भगवान विश्वकर्मा के पूजन के साथ इंजीनियरिंग शिक्षा, तकनीकी कौशल और नवाचार को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। एक्यूरेट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, ग्रेटर नोएडा में विश्वकर्मा पूजा श्रद्धा, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के दौरान भगवान विश्वकर्मा का विधिवत पूजन कर संस्थान, विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य, ज्ञान, कौशल और प्रगति की कामना की गई। इस अवसर पर शिक्षा और तकनीकी विकास को भारतीय परंपरा में निहित सृजन एवं कर्म की भावना से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्रहित में करने का संदेश दिया गया।

भारतीय परंपरा में विश्वकर्मा पूजा को सृजन, निर्माण, शिल्प, तकनीकी कौशल और कर्म के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। इसी विचार को आधुनिक इंजीनियरिंग शिक्षा से जोड़ते हुए कार्यक्रम में कहा गया कि आज तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशल, रचनात्मक सोच, अनुसंधान क्षमता और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित करना भी है।

इंजीनियरिंग शिक्षा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान

कार्यक्रम में एक्यूरेट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. सुनील मिश्रा ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए कहा कि विश्वकर्मा पूजा सृजन, निर्माण और उत्कृष्टता की भावना से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा भारतीय परंपरा में निर्माण और तकनीकी कौशल के प्रतीक माने जाते हैं और उनका स्मरण विद्यार्थियों को अपने ज्ञान एवं कौशल के सकारात्मक उपयोग की प्रेरणा देता है।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है, जबकि इंजीनियरिंग शिक्षा उस प्रगति को तकनीकी दिशा प्रदान करती है। वर्तमान समय में इंजीनियरिंग का क्षेत्र मशीनों, भवनों और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और हरित तकनीक जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप नए समाधान विकसित करने की संभावनाएं पैदा कर रही हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, समस्या समाधान की क्षमता, अनुसंधान की सोच और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित करना जरूरी है। तकनीक का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए किया जा सके।

“अच्छा इंजीनियर तकनीक को समाज के लिए उपयोगी बनाता है”

डॉ. सुनील मिश्रा ने विद्यार्थियों को भगवान विश्वकर्मा की सृजनशीलता और कर्म के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में नई सोच, नए प्रयोग और नए समाधान विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक अच्छा इंजीनियर केवल तकनीक को समझने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसे समाज के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में भी काम करता है। इंजीनियरिंग शिक्षा का व्यापक उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना होना चाहिए, जो रोजगार के लिए तैयार होने के साथ-साथ रोजगार सृजन, स्टार्टअप, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दे सकें।

इंजीनियरिंग शिक्षा, तकनीकी कौशल और नवाचार को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश

शिक्षा से कौशल और कौशल से नवाचार की ओर

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप इंजीनियरिंग शिक्षा को विकसित करने पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में प्रयोगशाला आधारित शिक्षा, परियोजना आधारित अधिगम, उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव, तकनीकी प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसरों को विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

वक्ताओं ने कहा कि युवा इंजीनियर देश की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने के बजाय लगातार सीखने, प्रयोग करने, असफलताओं से सीखने और समस्याओं के नए समाधान खोजने की आदत विकसित करनी होगी।

आधुनिक तकनीक और उद्योगोन्मुखी कौशल पर जोर

एक्यूरेट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ओर से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ अनुसंधान, नवाचार, व्यावहारिक शिक्षा और उद्योगोन्मुखी कौशल से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना और उनके ज्ञान को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान से जोड़ना है।

विश्वकर्मा पूजा का आयोजन विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसर के साथ-साथ ज्ञान, तकनीकी कौशल, सृजनात्मकता और कर्म के महत्व को समझने का अवसर भी बना।

कार्यक्रम में बीटेक प्रथम वर्ष के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एल. राजपूत, कंप्यूटर साइंस एवं एआई-एमएल विभागाध्यक्ष डॉ. नितिन त्यागी, डीन इंजीनियरिंग डॉ. अभिषेक सक्सेना, प्रोफेसर जैदी, प्रोफेसर तरुण सहित अन्य शिक्षकगण और संस्थान के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश रहा—“ज्ञान से कौशल, कौशल से नवाचार और नवाचार से राष्ट्र निर्माण।” संस्थान की ओर से विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे ज्ञान को कौशल, कौशल को सृजन और सृजन को समाज एवं राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास करें।