात्रों को बधाई दी और कहा,

*"हमारे छात्रों ने नवाचार और उत्कृष्टता की संस्कृति को अपनाया है। इन पुरस्कारों के पीछे हमारे प्रोफेसरों और प्रबंधन का मार्गदर्शन और प्रेरणा भी है। यह उपलब्धि साबित करती है कि हमारा विश्वविद्यालय न केवल *गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देता है, बल्कि छात्रों को उद्योग से जोड़ने और वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने के लिए भी प्रेरित करता है।"

शारदा यूनिवर्सिटी के इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स बदल सकते हैं भारतीय कृषि का भविष्य

इन पुरस्कार विजेता परियोजनाओं के कारण भारतीय कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

  • ईवी क्रॉप क्रूज खेती को सौर ऊर्जा आधारित स्मार्ट तकनीक से जोड़कर कम लागत, अधिक उत्पादन और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देगा।
  • एआई और रोबोटिक्स आधारित फसल रोग प्रबंधन प्रणाली से बीमारियों का जल्दी पता लगाकर उपज बढ़ाई जा सकेगी और किसानों की आय में सुधार होगा।

इस तरह के नवाचार भारत को ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ की दिशा में आगे ले जाने में मदद करेंगे, जिससे खेती अधिक कुशल, स्वचालित और प्रौद्योगिकी-संचालित बन सकेगी।


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