ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतमबुद्ध नगर की दादरी विधानसभा सीट-62 पर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां अभी से आकार लेने लगी हैं। भाजपा में संभावित दावेदारों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी के पुराने और अनुभवी संगठनकर्ता प्रणीत भाटी का नाम एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। तीन दशक से अधिक समय तक भाजपा संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने वाले प्रणीत भाटी की क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता को आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रणीत भाटी के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो उनका भाजपा संगठन से जुड़ाव करीब 33 वर्षों से अधिक पुराना बताया जाता है। वह गौतमबुद्ध नगर में भाजपा के शुरुआती दौर के संगठनात्मक विस्तार से जुड़े रहे और जिले के पहले भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। जिला संगठन से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और प्रदेश स्तर तक विभिन्न पदों पर काम करने का उनका अनुभव उनके राजनीतिक परिचय का प्रमुख हिस्सा है।

यही वजह है कि दादरी विधानसभा में उनकी सक्रियता ने भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा को हवा दी है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावित दावेदारी की चर्चाओं ने स्थानीय राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

1992 से शुरू हुआ संगठनात्मक सफर

प्रणीत भाटी के अनुसार उनके सार्वजनिक और संगठनात्मक जीवन की शुरुआत वर्ष 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्राथमिक प्रशिक्षण वर्ग से हुई। इसी दौर में उन्होंने दादरी तहसील में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वर्ष 1994 में उन्हें दादरी नगर मंडल में भाजपा नगर उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। संगठन में लगातार सक्रिय रहने के बाद 1 नवंबर 1997 से वर्ष 2000 तक उन्होंने गौतमबुद्ध नगर भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

यह वह दौर था जब गौतमबुद्ध नगर में भाजपा संगठन अपने विस्तार और जमीनी आधार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा था। ऐसे समय में जिला संगठन की जिम्मेदारी संभालना उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2000 से 2008 तक वह भाजपा पश्चिम प्रांत की क्षेत्र समिति के सदस्य रहे। इस दौरान उन्हें अलग-अलग चुनावी और संगठनात्मक अभियानों में जिम्मेदारियां दी गईं।

भाजपा प्रथम जिला अध्यक्ष प्रणीत भाटी बीजेपी नोएडा की सांसद डॉक्टर महेश शर्मा के साथ

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी निभाईं संगठनात्मक जिम्मेदारियां

प्रणीत भाटी के राजनीतिक परिचय के अनुसार, वर्ष 2003 में उन्होंने खुर्जा लोकसभा क्षेत्र में सह-लोकसभा प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वर्ष 2004 में बुलंदशहर में सदस्यता सत्यापन अधिकारी और वर्ष 2006 में बुलंदशहर भाजपा के जिला प्रभारी के रूप में काम किया। वर्ष 2006-07 में उन्हें मुरादाबाद में सदस्यता अभियान प्रभारी बनाया गया। वहीं 2007-08 में अमरोहा नगर निकाय चुनाव में पर्यवेक्षक प्रभारी तथा वर्ष 2008 में हापुड़ जनपद में नगर निकाय चुनाव प्रभारी की भूमिका निभाई।

इन जिम्मेदारियों से स्पष्ट है कि उनका संगठनात्मक कार्य केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भाजपा के संगठन और चुनावी गतिविधियों से उनका जुड़ाव रहा।

प्रदेश स्तर पर भी संभाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

प्रणीत भाटी का संगठनात्मक अनुभव प्रदेश स्तर तक भी पहुंचा। वर्ष 2010 से 2012 तक वह भाजपा उत्तर प्रदेश किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद वर्ष 2012 से 2015 तक किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2012 में जेवर विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव के लिए विधानसभा प्रभारी के रूप में भी उनके काम करने का उल्लेख मिलता है।

भाजपा प्रथम जिला अध्यक्ष प्रणीत भाटी बीजेपी के कार्यक्रमों में

इसके अलावा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने गौतमबुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र के लोकसभा संयोजक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2026 में पंडित दीनदयाल प्रशिक्षण महाअभियान के तहत मंडल वर्गों में वैचारिक अधिष्ठान विषय पर वक्ता के रूप में भी उनकी भागीदारी रही। इस तरह उनका संगठनात्मक सफर जिला स्तर से शुरू होकर क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर तक पहुंचा।

पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं में आज भी चर्चा

प्रणीत भाटी की राजनीतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका पुराना संगठनात्मक नेटवर्क माना जाता है। भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के बीच उनके जिलाध्यक्ष कार्यकाल और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर चर्चा आज भी होती है। उनके समर्थकों का मानना है कि संगठन के शुरुआती दौर में उन्होंने दादरी, ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को जोड़ने तथा संगठन को सक्रिय बनाने में भूमिका निभाई।

हालांकि मौजूदा समय में उनके व्यक्तिगत जनाधार का स्वतंत्र आकलन अलग विषय है। चुनावी राजनीति में वर्तमान जनसंपर्क, सामाजिक समीकरण और सक्रियता किसी भी दावेदार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद भाजपा के पुराने संगठनात्मक चेहरों में उनका नाम आज भी पहचाना जाता है।

