करीब 50 लाख वर्गमीटर जमीन अतिक्रमण की चपेट में होने की रिपोर्ट, सेक्टर-104 और 107 समेत कई इलाकों में अवैध निर्माण का मामला; नोएडा के सुनियोजित विकास और निवेश योजनाओं के लिए भूमि सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती, 

नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश के प्रमुख नियोजित शहरों में शामिल नोएडा आज औद्योगिक निवेश, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट और आधुनिक आधारभूत ढांचे के कारण तेजी से विस्तार कर रहा है। शहर में नई परियोजनाओं के लिए जमीन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में नोएडा प्राधिकरण की जमीन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण का मामला शहर के भविष्य के नियोजित विकास के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

एक रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण की करीब 50 लाख वर्गमीटर जमीन के अतिक्रमण की चपेट में होने का दावा किया गया है। इस जमीन की बाजार कीमत करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि उपलब्ध पूर्ववर्ती रिपोर्टों में नोएडा में करीब 45.26 लाख वर्गमीटर जमीन पर अतिक्रमण का आंकड़ा सामने आया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक प्राधिकरण अब अधिग्रहित और कब्जा प्राप्त जमीन पर हुए अवैध कब्जों की सूची तैयार कर रहा है। नोएडा प्राधिकरण के CEO कृष्णा करुणेश के अनुसार जमीन को चिन्हित करने के बाद उसे खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की बात कही गई है।

मास्टर प्लान-2031 के लिए जमीन की उपलब्धता अहम

नोएडा के मास्टर प्लान-2031 में शहर के अलग-अलग हिस्सों में औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और संस्थागत गतिविधियों के लिए भूमि उपयोग निर्धारित किया गया है। सड़क, परिवहन, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत ढांचे की योजनाएं भी इसी नियोजन व्यवस्था से जुड़ी हैं। CAG की नोएडा संबंधी परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में भी भूमि अधिग्रहण, आवंटन, योजना और आंतरिक नियंत्रण से जुड़ी कई कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया था। रिपोर्ट में 2005-06 से 2017-18 की अवधि की भूमि संबंधी प्रक्रियाओं की जांच की गई थी।

ऐसे में यदि मास्टर प्लान के तहत किसी क्षेत्र के विकास के लिए निर्धारित जमीन पर अतिक्रमण या अवैध निर्माण मौजूद है, तो विकास कार्य शुरू करने से पहले जमीन को खाली कराने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत पड़ती है। इसका सीधा असर परियोजना की समय-सीमा और लागत पर पड़ सकता है।

सेक्टर-104 और सेक्टर-107 समेत कई इलाकों में अवैध निर्माण की शिकायत

नोएडा में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण को लेकर प्राधिकरण पहले भी कई सेक्टरों और गांवों को चिन्हित कर चुका है। उपलब्ध रिपोर्टों में सेक्टर-104 और सेक्टर-107 समेत कई क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग का उल्लेख किया गया है। सेक्टर-104 और सेक्टर-107 नोएडा के तेजी से विकसित हो रहे हिस्सों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आवासीय और वाणिज्यिक गतिविधियों के विस्तार के साथ जमीन की कीमत भी काफी बढ़ी है। ऐसे में प्राधिकरण की जमीन पर किसी भी तरह का अनधिकृत निर्माण भविष्य की विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है।

2017 के लैंड ऑडिट में भी सामने आया था अतिक्रमण

नोएडा में जमीन पर कब्जे की समस्या नई नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2017 में कराए गए लैंड ऑडिट में भी प्राधिकरण की जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति सामने आई थी।

ताजा रिपोर्ट में 2017 के ऑडिट का हवाला देते हुए बताया गया है कि उस समय सेक्टर-4, 5, 8, 9 और 10 में करीब एक लाख वर्गमीटर जमीन पर कब्जे का उल्लेख किया गया था। उस समय जमीन की कीमत लगभग 362 करोड़ रुपये आंकी गई थी। समय के साथ जमीन के मूल्य में हुई वृद्धि के कारण उसी क्षेत्र की जमीन की मौजूदा कीमत काफी अधिक हो चुकी है। यह स्थिति बताती है कि जमीन की पहचान और रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ कब्जा हटाने की कार्रवाई को भी लगातार आगे बढ़ाना जरूरी है।

