? रफ़्तार टुडे ब्यूरो | ग्रेटर नोएडा | 1 जून 2025

उत्तर प्रदेश का बहुचर्चित “न्यू नोएडा प्रोजेक्ट” अब किसी अनुमान, कागज़ी स्केच या लोकल सर्वे पर नहीं, बल्कि सैटेलाइट तकनीक की सटीक निगरानी पर आधारित होगा। जी हां! ग्रेटर नोएडा से लेकर दादरी और खुर्जा तक फैले इस 21वीं सदी के नए शहरी मॉडल की हर गली, हर ज़मीन का लेखा-जोखा अब अंतरिक्ष से होगा। नोएडा प्राधिकरण ने ऐलान किया है कि अब इस प्रोजेक्ट की मास्टर प्लानिंग और निगरानी के लिए इसरो (ISRO) से प्राप्त सेटेलाइट इमेजरी और जीआईएस (GIS) टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा।


एक नया शहर, जो आसमान से परखा जाएगा – बिना गड़बड़ी, बिना छिपाव

ग्रेटर नोएडा, दादरी और बुलंदशहर की सीमा से सटे 80 से ज्यादा गांवों को मिलाकर विकसित किए जा रहे ‘न्यू नोएडा’ में पहली बार ऐसा होगा कि कोई भी योजना धरती पर प्लॉटिंग से शुरू नहीं होगी। इसके बजाय, पूरे क्षेत्र की हाई-रेज़ोल्यूशन सैटेलाइट मैपिंग की जा रही है, जिससे पता चलेगा कि:

  • कौन-सा इलाका खाली है
  • कहां-कहां पहले से निर्माण हो चुका है
  • कौन-से गांव विकास के लिए उपयुक्त हैं
  • कौन-सी जमीन अवैध कब्जे में है
  • जलभराव, हरियाली, सड़कें और नालियों का क्या हाल है

यह सब डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक भी किया जाएगा, ताकि नागरिकों, निवेशकों और किसानों को पारदर्शिता का भरोसा हो।


बेसमैप से बनेगा भविष्य का मास्टर प्लान – डिजिटल आंख से देखेगा प्राधिकरण

नोएडा अथॉरिटी इस सैटेलाइट सर्वे के ज़रिए ‘डिजिटल बेसमैप’ तैयार करवा रही है। यह बेसमैप इतना सटीक होगा कि हर गली, हर खेत, हर तालाब, हर दीवार और हर पेड़ की डिजिटल पहचान होगी। इस नक्शे की खास बातें होंगी:

  • हर प्लॉट की लंबाई-चौड़ाई सैटेलाइट से मापी जाएगी
  • हर गांव का डिजिटल खाका होगा
  • अवैध निर्माण और अतिक्रमण अपने आप चिन्हित होंगे
  • सड़क, नाला, बिजली लाइन जैसी योजनाएं पहले से तय होंगी
  • ग्रीन जोन, औद्योगिक क्षेत्र और रेजिडेंशियल जोन पहले से प्लान होंगे

चार फेज़, एक स्मार्ट शहर – हर चरण में तकनीक का साथ

न्यू नोएडा मास्टर प्लान 2041 के तहत इसे चार चरणों में विकसित किया जा रहा है:

चरणक्षेत्र (हेक्टेयर में)अनुमानित पूर्णता वर्ष
फेज 13,165 हेक्टेयर2027
फेज 23,798 हेक्टेयर2032
फेज 35,908 हेक्टेयर2037
फेज 48,230 हेक्टेयर2041

हर फेज़ में आवासीय, औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत ज़ोन बनाए जाएंगे – वो भी डिजिटल जोनिंग के आधार पर।


?‍? अब गांव-गांव तक पहुंचेगा प्राधिकरण – निगरानी के लिए बन रहे फील्ड ऑफिस

नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि न्यू नोएडा क्षेत्र के भीतर ही 10,000 वर्ग मीटर में दो अस्थायी फील्ड ऑफिस बन रहे हैं – एक जोखाबाद/सांवली के पास और दूसरा सिकंदराबाद औद्योगिक बेल्ट के पास। इन ऑफिसों से:

  • किसानों से संवाद
  • सैटेलाइट डेटा की निगरानी
  • अवैध गतिविधियों की पहचान
  • जमीन की डिजिटली निगरानी
  • योजनाओं की निगरानी ऑनग्राउंड

? लैंड पुलिंग मॉडल पर चलने की तैयारी – लेकिन ज़ोनिंग पर भ्रम

प्राधिकरण लैंड पुलिंग मॉडल अपनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें किसानों से उनकी जमीन लेकर विकसित प्लॉट वापस दिए जाएंगे। लेकिन यहाँ सबसे बड़ी दुविधा है:

"क्या किसानों को जो ज़मीन वापस मिलेगी, वह रिहायशी होगी, वाणिज्यिक होगी या औद्योगिक?"

इस ज़ोनिंग की स्पष्टता के बिना लैंड पुलिंग में विवाद और नाराज़गी की पूरी संभावना है। इसके समाधान के लिए जल्दी ही जनप्रतिनिधियों, किसानों और विशेषज्ञों के साथ बैठकें बुलाई जाएंगी।


? कहां से शुरू होगा विकास? एक्सप्रेसवे किनारे होगी पहली लकीर

नोएडा अथॉरिटी के सूत्रों के मुताबिक, विकास की शुरुआत ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और जीटी रोड के नजदीकी इलाकों से होगी, क्योंकि वहां पहले से ही कनेक्टिविटी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान है।


?‍? जनता देखेगी डिजिटल नक्शा – जनता की आंख बनेगा सैटेलाइट

प्राधिकरण जल्द ही एक ऐसा पोर्टल लाने जा रहा है जहां कोई भी नागरिक लॉगिन कर:

  • अपने गांव/प्लॉट की डिजिटल स्थिति देख सकेगा
  • मास्टर प्लान के ज़ोन देख सकेगा
  • शिकायत दर्ज करा सकेगा
  • नजदीकी निर्माण गतिविधियों की जानकारी ले सकेगा

इससे जनता स्वयं निगरानी टीम का हिस्सा बन सकेगी, जिससे भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण दोनों पर रोक लगेगी।


? हरियाली, जलनिकासी और संरचना की निगरानी – 360 डिग्री नज़र

सैटेलाइट बेसमैप केवल प्लॉटिंग तक सीमित नहीं रहेगा। वह पर्यावरणीय संरचना की भी निगरानी करेगा:

  • कितने पेड़ हैं और कहां
  • वर्षा जल बहाव की दिशा
  • हरियाली वाले क्षेत्र का प्रतिशत
  • किस जगह जलभराव हो सकता है
  • कहां नाले की ज़रूरत है

? प्राधिकरण बोले – एक भी इंच ज़मीन अब अनियोजित नहीं रहेगी

नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ सतीश पाल ने बताया:

“यह पहली बार है कि किसी मास्टर प्लान को सैटेलाइट डेटा से शुरू किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता, सटीकता और भविष्य की प्लानिंग सभी सुनिश्चित होंगी।”


? न्यू नोएडा: अंतरिक्ष से निर्देशित, ज़मीन पर व्यवस्थित भारत का मॉडल शहर

अब वो दिन गए जब नक्शे पेंसिल और स्केल से बनते थे। अब सैटेलाइट से मापा जाएगा हर इंच, और हर योजना डिजिटल जोनिंग के आधार पर तय होगी। न्यू नोएडा सचमुच बन रहा है – भारत का पहला ऐसा उपनगर जो आसमान से देखा, परखा और समझा जा रहा है।


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