ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव, दवा अनुसंधान में तकनीकी नवाचार और मरीजों तक शोध का लाभ पहुंचाने की संभावनाओं पर ग्रेटर नोएडा में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने गहन मंथन किया। राम-ईश इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एंड टेक्निकल एजुकेशन में 21 और 22 अगस्त को “डिराइविंग एआई इनोवेशन: बेस्ट प्रैक्टिसेज फॉर इम्प्लीमेंटेशन इन फार्मा हेल्थकेयर” विषय पर एकेटीयू प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के 60 से अधिक प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। दो दिवसीय आयोजन के दौरान 200 से अधिक मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से फार्मा, हेल्थकेयर, AI, औषधि अनुसंधान और नवाचार से जुड़े शोध एवं विचार सामने रखे गए।

सम्मेलन का शुभारंभ राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डॉ. आर.सी. शर्मा और मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अनिल गुलाटी, संस्थापक, चेयरमैन एवं सीईओ, फारमाज़ इंक., अमेरिका तथा प्रोफेसर एमेरिटस, मिडवेस्टर्न यूनिवर्सिटी एवं यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय एट शिकागो, अमेरिका ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान में नई तकनीकों को अपनाने तथा उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अनिल गुलाटी ने कहा कि प्रयोगशालाओं में किए जा रहे वैज्ञानिक शोध का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका सीधा लाभ आम मरीजों तक पहुंचे। उन्होंने दवा खोज और विकास के क्षेत्र में तेजी से हो रहे वैश्विक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के बेहतर समन्वय से नई औषधियों के विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. आर.सी. शर्मा ने कहा कि संस्थान गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक शोध और फार्मास्युटिकल डेवलपमेंट को प्राथमिकता देता है। विद्यार्थियों और फैकल्टी को विश्वस्तरीय अनुसंधान, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तथा वैश्विक उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए संस्थान लगातार प्रयासरत है।

एकेटीयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) जे.पी. पांडेय ने ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने फार्मास्युटिकल शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बदलते तकनीकी परिवेश में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतिभा शर्मा ने कहा कि फार्मास्युटिकल अनुसंधान का दायरा केवल वैज्ञानिक प्रगति और नई दवाओं की खोज तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध मानव कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व से भी है। वहीं, संस्थान की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) पल्लवी मनीष लव्हाले ने अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के सम्मेलन ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सम्मेलन के ऑनलाइन सत्रों में यूनिवर्सिटी ऑफ मलाया, मलेशिया की प्रो. (डॉ.) वन्नाजन संघिरन ली, एम्स नई दिल्ली के डॉ. हरलोकेश नारायण यादव, यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी, अमेरिका के डॉ. भगवत प्रसाद और वर्जीनिया हेल्थ साइंसेज, अमेरिका के डॉ. विवेक अग्रहरि सहित कई अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

तकनीकी सत्रों में नाइपर हैदराबाद के डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, जामिया हमदर्द की प्रो. मयमूना अख्तर, पेटा इंडिया के डॉ. रोहित बिष्ट, सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ की डॉ. वैशाली पाटिल, डीआईपीएसएआर यूनिवर्सिटी के डॉ. अनूप कुमार, सीएसआईआर-आईआईटीआर लखनऊ के डॉ. शीलेंद्र प्रताप सिंह और आईआईटी-बीएचयू वाराणसी के डॉ. विनोद तिवारी ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। सत्रों में AI आधारित दवा अनुसंधान, हेल्थकेयर में तकनीकी अनुप्रयोग, फार्मास्युटिकल विज्ञान और उभरती शोध तकनीकों सहित विभिन्न समकालीन विषयों पर चर्चा हुई।

सम्मेलन में प्रस्तुत 200 से अधिक मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों में शोधकर्ताओं ने औषधि अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार और फार्मास्युटिकल विज्ञान से जुड़े नए शोध और विचार प्रस्तुत किए। इससे युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद तथा अपने शोध कार्य को व्यापक अकादमिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

इस दौरान डीपीएसआरयू, दिल्ली के प्रो. (डॉ.) शरद वाकोडे ने सम्मेलन की प्रोसीडिंग्स का विमोचन किया। समापन समारोह में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. जशुभाई चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने प्रतिभागियों और शोध प्रस्तुतकर्ताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए।

सम्मेलन की संयोजक प्रो. (डॉ.) रीमा सिन्हा ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. संदीप कुमार बंसल, डॉ. अज़हर दानिश खान, पंकज कुमार सहित संस्थान के शिक्षण एवं शिक्षकेतर कर्मचारी मौजूद रहे।

ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव, दवा अनुसंधान में तकनीकी नवाचार और मरीजों तक शोध का लाभ पहुंचाने की संभावनाओं पर ग्रेटर नोएडा में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने गहन मंथन किया। राम-ईश इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एंड टेक्निकल एजुकेशन में 21 और 22 अगस्त को “डिराइविंग एआई इनोवेशन: बेस्ट प्रैक्टिसेज फॉर इम्प्लीमेंटेशन इन फार्मा हेल्थकेयर” विषय पर एकेटीयू प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के 60 से अधिक प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। दो दिवसीय आयोजन के दौरान 200 से अधिक मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से फार्मा, हेल्थकेयर, AI, औषधि अनुसंधान और नवाचार से जुड़े शोध एवं विचार सामने रखे गए।

सम्मेलन का शुभारंभ राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डॉ. आर.सी. शर्मा और मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अनिल गुलाटी, संस्थापक, चेयरमैन एवं सीईओ, फारमाज़ इंक., अमेरिका तथा प्रोफेसर एमेरिटस, मिडवेस्टर्न यूनिवर्सिटी एवं यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय एट शिकागो, अमेरिका ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान में नई तकनीकों को अपनाने तथा उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अनिल गुलाटी ने कहा कि प्रयोगशालाओं में किए जा रहे वैज्ञानिक शोध का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका सीधा लाभ आम मरीजों तक पहुंचे। उन्होंने दवा खोज और विकास के क्षेत्र में तेजी से हो रहे वैश्विक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के बेहतर समन्वय से नई औषधियों के विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. आर.सी. शर्मा ने कहा कि संस्थान गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक शोध और फार्मास्युटिकल डेवलपमेंट को प्राथमिकता देता है। विद्यार्थियों और फैकल्टी को विश्वस्तरीय अनुसंधान, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तथा वैश्विक उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए संस्थान लगातार प्रयासरत है।

एकेटीयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) जे.पी. पांडेय ने ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने फार्मास्युटिकल शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बदलते तकनीकी परिवेश में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतिभा शर्मा ने कहा कि फार्मास्युटिकल अनुसंधान का दायरा केवल वैज्ञानिक प्रगति और नई दवाओं की खोज तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध मानव कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व से भी है। वहीं, संस्थान की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) पल्लवी मनीष लव्हाले ने अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के सम्मेलन ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सम्मेलन के ऑनलाइन सत्रों में यूनिवर्सिटी ऑफ मलाया, मलेशिया की प्रो. (डॉ.) वन्नाजन संघिरन ली, एम्स नई दिल्ली के डॉ. हरलोकेश नारायण यादव, यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी, अमेरिका के डॉ. भगवत प्रसाद और वर्जीनिया हेल्थ साइंसेज, अमेरिका के डॉ. विवेक अग्रहरि सहित कई अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

तकनीकी सत्रों में नाइपर हैदराबाद के डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, जामिया हमदर्द की प्रो. मयमूना अख्तर, पेटा इंडिया के डॉ. रोहित बिष्ट, सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ की डॉ. वैशाली पाटिल, डीआईपीएसएआर यूनिवर्सिटी के डॉ. अनूप कुमार, सीएसआईआर-आईआईटीआर लखनऊ के डॉ. शीलेंद्र प्रताप सिंह और आईआईटी-बीएचयू वाराणसी के डॉ. विनोद तिवारी ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। सत्रों में AI आधारित दवा अनुसंधान, हेल्थकेयर में तकनीकी अनुप्रयोग, फार्मास्युटिकल विज्ञान और उभरती शोध तकनीकों सहित विभिन्न समकालीन विषयों पर चर्चा हुई।

सम्मेलन में प्रस्तुत 200 से अधिक मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों में शोधकर्ताओं ने औषधि अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार और फार्मास्युटिकल विज्ञान से जुड़े नए शोध और विचार प्रस्तुत किए। इससे युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद तथा अपने शोध कार्य को व्यापक अकादमिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

इस दौरान डीपीएसआरयू, दिल्ली के प्रो. (डॉ.) शरद वाकोडे ने सम्मेलन की प्रोसीडिंग्स का विमोचन किया। समापन समारोह में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. जशुभाई चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने प्रतिभागियों और शोध प्रस्तुतकर्ताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए।

सम्मेलन की संयोजक प्रो. (डॉ.) रीमा सिन्हा ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. संदीप कुमार बंसल, डॉ. अज़हर दानिश खान, पंकज कुमार सहित संस्थान के शिक्षण एवं शिक्षकेतर कर्मचारी मौजूद रहे।