गेट नंबर-3 के पास आनंद स्वरूप जी और शारदा माता जी की मूर्तियों का हुआ अनावरण; विद्यार्थियों को मजबूत सोच, अनुशासन और संतुलित जीवन का संदेश
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में श्री बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ ‘माइंड सेट-लाइफ सेट’ विषय पर विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जीवन में सकारात्मक सोच, अनुशासन, मानवीय मूल्यों और संतुलन के महत्व पर विचार साझा किए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-3 के पास स्वर्गीय श्री आनंद स्वरूप जी और स्वर्गीय श्रीमती शारदा माता जी की मूर्तियों के अनावरण के साथ हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, चिकित्सक, स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
शारदा यूनिवर्सिटी की विरासत और मूल्यों को किया याद
सभा को संबोधित करते हुए शारदा यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री पी.के. गुप्ता ने स्वर्गीय श्री आनंद स्वरूप जी और स्वर्गीय श्रीमती शारदा माता जी की मूर्तियों के अनावरण को विश्वविद्यालय परिवार के लिए सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उनके विचार और मूल्य शारदा यूनिवर्सिटी के उस उद्देश्य का मार्गदर्शन करते हैं, जिसके तहत ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करने का प्रयास किया जाता है जो केवल शिक्षा के क्षेत्र में दक्ष न हों, बल्कि उनमें करुणा, अनुशासन और समाज सेवा की भावना भी विकसित हो। चांसलर ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का स्वागत करते हुए युवा पीढ़ी के लिए उनके द्वारा साझा किए जाने वाले जीवन मूल्यों और शिक्षाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
‘माइंड सेट-लाइफ सेट’ में सोच और कर्म के संबंध पर जोर
कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य देते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यह सत्र केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन जीने की समझ से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की सोच उसके कार्यों की दिशा निर्धारित करती है और वही कार्य उसके भविष्य के निर्माण में भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि मजबूत सोच और संतुलित जीवन सफलता की महत्वपूर्ण नींव हैं। जब व्यक्ति के कार्य सही मूल्यों से प्रेरित होते हैं और अनुशासन उसकी जीवन-यात्रा का हिस्सा बनता है, तो वह जीवन में बेहतर तालमेल, समृद्धि और आंतरिक शक्ति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने विचारों और कर्मों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा जीवन में सकारात्मक मूल्यों को स्थान देने का संदेश दिया।

शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों पर भी ध्यान जरूरी
इस अवसर पर शारदा यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर श्री वाई.के. गुप्ता ने कहा कि शिक्षा का दायरा केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें मानवीय मूल्यों और व्यक्तित्व विकास को भी स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ आयोजित यह संवाद विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर देता है कि सर्वांगीण विकास के लिए मजबूत सोच और संतुलित जीवन कितना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि शारदा यूनिवर्सिटी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विद्यार्थी शिक्षा के साथ जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सामाजिक मूल्यों को भी आत्मसात कर सकें तथा भविष्य में जिम्मेदार वैश्विक नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें।

विद्यार्थियों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास पर जोर
कार्यक्रम के समापन पर डीन (छात्र कल्याण) डॉ. प्रमोद कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए इस तरह के संवाद और मार्गदर्शन सत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।।उन्होंने कहा कि अकादमिक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक सोच से जुड़े विषयों पर भी संवाद का अवसर मिलना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल रहा। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने विशेष संवाद में रुचि के साथ भाग लिया। कार्यक्रम में शारदा यूनिवर्सिटी के सभी विभागों के डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, डॉक्टर्स, स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय की विरासत और मूल्यों को स्मरण करते हुए युवा पीढ़ी को शिक्षा के साथ सकारात्मक सोच, अनुशासन, मानवीय संवेदनाओं और संतुलित जीवन के महत्व से जोड़ना रहा।

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