ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे – सोमवार की सुबह जब बच्चे रोज़ की तरह हंसी-खुशी स्कूल जा रहे थे, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि दिन की शुरुआत एक खौफनाक हादसे के साए में होगी। नॉलेज पार्क इलाके में स्थित एलजी गोल चक्कर के पास दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल (DWPS) की बस अचानक अनियंत्रित हो गई। कारण था — स्टेयरिंग फेल। इस अप्रत्याशित खराबी ने बच्चों और अभिभावकों के दिल की धड़कनें बढ़ा दीं।
हादसे का सिलसिला कैसे शुरू हुआ
सुबह करीब 8:15 बजे का समय था। बस में लगभग तीन दर्जन से अधिक बच्चे सवार थे। ड्राइवर ने जैसे ही गोल चक्कर पर मोड़ लिया, बस का स्टेयरिंग जाम हो गया। चंद सेकंड में बस फुटपाथ से टकराई और रुक गई। अगर सड़क पर ज्यादा ट्रैफिक होता या बस तेज रफ्तार में होती, तो नतीजा बेहद खतरनाक हो सकता था।
बच्चों के बीच मची दहशत
बस के झटके से कई बच्चे सीट से उछलकर गिर गए। कुछ बच्चों को हल्की चोटें आईं, जबकि बाकी बच्चे रोने लगे। उनके चेहरों पर साफ डर और सदमा झलक रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बच्चों की चीखें सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। कुछ ही मिनटों में गोल चक्कर के आसपास भीड़ लग गई।
तुरंत मदद और इलाज
आसपास के लोगों ने बच्चों को बस से बाहर निकाला और पानी पिलाकर शांत करने की कोशिश की। घायल बच्चों को पास के अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे इस झटके से सहमे हुए हैं।
अभिभावकों का गुस्सा चरम पर
जैसे ही घटना की खबर अभिभावकों तक पहुंची, कई माता-पिता तुरंत मौके पर और अस्पताल में पहुंच गए। उनका गुस्सा साफ झलक रहा था। कुछ अभिभावकों ने सीधे स्कूल प्रबंधन से सवाल किया —
"क्या बच्चों की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ वैन पेंट कराना और ड्राइवर रखना ही जिम्मेदारी है?"
अभिभावकों का आरोप था कि बसों की मेंटेनेंस समय पर नहीं की जाती और इस लापरवाही का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ सकता था।
जांच में क्या सामने आया
पुलिस और परिवहन विभाग ने बस को सीज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि स्टेयरिंग लॉक में खराबी थी और बस का मेंटेनेंस रिकॉर्ड भी सही तरीके से अपडेट नहीं था। परिवहन विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या बस का फिटनेस सर्टिफिकेट वैध था या नहीं।
गनीमत की वजह
सुबह के उस समय एलजी गोल चक्कर के पास ट्रैफिक कम था, वरना यह हादसा बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान कर सकता था। बस की रफ्तार भी ज्यादा नहीं थी, जिससे टक्कर का असर सीमित रहा। लेकिन हादसे ने स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी स्कूल बसों की सुरक्षा जांच अभियान चलाकर की जाएगी। साथ ही ड्राइवरों के मेडिकल और ट्रेनिंग रिकॉर्ड की भी जांच होगी। यह भी तय किया गया है कि आने वाले समय में स्कूल प्रबंधन को अपने वाहनों का मेंटेनेंस और फिटनेस रिपोर्ट सार्वजनिक करनी होगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
एक यात्री, जो हादसे के समय वहीं मौजूद थे, ने बताया —
"बस अचानक बाएं तरफ मुड़ गई, फिर फुटपाथ से टकराई। हम सब डर गए। बच्चों की चीखें सुनकर हम दौड़े और तुरंत दरवाजा खोलकर उन्हें बाहर निकाला।"
वहीं एक छात्र ने रोते हुए कहा —
"हमें बहुत डर लग रहा था, लगा बस पलट जाएगी।"
स्कूल की सफाई
स्कूल प्रशासन की ओर से बयान आया कि यह घटना अचानक हुई तकनीकी खराबी का नतीजा है। उनका कहना है कि बस की नियमित सर्विस होती है, और वे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि घटना के बाद मेंटेनेंस प्रोटोकॉल को और कड़ा किया जाएगा।
क्यों जरूरी है स्कूल बसों की सख्त जांच
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। स्कूल बसों के लिए समय-समय पर फिटनेस टेस्ट, ड्राइवर की ट्रेनिंग, स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी, और इमरजेंसी एग्जिट जैसे प्रावधान सख्ती से लागू होने चाहिए।
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