भाजपा प्रथम जिला अध्यक्ष प्रणीत भाटी बीजेपी के कार्यक्रमों में

सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रियता

राजनीतिक गतिविधियों के अलावा प्रणीत भाटी ने सामाजिक क्षेत्र में भी काम करने का दावा किया है। उनके परिचय के अनुसार, उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए अग्रसेन इंटर कॉलेज में राहत शिविर के माध्यम से संगठनात्मक कार्य किया। इसके अलावा तरण चेतना उत्थान समिति और भारत निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है।

राम मंदिर आंदोलन, भूकंप पीड़ितों के लिए राहत कार्य, समरसता महाशिविर और राष्ट्रीय रक्षा महाशिविर जैसी विभिन्न गतिविधियों में योगदान का भी उनके राजनीतिक परिचय में उल्लेख है।

परिवार की राजनीतिक विरासत भी रही महत्वपूर्ण

प्रणीत भाटी की राजनीतिक पहचान में उनके परिवार की संगठनात्मक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनके पिता स्वर्गीय तेजपाल भाटी भाजपा के गाजियाबाद जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्होंने भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रांतीय परिषद और राष्ट्रीय परिषद में भी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके पिता का सरस्वती विद्या मंदिर दादरी और नेहरू स्मारक हाईस्कूल, साकीपुर में प्रबंधकीय दायित्व से जुड़े होने का भी उल्लेख मिलता है।

उनके बड़े भाई स्वर्गीय प्रवीण भाटी भी भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे। वर्ष 1987 से 1989 तक वह गाजियाबाद के भाजपा जिला संगठन मंत्री रहे। इसके बाद 1989 से 1990 तक जिला महामंत्री और 1990 से 1992 तक भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1991 में उन्होंने दादरी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ा था। इसके बाद 21 जनवरी 1992 की मध्यरात्रि में एक कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया। इस प्रकार प्रणीत भाटी के राजनीतिक जीवन में भाजपा संगठन से जुड़ी दो पीढ़ियों की लंबी विरासत दिखाई देती है।

क्या पुराने संगठनकर्ता फिर बनेंगे चुनावी रणनीति का हिस्सा?

दादरी विधानसभा में प्रणीत भाटी की मौजूदा सक्रियता को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अपने पुराने और अनुभवी संगठनकर्ताओं को फिर महत्वपूर्ण भूमिका देने की रणनीति पर काम कर रही है। एक तरफ भाजपा में नई पीढ़ी के नेता लगातार सक्रिय हैं, वहीं पार्टी के लिए लंबे समय तक संगठन में काम कर चुके अनुभवी नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेषकर ऐसे नेताओं का अनुभव चुनावी प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और संगठनात्मक संरचना को समझने में उपयोगी माना जाता है।

हालांकि टिकट को लेकर अंतिम निर्णय पूरी तरह पार्टी नेतृत्व को करना है। इसलिए प्रणीत भाटी की संभावित दावेदारी को फिलहाल राजनीतिक चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

भाजपा प्रथम जिला अध्यक्ष प्रणीत भाटी

दादरी में टिकट की दौड़ होगी दिलचस्प

दादरी विधानसभा सीट पर भाजपा की आगामी रणनीति आने वाले महीनों में और स्पष्ट होने की उम्मीद है। टिकट के संभावित दावेदारों के बीच संगठनात्मक अनुभव, स्थानीय जनसंपर्क, सामाजिक स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होंगे। प्रणीत भाटी के पक्ष में उनका लंबा संगठनात्मक अनुभव, पुराने कार्यकर्ताओं से संपर्क और परिवार की राजनीतिक विरासत जैसे पहलू देखे जा रहे हैं। वहीं वर्तमान राजनीति में किसी भी दावेदार के लिए क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहना और व्यापक जनसंपर्क बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है।

तीन दशक का अनुभव, अब वर्तमान जनाधार की परीक्षा

प्रणीत भाटी की संभावित दावेदारी को केवल टिकट की दौड़ के नजरिए से देखना पूरे घटनाक्रम को सीमित कर देगा। असल सवाल यह है कि क्या भाजपा अपने पुराने संगठनात्मक अनुभव को 2027 के चुनावी समीकरण में दोबारा इस्तेमाल करेगी और क्या प्रणीत भाटी अपने तीन दशक से अधिक के संगठनात्मक अनुभव को मौजूदा दौर के जनसंपर्क और चुनावी राजनीति में बदल पाएंगे? फिलहाल इतना जरूर है कि दादरी विधानसभा क्षेत्र की भाजपा राजनीति में प्रणीत भाटी का नाम फिर चर्चा में आ गया है। उनकी सक्रियता ने पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सक्रियता केवल संभावित दावेदारी तक सीमित रहती है या भाजपा संगठन उन्हें 2027 के चुनावी मैदान में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देता है।