हर वर्क सर्किल में तैयार हो रहा जमीन का रिकॉर्ड

नोएडा प्राधिकरण के अलग-अलग वर्क सर्किलों में जमीन की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्राधिकरण की जमीन कहां उपलब्ध है, कहां अतिक्रमण है, किन स्थानों पर अवैध निर्माण हुआ है और किन जमीनों को कब्जामुक्त कराने की जरूरत है। इस तरह के रिकॉर्ड से जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। साथ ही भविष्य में किसी जमीन पर दोबारा अतिक्रमण होने की स्थिति में उसकी निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकती है।

निवेशकों के लिए भी जमीन की कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण

नोएडा में देश-विदेश की कंपनियां औद्योगिक, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और अन्य क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। ऐसे में किसी भी निवेश परियोजना के लिए जमीन की उपलब्धता के साथ उसकी कानूनी और भौतिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी परियोजना के लिए निर्धारित जमीन पर पहले से कब्जा या अनधिकृत निर्माण मौजूद हो, तो उसे खाली कराने की प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसका असर परियोजना की शुरुआत, निर्माण और रोजगार सृजन की समय-सीमा पर पड़ सकता है।

नोएडा की भूमि उपलब्धता को लेकर यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर का बड़ा हिस्सा पहले ही विकसित हो चुका है। नए क्षेत्रों के नियोजित विकास के लिए उपलब्ध भूमि का संरक्षण और उसका सही उपयोग आवश्यक होता जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार नोएडा का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विकसित हो चुका है और शहर के विस्तार के लिए उपलब्ध जमीन सीमित है।

एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से भी जुड़ा है मुद्दा

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2029-30 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। राज्य के निवेश और औद्योगिक विकास रोडमैप में नोएडा जैसे शहरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। Invest UP के मौजूदा आर्थिक आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश की GSDP करीब 30.25 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई है और राज्य की वृद्धि दर 13.4 प्रतिशत बताई गई है।

वहीं, एक ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य को मौजूदा आर्थिक वृद्धि की तुलना में काफी तेज गति बनाए रखने की आवश्यकता होगी। उपलब्ध विश्लेषणों में 2029 के लक्ष्य के लिए करीब 23.5 प्रतिशत वार्षिक GSDP वृद्धि की जरूरत का अनुमान भी दिया गया है। ऐसे में औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे और नई परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता तथा उसका प्रभावी इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

अधिकारियों की जवाबदेही भी अहम

जमीन पर अतिक्रमण केवल कब्जा हटाने का मामला नहीं है, बल्कि इसमें जमीन की निगरानी, रिकॉर्ड के नियमित अपडेट और समय पर कार्रवाई का प्रश्न भी जुड़ा है। यदि किसी प्राधिकरण की जमीन पर लंबे समय तक अवैध निर्माण बना रहता है तो बाद में उसे हटाना अधिक कठिन हो सकता है। ताजा रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण की ओर से जमीन की सूची तैयार करने और कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की बात कही गई है। इससे आगे की चुनौती यह होगी कि चिन्हित जमीनों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, कब्जे की प्रकृति स्पष्ट की जाए और नियमों के तहत कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

जमीन बची तो विकास योजनाओं को मिलेगी गति

नोएडा के सामने आने वाले वर्षों में नई औद्योगिक इकाइयों, आवासीय क्षेत्रों, संस्थागत सुविधाओं, सड़कों और सार्वजनिक आधारभूत ढांचे के विकास की जरूरत बढ़ेगी। इसके लिए प्राधिकरण की भूमि एक महत्वपूर्ण संसाधन है। करीब 45 से 50 लाख वर्गमीटर जमीन पर अतिक्रमण से जुड़े आंकड़े यदि मौजूदा सत्यापन में पुष्ट होते हैं, तो यह नोएडा के भूमि प्रबंधन और संपत्ति सुरक्षा के लिए गंभीर विषय होगा। CAG की पुरानी रिपोर्टों में भी नोएडा की भूमि अधिग्रहण और आवंटन व्यवस्था से जुड़ी कमियां दर्ज की गई थीं।

अब जरूरत केवल कब्जे की पहचान करने की नहीं, बल्कि जमीन का डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड अपडेट करने, सीमांकन मजबूत करने, अवैध निर्माण पर समयबद्ध कार्रवाई करने और कब्जामुक्त जमीन को मास्टर प्लान के अनुरूप विकास में लाने की है। यदि यह प्रक्रिया प्रभावी तरीके से आगे बढ़ती है तो नोएडा की उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और शहर के भविष्य के नियोजित विकास, निवेश तथा आधारभूत ढांचे की परियोजनाओं को भी गति मिलने की संभावना है।