NIET ग्रेटर नोएडा में IEEE प्रायोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस संपन्न
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (NIET), ग्रेटर नोएडा में 18 एवं 19 सितंबर 2026 को ‘Smart Technologies Empowering Sustainable Development’ विषय पर IEEE द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। कांफ्रेंस में सतत विकास के लिए स्मार्ट तकनीकों के उपयोग, ऊर्जा, पर्यावरण, उभरती तकनीकों और नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए तथा विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के डायरेक्टर जनरल डॉ. मोहम्मद रिहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में IEEE से जुड़े विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों के साथ डॉ. आशीष कुमार सिंह, डीन-स्टूडेंट वेलफेयर, एमएनएनआईटी प्रयागराज, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. के.सी. मिश्रा, कांफ्रेंस ऑब्जर्वर डॉ. स्मिता शर्मा, डॉ. रफीक, डॉ. सुमन अवधेश यादव तथा डॉ. विक्रम सिंह सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।
NIET की ओर से डायरेक्टर एवं कांफ्रेंस जनरल चेयर डॉ. विनोद एम. कापसे, एसोसिएट डायरेक्टर (एकेडमिक) डॉ. नरेश कुमार, कांफ्रेंस कन्वीनर डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी एवं डॉ. राजू, कांफ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. आनंद कुमार गुप्ता एवं डॉ. आशीष चक्रबर्ती तथा आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। NIET के डायरेक्टर डॉ. विनोद एम. कापसे ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कांफ्रेंस में शामिल देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कांफ्रेंस के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं। इसके बाद कांफ्रेंस कन्वीनर डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने कांफ्रेंस के उद्देश्य और विभिन्न तकनीकी ट्रैक्स के बारे में जानकारी दी।
Smart Technologies Empowering Sustainable Development पर हुआ मंथन
मुख्य अतिथि डॉ. मोहम्मद रिहान ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों तथा उनके समुचित दोहन में स्मार्ट टेक्नोलॉजी की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने शोधार्थियों और विद्यार्थियों को ऐसी स्मार्ट तकनीकों के विकास के लिए प्रेरित किया, जिनका कार्बन फुटप्रिंट कम हो और जो पर्यावरणीय संतुलन के साथ सतत विकास को बढ़ावा दे सकें।
कांफ्रेंस के पहले दिन एनटीटी डेटा के डॉ. सुधांशु गुप्ता, स्ट्रेट स्कूल ऑफ डिजाइन के डायरेक्टर डॉ. थॉमस डाल तथा विश्वकर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे के डॉ. परीक्षित महल्ले ने कीनोट उद्बोधन प्रस्तुत किए। इन सत्रों में स्मार्ट तकनीक, डिजाइन, डिजिटल नवाचार और सतत विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

कांफ्रेंस के दूसरे दिन डीआरडीओ के भूतपूर्व वैज्ञानिक तथा दिल्ली स्किल्स एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. सुशील चंद्रा ने एआर-वीआर तथा कॉग्निटिव न्यूरोसाइंस विषय पर कीनोट उद्बोधन दिया। उन्होंने उभरती तकनीकों और मानव मस्तिष्क से संबंधित अनुसंधान के संभावित उपयोगों पर अपने विचार साझा किए।
दो दिवसीय कांफ्रेंस के समापन समारोह में देश के प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. मोइनुद्दीन, डॉ. बी.आर. अंबेडकर एनआईटी जालंधर के पूर्व निदेशक एवं दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से शिक्षा एवं ज्ञान के क्षेत्र में निरंतर सीखने, कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ योगदान देने का आह्वान किया।
डॉ. मोइनुद्दीन ने कहा कि शिक्षित और सभ्य समाज के निर्माण के लिए विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थानों का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत में कई ऐसे शिक्षण संस्थान हैं जिन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है, लेकिन देश को निरंतर आगे बढ़ने के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट तकनीकों के विकास पर लगातार काम करना होगा। उनके अनुसार, तकनीकी और शैक्षणिक नवाचार के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर नई पहचान और उदाहरण स्थापित कर सकता है। समापन समारोह के अंत में कांफ्रेंस कन्वीनर डॉ. राजू ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। दो दिवसीय कांफ्रेंस में स्मार्ट टेक्नोलॉजी और सतत विकास के बीच संबंधों पर हुए विचार-विमर्श को शोध एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी पहल के रूप में देखा गया।

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