नई दिल्ली10 घंटे पहले
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प्रदूषण के कारण लोग गले में खराश, आंखों में जलन, सांस में तकलीफ सहित अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे और हाल ही में कोरोना से ठीक हुए गंभीर मरीजों की दिक्कतें बढ़ी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि हर साल दिवाली और सर्दियों के समय उत्तरी भारत में पराली जलाने, पटाखों, दूसरी वजहों से दिल्ली और पूरे इंडो गैंजेटिक बेल्ट में स्मॉग होता है और कई दिनों तक विजिबिलिटी बहुत खराब रहती है।
इसका सांस के स्वास्थ्य पर बहुत असर होता है। उन्होंने कहा कि हमने एक अध्ययन किया उसमें हमने देखा कि जब भी प्रदूषण का स्तर ज़्यादा होता है तो उसके कुछ दिन बाद बच्चों और व्यस्कों में सांस की समस्या की इमरजेंसी विजिट बढ़ जाती हैं। ये तय है कि प्रदूषण से सांस की समस्या बढ़ जाती है। वहीं एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि शुक्रवार को सफदरजंग, एम्स, आरएमएल सहित अन्य अस्पतालों में हार्ट, लंग्स सहित अन्य से जुड़े हुए मरीजों की संख्या बढ़ गई।
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