ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बदलते दौर में जब तकनीक लगातार नई क्षमताओं के साथ मानव जीवन और कार्यशैली को प्रभावित कर रही है, ऐसे समय में यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर मशीनों से अलग इंसान की सबसे बड़ी विशेषता क्या है? इसी महत्वपूर्ण और समसामयिक प्रश्न पर विचार-विमर्श के लिए स्पर्श ग्लोबल स्कूल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में शनिवार, 22 अगस्त 2026 को एक विशेष विचारोत्तेजक कार्यक्रम ‘मंथन – The Human Edge in an AI-Driven World’ का आयोजन किया गया।

स्पर्श ग्लोबल स्कूल एवं स्पर्श यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक न्यूरोसाइंस के बीच संवाद स्थापित करते हुए AI के दौर में मानवीय क्षमताओं, संवेदनाओं, विवेक, रचनात्मकता और सामाजिक चेतना की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल तकनीकी बदलावों से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें यह समझने के लिए प्रेरित करना भी रहा कि भविष्य की दुनिया में मानवीय मूल्यों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण क्यों होगी।

मानव मस्तिष्क और सामाजिक व्यवहार पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लॉर्ड स्वर्ण प्रीत सिंह, प्रोफेसर ऑफ सोशल एंड कम्युनिटी साइकियाट्री, यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक, यूके, ने विद्यार्थियों के साथ मानव मस्तिष्क, सामाजिक व्यवहार और मानवीय संभावनाओं के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना के संतुलन को आवश्यक बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि AI सूचनाओं का विश्लेषण कर सकता है, प्रक्रियाओं को तेज कर सकता है और कई जटिल कार्यों में मनुष्य की सहायता कर सकता है, लेकिन मानवीय अनुभव, भावनात्मक समझ और सामाजिक संदर्भों को समझने की क्षमता का महत्व अपनी जगह बना रहेगा। बदलती तकनीकी दुनिया में युवाओं के लिए यह आवश्यक है कि वे तकनीक का उपयोग करने के साथ-साथ अपने भीतर मानवीय गुणों को भी विकसित करें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अमीश देवगन, मैनेजिंग एडिटर, न्यूज़18 हिंदी, ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य, AI और संचार के क्षेत्र में तथ्यपरक, विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार सोच की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को सूचना के इस दौर में तथ्यों की जांच करने और किसी भी जानकारी को बिना सोचे-समझे स्वीकार करने के बजाय आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

फिल्म और रचनात्मकता ने जोड़ा मानवीय संवेदनाओं का रंग

कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्ममेकर नीरू खेरा की उपस्थिति ने चर्चा को कला, सिनेमा और रचनात्मकता से भी जोड़ा। उनकी मौजूदगी ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, मानवीय अनुभवों, भावनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति का महत्व बना रहेगा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और अतिथियों के बीच जीवंत संवाद देखने को मिला। विद्यार्थियों ने AI, शिक्षा, मीडिया, सिनेमा, रचनात्मकता और भविष्य के रोजगार से जुड़े विभिन्न सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। इस संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को किताबों और कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया में हो रहे बदलावों को समझने का अवसर मिला।

‘AI के दौर में इंसान की सबसे बड़ी विशेषता क्या?’

‘मंथन’ कार्यक्रम का केंद्रीय प्रश्न था—“जब AI लगातार अधिक सक्षम हो रही है, तब मनुष्य की सबसे बड़ी विशिष्टता क्या है?” इस सवाल पर हुई चर्चा में सहानुभूति, रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक विवेक और मानवीय जुड़ाव को इंसान की प्रमुख शक्तियों के रूप में रेखांकित किया गया।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि AI को केवल मानव के प्रतिस्पर्धी के रूप में देखने के बजाय एक ऐसे तकनीकी माध्यम के रूप में समझना चाहिए, जो मनुष्य की क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर सकता है। तकनीक भविष्य को तेज गति दे सकती है, लेकिन उस भविष्य की दिशा तय करने के लिए मानवीय विवेक, संवेदना और मूल्यों की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी। कार्यक्रम में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि आने वाली पीढ़ी को केवल AI का उपयोग करना सीखना पर्याप्त नहीं होगा। विद्यार्थियों को यह भी सीखना होगा कि तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं के साथ कैसे किया जाए।

स्पर्श ग्लोबल स्कूल में ‘मंथन’ ने AI युग में मानव की विशिष्टता पर छेड़ी सार्थक बहस

विद्यार्थियों के लिए बना आत्मचिंतन और संवाद का मंच

‘मंथन’ केवल विशेषज्ञों के व्याख्यान तक सीमित कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसे विद्यार्थियों के लिए एक संवादात्मक और आत्मचिंतन का मंच बनाया गया। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सीधे प्रश्न पूछे और AI आधारित भविष्य में शिक्षा, रोजगार, मीडिया, रचनात्मकता तथा मानव संबंधों को लेकर अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ वे अपने भीतर ऐसी कौन-सी क्षमताएं विकसित कर सकते हैं, जिन्हें कोई मशीन आसानी से प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। सहानुभूति से लेकर कल्पनाशीलता तक और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता से लेकर मानवीय संबंधों को समझने तक, इन सभी पहलुओं को भविष्य के लिए आवश्यक कौशल के रूप में सामने रखा गया।

स्पर्श ग्लोबल स्कूल का यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब AI शिक्षा, मीडिया, व्यवसाय और रोजगार सहित जीवन के लगभग हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है। ऐसे में विद्यार्थियों के बीच तकनीक को लेकर जागरूकता के साथ-साथ उसके सामाजिक और नैतिक प्रभावों पर चर्चा करना भी महत्वपूर्ण हो गया है।

तकनीक के साथ मानवता को आगे रखने का संदेश

‘मंथन’ से निकलने वाला सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि AI मानव का विकल्प बनने के बजाय मानव क्षमताओं के विस्तार का माध्यम बन सकती है। तकनीक कार्यों को आसान और तेज बना सकती है, लेकिन उसका सही उपयोग किस दिशा में किया जाए, यह निर्णय मनुष्य को ही करना होगा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी ‘Human Edge’ यानी मानवीय विशिष्टता को पहचानने, उसे विकसित करने और भविष्य की दुनिया को संवेदनशील, रचनात्मक तथा विवेकपूर्ण दृष्टि से देखने की प्रेरणा दी।

स्पर्श ग्लोबल स्कूल द्वारा आयोजित यह विशेष कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संवाद और आत्मचिंतन का एक प्रेरक मंच साबित हुआ। ‘मंथन’ ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि AI-चालित भविष्य में तकनीकी ज्ञान जितना जरूरी होगा, उतना ही जरूरी होगा मानवीय संवेदना, नैतिक विवेक, रचनात्मक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव। यही वे गुण हैं जो तकनीकी प्रगति के बीच इंसान की विशिष्ट पहचान और उसकी वास्तविक ताकत को बनाए रखेंगे।