ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडेविधायक तेजपाल नागर ने दिया समर्थन, बोले- 'प्राधिकरण और शासन तक पहुंचाऊंगा आवाज', ज्ञापन सौंपकर उठाई जनस्वास्थ्य की बिगड़ती तस्वीर पर चिंता


निजी नहीं, अब चाहिए सरकारी अस्पताल!

ग्रेटर नोएडा में एक्टिव सिटीजन टीम ने इस बार जनता के एक अहम मुद्दे को बुलंद आवाज दी है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा हाल ही में घोषित की गई चार निजी अस्पताल प्लॉट स्कीम का विरोध करते हुए एक्टिव सिटीजन टीम ने मांग की है कि इन प्लॉट्स पर निजी अस्पताल नहीं, बल्कि पूरी तरह से सरकारी अस्पताल बनाए जाएं।

टीम का तर्क है कि पहले से ही शहर में निजी अस्पतालों की भरमार है और ये आम जनता की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। महंगे इलाज ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में नई जमीन का आवंटन अगर सरकारी अस्पतालों के लिए किया जाए, तो न केवल सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, बल्कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भी बड़ी राहत मिलेगी।


विधायक तेजपाल नागर आए आगे, कहा- "ये मुद्दा सिर्फ स्थानीय नहीं, प्रदेश स्तर का है"

एक्टिव सिटीजन टीम ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा के लोकप्रिय विधायक तेजपाल नागर से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। टीम ने अपनी चिंता साझा करते हुए आग्रह किया कि प्राधिकरण को निर्देश दिए जाएं कि वो इन प्लॉट्स को निजी हाथों में देने की बजाय स्वयं या अन्य सरकारी संस्थाओं के माध्यम से अस्पतालों की स्थापना करे।

विधायक तेजपाल नागर ने इस मांग का समर्थन करते हुए स्पष्ट कहा कि "यह एक जनहित का विषय है और मैं इसे प्राधिकरण के साथ-साथ लखनऊ में उच्च स्तर तक उठाऊंगा।"


ये है एक्टिव सिटीजन टीम का पक्ष

टीम के प्रतिनिधि मंजीत सिंह ने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की योजना के अनुसार चार प्लॉटों का आवंटन बोली के माध्यम से किया जाएगा। पर सवाल यह है कि जब पहले से ही शहर में निजी अस्पतालों की संख्या कई गुना अधिक है और सरकारी अस्पताल नगण्य हैं, तो ऐसे में नई स्कीम सिर्फ मुनाफाखोरी को बढ़ावा देगी।

"अगर प्राधिकरण इन प्लॉटों को नीलाम करने की बजाय स्वयं अस्पताल बनाकर या सरकारी/सेमी-गवर्नमेंट संस्थानों को संचालन के लिए सौंपे, तो इलाज की लागत काफी कम हो जाएगी और आम जनता को राहत मिलेगी।"


प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल

ज्ञापन सौंपते समय प्रतिनिधिमंडल में मौजूद प्रमुख सदस्य थे:

  • मंजीत सिंह
  • साधना सिन्हा
  • अंजू पुंडीर
  • हरेंद्र भाटी
  • आलोक सिंह
  • सुनील प्रधान
  • रमेश प्रेमचंदानी
  • सजल पुंडीर

एक्टिव सिटीजन टीम के आलोक सिंह ने कहा कि सभी ने एकमत होकर मांग उठाई कि आने वाले समय में अगर ये प्लॉट निजी अस्पतालों को दे दिए गए, तो ग्रेटर नोएडा की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से "प्राइवेट डोमिनेंस" में चली जाएगी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक साबित हो सकता है।


ग्रेटर नोएडा में स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति

  • निजी अस्पताल: 30+ बड़े निजी अस्पताल
  • सरकारी अस्पताल: केवल 2 प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र
  • सरकारी मेडिकल कॉलेज: नहीं
  • ESIC या EWS सुविधा: सीमित और कार्यक्षमता में बाधित

यह स्पष्ट है कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र आज भी ग्रेटर नोएडा में काफी कमजोर है। लाखों की आबादी के लिए महज कुछ सरकारी सुविधा केंद्र नाकाफी हैं।

इसी सन्दर्भ में निम्न बिंदुओं पर  विचारार्थ एवं निर्णय हेतु आपका ध्यान अपेक्षित है।

१. ग्रेटर नॉएडा प्राधिकरण ने निजी अस्पतालों के लिए ४ प्लाटों  की स्कीम बिडिंग के आधार पर निकाली है।

२. बोली / बिडिंग पर लेने के बाद निश्चित रूप से प्लाट कई गुना ज्यादा कीमत पर निजी संस्थानों द्वारा खरीदे जाएंगे जिसका खामियाज़ा आम जनता को ज्यादा चिकित्सा दरों के रूप में भरना पड़ेगा।

३ . वर्त्तमान में  जब निजी अस्पतालों की संख्या सरकारी से कई गुना ज्यादा है तो इन प्लाटों पर सरकारी अस्पताल क्यों नहीं बनाये जाने चाहिए ?

४ . प्राधिकरण अगर बेचने के बजाय इन प्लाटों पर स्वयं अस्पताल बनाकर संचालित करने लिए संस्थाओं को दे तो  इलाज के  खर्च का भार आम जनता पर बहुत कम आएगा ।

५ .  साथ ही साथ प्राधिकरण के लिए भी ये आर्थिक श्रोत बनेगा जो वापस नागरिकों की बेहतरी में लगाया जा सकेगा।


क्या प्राधिकरण बदलेगा नीति?

अब सभी की नजरें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की अगली चाल पर टिकी हैं। क्या आम जनता की आवाज सुनी जाएगी? क्या स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकार को व्यावसायिक नीति से अलग रखा जाएगा? या फिर प्लॉट नीलामी की रेस में स्वास्थ्य नीति एक बार फिर पिछड़ जाएगी?


एक्टिव सिटीजन टीम का संकल्प

टीम ने साफ कहा है कि अगर इस पर विचार नहीं किया गया तो वह प्रदर्शन से लेकर जनसुनवाई और याचिका तक का रास्ता अपनाएगी। इस मांग को किसी भी हाल में दरकिनार नहीं किया जाएगा।


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