ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। वैश्विक जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती, बदलते मौसम, ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार और मानव जीवन पर बढ़ते खतरों के बीच, अब शिक्षा संस्थान भी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में गलगोटियास कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भविष्यवादी कार्यक्रम—दो दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP)—का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम AICTE ATAL वाणी योजना के अंतर्गत “सतत पर्यावरण प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए नवीन रणनीतियाँ” विषय पर केंद्रित रहा।

यह आयोजन न सिर्फ शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह एक चेतावनी भी था कि समय अब बहुत कम है और हमें—‘बदलाव नहीं, क्रांति’—की जरूरत है।

उद्घाटन सत्र: विशेषज्ञों की आवाज़ में धरती का दर्द और समाधान दोनों

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिष्ठित संस्थान NITTTR चंडीगढ़ के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. संजय शर्मा द्वारा किया गया।
उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में कहा “जलवायु परिवर्तन आज कोई भविष्य की बात नहीं—यह वर्तमान का सबसे बड़ा संकट है। और इसका समाधान केवल तकनीक में नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन में छिपा है।”

उनकी बातों ने सभा को एक गंभीर और विचारशील वातावरण में ढाल दिया, जहाँ हर प्रतिभागी यह महसूस कर सका कि—यह कार्यक्रम सिर्फ अकादमिक एक्सरसाइज नहीं
बल्कि पर्यावरण के लिए युद्ध का बिगुल है

उद्योग जगत भी साथ—अल्ट्राटेक और कंसल्टिंग इंजीनियरों ने साझा की रणनीतियाँ

विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल थे—

अल्ट्राटेक सीमेंट के रीजनल हेड एर. रवि ठाकुर

क्रिएटिव कंसल्टेंट एंड इंजीनियर्स प्रा. लि. के एमडी एर. अमनदीप गर्ग

दोनों विशेषज्ञों ने निर्माण उद्योग के संदर्भ में जलवायु प्रबंधन की गंभीरता को समझाते हुए कहा “बुनियादी ढांचा विकास जरूरी है, लेकिन वह विकास तभी सार्थक है जब वह धरती को बोझ नहीं, राहत दे।” उन्होंने ग्रीन कंस्ट्रक्शन, लो-कार्बन टेक्नोलॉजी, पर्यावरण-अनुकूल कंक्रीट और स्थायी अवसंरचना के उदाहरण साझा किए। उनके विचारों ने यह स्पष्ट किया कि उद्योग जगत अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर हरित तकनीकों की ओर बढ़ रहा है।

70 प्रतिभागियों ने लिया भाग—फैकल्टी से लेकर उद्योग विशेषज्ञ तक हुआ ज्ञान का मिलन

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 70 प्रतिभागियों—प्रोफेसर, शोधकर्ता, युवा शिक्षक, उद्योग से जुड़े पेशेवर—शामिल हुए। यह कार्यक्रम इस मायने में विशेष रहा कि—

शिक्षा

अनुसंधान

उद्योग

और नीति

सभी क्षेत्रों को एक मंच पर लाकर जलवायु परिवर्तन से लड़ने की रणनीतियों पर गहन चर्चा की गई।

संस्थान की दृष्टि—डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने रखा बड़ा लक्ष्य

गलगोटियास विश्वविद्यालय के सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने अपने संदेश में कहा “सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण हमारी प्राथमिकता है। शिक्षा तभी सफल है जब वह समाज की जरूरतों को समझे और उन्हें समाधान दे सके।”

उन्होंने बताया कि—संस्थान लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है जो छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों से जोड़ते हैं जिससे आने वाले समय में भारत हरित भविष्य के निर्माण में अग्रणी बन सके

उनके विचारों ने साफ किया कि गलगोटियास सिर्फ इंजीनियर तैयार नहीं करता—बल्कि पर्यावरण-समझ रखने वाले जिम्मेदार नागरिक भी तैयार करता है।

कार्यक्रम का महत्व—क्यों था यह FDP देश के लिए जरूरी?

इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल थे—

सतत बुनियादी ढांचे का निर्माण

ग्रीन मैटेरियल्स का उपयोग

जलवायु परिवर्तन के कारणों और प्रभावों की वैज्ञानिक समझ

पर्यावरण-अनुकूल इंजीनियरिंग तकनीकें

आपदा प्रबंधन

भविष्य की चुनौतियों के लिए इंजीनियरिंग समाधान

विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाला समय ग्रीन टेक्नोलॉजी का समय होगा और इंजीनियरों की भूमिका पर्यावरण योद्धा जैसी होगी। यह FDP शिक्षकों और पेशेवरों को वह कौशल प्रदान करता है, जिससे वे अपने छात्रों को वैश्विक जलवायु संकट की समझ दे सकें और उन्हें उससे निपटने का रास्ता भी दिखा सकें।

चर्चा में सामने आए विचार—‘धरती नहीं बदलेगी, हमें बदलना होगा’

इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए—

1. जलवायु परिवर्तन की गति तेज

विशेषज्ञों ने बताया कि पृथ्वी का तापमान जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, वह मानव इतिहास में अभूतपूर्व है।

2. निर्माण क्षेत्र से 38% कार्बन उत्सर्जन

कंस्ट्रक्शन सेक्टर को ग्रीन बनाने पर गहन मंथन हुआ।

3. पर्यावरण-अनुकूल तकनीक अनिवार्य

अब कोई भी संस्था या उद्योग बिना “ग्रीन कम्प्लायंस” के दीर्घकाल तक टिक नहीं सकता।

4. शिक्षा संस्थानों की भूमिका सबसे बड़ी

जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता का बीज छात्रों में बोना ही असली शुरुआत है।

गलगोटियास की पहचान—अकादमिक उत्कृष्टता + पर्यावरणीय जिम्मेदारी

यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि गलगोटियास कॉलेज केवल तकनीकी शिक्षा का केंद्र नहीं—बल्कि सतत पर्यावरणीय विकास की दिशा में अग्रसर एक संस्थान भी है।

यह आयोजन लगातार इस संदेश को मजबूत करता है कि—
“भविष्य वही होगा, जो आज तैयार किया जाएगा—और आज प्रकृति को बचाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है।”

दो दिन का यह कार्यक्रम ‘ज्ञान का पर्व’ और ‘प्रकृति का संदेश’ दोनों रहा

इस FDP ने न सिर्फ शिक्षकों और विशेषज्ञों को नई दिशाएँ दीं, बल्कि यह भी साबित किया कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होती
बल्कि धरती के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है

गलगोटियास कॉलेज का यह प्रयास आने वाले वर्षों में—
हरित तकनीक, सतत विकास और जिम्मेदार इंजीनियरिंग—की दिशा में एक मजबूत कदम माना जाएगा।