ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की एक मिसाल बने गलगोटिया विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू), सिंगापुर द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे एक्टिव एवं कोलैबेरेटिव लर्निंग कार्यक्रम की पहली वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। यह अवसर न सिर्फ विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि भारतीय शिक्षा जगत के लिए भी ऐतिहासिक रहा। इस कार्यक्रम को शिक्षा पद्धति में बदलाव की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
शिक्षा में नए दौर की शुरुआत
एक साल पहले शुरू हुआ यह कार्यक्रम छात्रों को पारंपरिक “रटने” वाली पढ़ाई से निकालकर उन्हें एक्टिव, प्रैक्टिकल और सहयोगात्मक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस पहल का मकसद छात्रों में संवाद, सहयोग और समस्या समाधान की क्षमता को बढ़ावा देना है।
अब एक साल बाद इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक साबित हुए हैं। छात्रों ने बताया कि इस पद्धति ने उन्हें ज्यादा आत्मविश्वासी, अधिक रचनात्मक और टीमवर्क के लिए तैयार बना दिया है।
समारोह में मुख्य अतिथि की प्रेरणादायी बातें
इस खास अवसर पर यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के वरिष्ठ अधिकारी प्रो. साइमन बेट्स मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा –
> “सिर्फ एक वर्ष में गलगोटिया विश्वविद्यालय ने जिस तरह शिक्षा पद्धति में नवाचार कर दिखाया है, वह सराहनीय है और पूरे भारत के विश्वविद्यालयों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।” उनकी इस बात ने समारोह में मौजूद सभी छात्रों और शिक्षकों का उत्साह और भी बढ़ा दिया।
डॉ. ध्रुव गलगोटिया का बड़ा बयान: “बैकबेंचर्स अब बीते ज़माने की बात”
विश्वविद्यालय के सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने इस पहल को नई पीढ़ी के लिए क्रांतिकारी बदलाव बताया।
उन्होंने कहा एक्टिव लर्निंग ने पढ़ाने-पढ़ने की पुरानी धारणाओं को पूरी तरह बदल दिया है। अब हर छात्र बराबर का हिस्सा बन चुका है, चाहे वह फ्रंट बेंचर हो या बैकबेंचर।
छात्रों में आत्मविश्वास, जुड़ाव और सहयोग की भावना पहले से कहीं अधिक बढ़ी है।
18 स्कूलों की भागीदारी, 21 अनोखी प्रदर्शनी
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के 18 स्कूलों ने अपनी अभिनव शिक्षण पद्धतियों की 21 प्रदर्शनी लगाई।
इन प्रदर्शनी में छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर दिखाया कि कैसे नई तकनीक, प्रैक्टिकल अप्रोच और कोलैबेरेटिव एक्टिविटी से पढ़ाई को और भी प्रभावी और रोचक बनाया जा सकता है। इन प्रदर्शनी में से श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन स्कूलों को विशेष सम्मान भी दिया गया।
विश्वविद्यालय की निदेशक संचालन आराधना गलगोटिया ने विजेताओं को सम्मानित किया और उनकी मेहनत की सराहना की।
शिक्षकों का अनुभव: छात्रों में आत्मविश्वास और सोचने की क्षमता में बढ़ोतरी
कार्यक्रम में कई शिक्षकों ने साझा किया कि इस पहल से छात्रों की सोचने की क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और आत्मविश्वास में जबरदस्त इज़ाफा हुआ है।
पहले जहां कई छात्र कक्षा में बोलने से हिचकिचाते थे, वहीं अब वे सक्रिय रूप से प्रश्न पूछते हैं और अपने विचार रखते हैं। इससे छात्रों में सिर्फ अकादमिक ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विकास भी हुआ है।
कुलाधिपति श्री सुनील गलगोटिया का गर्व भरा संदेश
गलगोटिया विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुनील गलगोटिया ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा –
> “पूरे विश्वविद्यालय में शिक्षण पद्धति को बदलना आसान नहीं था। लेकिन आज जो परिणाम सामने आए हैं, वे हमारे सामूहिक प्रयास और समर्पण का नतीजा हैं।” उन्होंने शिक्षकों और छात्रों दोनों की मेहनत और प्रतिबद्धता को सराहा।
भविष्य की राह: अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र बनने की ओर
समारोह के समापन पर प्रो. रिचर्ड जेम्स ने गलगोटिया विश्वविद्यालय की भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा –
आने वाले वर्षों में गलगोटिया विश्वविद्यालय को एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम जारी है।
यहां शिक्षा न सिर्फ भारतीय छात्रों के लिए बल्कि दुनिया भर के विद्यार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगी।
नतीजा – शिक्षा का नया मॉडल, बाकी विश्वविद्यालयों के लिए मिसाल
गलगोटिया विश्वविद्यालय और एनटीयू सिंगापुर की यह साझेदारी साबित करती है कि अगर शिक्षा में इंटरनेशनल कोलैबोरेशन और इन Inovation को मिलाया जाए तो बड़े बदलाव संभव हैं। यह कार्यक्रम अब एक मॉडल बन गया है जिसे अन्य विश्वविद्यालय भी अपनाकर छात्रों को बेहतर अवसर दे सकते हैं।
कार्यक्रम का माहौल और छात्रों का उत्साह
पूरे समारोह के दौरान परिसर में उत्साह का माहौल देखने लायक था। छात्र अपनी-अपनी टीमों के साथ प्रदर्शनी समझा रहे थे। कई छात्रों ने इसे अपने करियर का सबसे महत्वपूर्ण अनुभव बताया।
कई छात्रों ने कहा कि इस कार्यक्रम ने उनकी सोचने की शैली ही बदल दी है और अब वे सिर्फ नौकरियों के बारे में नहीं बल्कि लीडरशिप और इनnovation पर भी ध्यान देने लगे हैं।

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