ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। वैश्विक शिक्षा के परिदृश्य में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर चुके गलगोटियास विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए अजमान विश्वविद्यालय में आयोजित इंडिया–अरब यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट्स समिट में सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।
यह सहभागिता केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि सीमाओं से परे ज्ञान, शोध और नवाचार आधारित साझेदारी के लिए एक स्पष्ट और ठोस प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।
‘विजन से एक्शन तक’ — रणनीति से क्रियान्वयन की ओर
समिट के प्रेसिडेंशियल राउंडटेबल का विषय था — ‘विजन से एक्शन तक’।
इस सत्र ने भारत और अरब देशों के उच्च शिक्षा क्षेत्र के शीर्ष नेतृत्व को एक साझा मंच पर लाकर —
सीमाओं से परे सहयोग
शोध में उत्कृष्टता
नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र
छात्र गतिशीलता एवं अकादमिक आदान-प्रदान
जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर रणनीतिक संवाद का अवसर प्रदान किया।
डॉ. ध्रुव गलगोटिया का सशक्त प्रतिनिधित्व
गलगोटियास विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने इस महत्वपूर्ण सत्र में संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने भारतीय और अरब शैक्षणिक समुदाय के बीच संबंधों को और सुदृढ़ बनाने में क्रियान्वयन आधारित नेतृत्व की भूमिका पर विशेष बल दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा —
“शोध, नवाचार और विद्यार्थियों को वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ अत्यंत आवश्यक हैं। भारत–अरब सहयोग सीमाओं से परे ज्ञान प्रवाह का सशक्त उदाहरण है।”
राउंडटेबल के दौरान विश्वविद्यालय प्रमुखों के बीच सार्थक और परिणामोन्मुख संवाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कार्यान्वयन उन्मुख साझेदारियों पर ठोस सहमति बनी।
वैश्विक सहयोग की ओर मजबूत कदम
समिट में इस बात पर सहमति बनी कि —
संयुक्त शोध परियोजनाएँ
फैकल्टी एवं छात्र एक्सचेंज कार्यक्रम
ड्यूल डिग्री एवं को-ट्यूटरशिप मॉडल
नवाचार और स्टार्टअप सहयोग
आने वाले समय में भारत–अरब शैक्षणिक संबंधों को और गहरा करेंगे।
गलगोटियास विश्वविद्यालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक शैक्षणिक नेतृत्व स्थापित करना है।
आयोजकों के प्रति आभार
डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने समिट के सफल आयोजन के लिए डॉ. अश्विन फर्नांडिस के प्रयासों की सराहना की तथा अजमान विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट योजना और संचालन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मंच ज्ञान साझेदारी को व्यवहारिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वैश्विक नेतृत्व की दिशा में मील का पत्थर
इंडिया–अरब यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट्स समिट में सहभागिता गलगोटियास विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई है।
यह न केवल विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक नेटवर्क को सुदृढ़ करेगा, बल्कि उच्च शिक्षा में वैश्विक सहयोग और नेतृत्व को भी प्रोत्साहित करेगा।
आज जब दुनिया शिक्षा के माध्यम से जुड़ रही है, ऐसे में “नॉलेज विदाउट बॉर्डर्स” केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक सशक्त वैश्विक दृष्टिकोण है।
गलगोटियास विश्वविद्यालय ने भारत–अरब सहयोग के माध्यम से यह संदेश दिया है कि शिक्षा की कोई सीमा नहीं होती — ज्ञान का प्रवाह ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

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